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एशियन पैरा गेम्स 2026 में बुधवार को शीतल देवी और पायल नाग ने पैरा कंपाउंड महिला डबल्स के फाइनल में सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया. शीतल देवी और पायल नाग को पैरा कंपाउंड महिला डबल्स के फाइनल में चीन की जू ज्यूकिंग और झाओ जिंग की जोड़ी ने 141–150 से हरा दिया. स्पोर्ट्स की दुनिया में मुश्किल हालात से लड़कर ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाने की कहानी बहुत सुनने को मिली होंगी, लेकिन शीतल देवी की कहानी सबसे अलग और भावुक कर देने वाली हैं.
शीतल देवी का जन्म 2007 में 'फोकोमेलिया' नामक विकार के साथ हुआ था. 'फोकोमेलिया' एक ऐसा विकार है, जो जन्म के समय से ही शीतल देवी की जिंदगी को हिस्सा बन गया. 'फोकोमेलिया' की बीमारी में शरीर के अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं. इसी वजह से शीतल देवी के हाथ पूरी तरह से नहीं बन पाए थे. शीतल देवी का जन्म 10 जनवरी 2007 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोइधर गांव में हुआ था. मुश्किलों के बावजूद शीतल देवी ने हार नहीं मानी और अपने अंदर खेल-कूद के अद्भुत टैलेंट को विकसित कर लिया.उन्होंने अपनी इन शारीरिक सीमाओं को कभी भी अपने बचपन का आनंद लेने में बाधा नहीं बनने दिया.
बचपन से ही शीतल देवी का इरादा बहुत पक्का था, उन्हें पेड़ों पर चढ़ना बहुत पसंद था. पेड़ों पर चढ़ाई करते-करते शीतल देवी के शरीर का ऊपरी हिस्सा काफी पावरफुल बन गया. शीतल देवी के लिए यह उनके जीवन का एक सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इंडियन आर्मी ने पैरा आर्चरी में शीतल देवी के करियर को गति देने में बड़ा रोल निभाया है. साल 2021 में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में इंडियन आर्मी का एक युवा कार्यक्रम आयोजित हुआ था. इंडियन आर्मी के कोचों की नजर तब शीतल देवी के टैलेंट पर पड़ी.
इंडियन आर्मी के कोचों ने शीतल देवी को पहले आर्टिफिशियल लिम्ब्स देने का प्लान बनाया था, लेकिन यह तरीका काम नहीं आया. काफी खोजबीन के बाद, कोचों को मैट स्टुट्जमैन के बारे में पता चला. वे बिना हाथों वाले एक ऐसे तीरंदाज थे, जिन्होंने अपने पैरों का इस्तेमाल करके लंदन 2012 पैरालंपिक खेलों में सिल्वर मेडल जीता था. शीतल जल्द ही पूर्व तीरंदाज और कोच कुलदीप वेदवान की अकादमी से जुड़ गईं.
नेशनल कॉम्पिटिशन में शीतल देवी की प्रतिभा सबके सामने आ गई. शीतल देवी ने दिग्गज पैरा आर्चर स्टुट्जमैन की तरह अपने पैरों का इस्तेमाल करते हुए एक यूनिक टेक्निक को अपनाया. साल 2022 में मार्च-अप्रैल के महीने में हरियाणा में पैरा तीरंदाजी नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था, जिसमें शीतल देवी ने हिस्सा लिया था.
छह महीने बाद, शीतल देवी ने गोवा में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. भले ही वह कोई मेडल नहीं जीत सकीं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने उनके कोच और खुद शीतल, दोनों का हौसला बढ़ाया. जहां ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाने के लिए ज्यादातर लोगों को ट्रेनिंग में सालों बिताने पड़ते हैं, वहां शीतल देवी ने साबित कर दिया कि वह उन चुनिंदा लोगों में से हैं, जिन्हें असाधारण टैलेंट का वरदान मिला है.
