आठ साल की उम्र में लगा 11000 वोल्ट का करंट, बिजली के झटके से खो दिए शरीर के चारों अंग, रोंगटे खड़े कर देगी पायल नाग की कहानी
पायल नाग ने बचपन में 11 हजार वोल्ट के करंट से अपने हाथ-पैर गंवा दिए थे. आज वह पैरा तीरंदाजी में भारत का नाम रोशन कर रही हैं. पायल नाग की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है.
पैरा-आर्चरी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है. शीतल देवी और पायल नाग ने महिलाओं के कंपाउंड डबल्स इवेंट के फाइनल में सिल्वर मेडल अपने नाम किया है. चीन की पैरा-आर्चरी जोड़ी ने फाइनल में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी को 141-150 से मात दे दी. पैरा-आर्चर पायल नाग की बात करें तो उनकी कहानी फैंस के रोंगटे खड़े कर देगी. पायल नाग ने आठ साल की उम्र में अपने चारों हाथ और पांव गंवा दिए थे. पायल नाग का जन्म ओडिशा के बलांगीर जिले में साल 2008 में हुआ था.
पायल नाग एक दिहाड़ी मजदूर राजमिस्त्री के घर पैदा हुई थीं. आठ साल की उम्र में, बिजली के एक भयानक हादसे में उन्होंने अपने चारों अंग खो दिए. इसके बाद उन्हें एक अनाथालय में रहना पड़ा, जहां से उन्होंने अपनी जिंदगी को फिर से संवारा. मुंह से पेंटिंग करते हुए उनका एक वायरल वीडियो कोच कुलदीप कुमार वेदवान की नजर में आया, जिसके बाद वे उन्हें कटरा स्थित अपनी 'माता वैष्णो देवी श्राइन आर्चरी अकादमी' ले आए. वहां, एक किसान के बेटे रहे कोच ने खुद तैयार किए गए उपकरणों की मदद से उन्हें प्रशिक्षित किया और उनकी क्षमता को एक ताकत में बदल दिया.
आठ साल की उम्र में लगा 11000 वोल्ट का करंट
साल 2015 में पायल नाग सिर्फ 8 साल की थी और रायपुर में एक निर्माण स्थल पर खेल रही थी, जहां उसके पिता काम करते थे. अचानक वह 11,000 वोल्ट के एक बिजली के तार के संपर्क में आ गई. इतने तेज करंट से शायद ही कोई बच पाता है. पायल बच तो गई, लेकिन उन्हें अपने दोनों हाथ और दोनों पैर खोने पड़े. प्रवासी मजदूरों की दुनिया में, जहां आपका शरीर ही आपकी एकमात्र पूंजी है, बिना अंगों वाले बच्चे को अक्सर एक ऐसी त्रासदी माना जाता है जिसका कोई समाधान नहीं है. उस समय पायल के माता-पिता एक ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे और इतनी भीषण गरीबी से जूझ रहे थे कि भविष्य एक बंद दीवार जैसा नजर आता था.
बचपन में चुनौतियों का सामना किया
निराशा के इसी माहौल में, लोगों की तरफ से सलाह मिलने लगी. पड़ोसियों और रिश्तेदारों को यह समझ नहीं आ रहा था कि वह कैसे खाएगी या सामान्य जीवन कैसे जिएगी, इसलिए उन्होंने उसके माता-पिता को सुझाव दिया कि उसे जहर दे देना ही ज्याद दयालुता होगी. उनके लिए पायल का जीवन एक बंद दरवाजे की तरह था. बलंगीर के जिला कलेक्टर की मदद से, पायल को पार्वती गिरी बाल निकेतन अनाथालय में आश्रय मिला. यहीं पर, बिना अंगों वाली इस बच्ची ने संघर्ष करना शुरू किया.
बलांगीर से जम्मू तक का सफर
पायल नाग ने अपने मुंह से पेंटब्रश पकड़कर पेंटिग शुरू कर दी. पायल नाग का एक वायरल वीडियो कोच कुलदीप कुमार वेदवान की नजर में आ गया, जिसमें यह छोटी बच्ची कुछ सुंदर पेंटिग बना रही थी. जम्मू में अकादमी चला रहे उनके कोच कुलदीप कुमार वेदवान ने पायल को पैरा-आर्चरी खेल से परिचित कराया. पायल नाग की बड़ी बहन वर्षा नाग उनके साथ अकादमी के हॉस्टल में रहती हैं और उनके नहाने से लेकर खाना खिलाने तक, हर चीज का ध्यान वह रखती हैं.