भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा को नया मुख्य चयनकर्ता बनाया है. अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति में प्रज्ञान शामिल थे. अगरकर का कार्यकाल खत्म हो गया और उनकी जगह पूर्व स्पिनर रमेश पवार की वेस्ट जोन से एंट्री हुई है. इस समिति में पवार और ओझा के अलावा आरपी सिंह, अजय रात्रा और शिव सुंदर दास हैं. इन पांचों में ओझा ने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं और इस कारण वह मुख्य चयनकर्ता नियुक्त हुए. उन्हें हर साल 3 करोड़ रुपये सैलरी के रूप में दिए जाएंगे.
प्रज्ञान पिछले कुछ समय से अंतरिम मुख्य चयनकर्ता के रूप में काम कर रहे थे. बीसीसीआई ने चयनकर्ता पद के लिए आवेदन मंगाए थे. रमेश पवार के साथ वसीम जाफर, सलिल अंकोला, जैकब मार्टिन और कोनोर विलियम्स ने आवेदन भरे थे. बीसीसीआई की क्रिकेट एडवाइजरी कमिटी (सीएसी) ने सभी आवेदनों को देखने और इंटरव्यू के बाद रमेश पवार को चयनकर्ता बनाया. पवार के चयन के बाद प्रज्ञान का मुख्य चयनकर्ता बनने का रास्ता साफ हो गया.
पार्थिव पटेल क्यों नहीं बने चयनकर्ता?
टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम भी मुख्य चयनकर्ता की रेस में आगे चल रहा था. 25 टेस्ट खेलने वाले पार्थिव अगर आवेदन भरते तो वह चयन समिति के मुखिया बन जाते हैं. हालांकि, उन्होंने अपना नाम ही नहीं दिया. पार्थिव ने वित्तीय कारणों और व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं के चलते दूरी बना ली. एक चयनकर्ता को बीसीसीआई से एक साल में 3 करोड़ रुपये मिलते हैं और वह कोई दूसरा काम नहीं कर सकता. वहीं, पार्थिव अभी गुजरात टाइटंस के सहायक और बल्लेबाजी कोच हैं. इसके अलावा वह टीवी एक्सपर्ट और कमेंटेटर के रूप में भी नजर आते हैं. पार्थिव अगर चयनकर्ता बनते तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो सकता था. माना जाता है कि इस कारण उन्होंने अपना नाम नहीं दिया.
चीफ सेलेक्टर की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी?
2023 में अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता बनने से पहले इस पद पर बैठने वालों को हर साल सैलरी के रूप में एक करोड़ रुपये मिलते थे. द टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अगरकर के पद संभालने के बाद बोर्ड ने सैलरी बढ़ाने का फैसला किया और इसे 3 करोड़ रुपये कर दिया. वहीं, कई मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि चयन समिति के अन्य सदस्यों को हर साल 90 लाख रुपये मिलते हैं.
जाफर पर कैसे भारी पड़े पवार?
भारत के लिए 31 टेस्ट मैच खेलने वाले वसीम जाफर ने चयनकर्ता पद के लिए आवेदन दिया था. अगर वह चुने जाते तो 24 टेस्ट खेलने वाले प्रज्ञान पर भारी पड़ जाते. नियमों के मुताबिक, वह समिति के अध्यक्ष बन जाते. बीसीसीआई ने आगामी वर्ल्ड कप की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए प्रज्ञान के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया. प्रज्ञान एक साल से चयनकर्ता हैं और वह टीम मैनेजमेंट की प्राथमिकताओं को समझते हैं. ऐसे में बोर्ड ने जाफर के ऊपर पवार को तरजीह दी.