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EXPLAINED: ट्रायल में जीत, किट भी मिली... फिर अचानक Asian Games से बाहर हुईं दिव्यांशी चौधरी, क्या कहता है नियम?

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 से अचानक बाहर होने के बाद दिव्यांशी चौधरी का सपना टूटा. जिसके बाद उनके बयान से बखेड़ा खड़ा हो गया है. उन्हें बाहर करने के लिए फिटनेस का हवाला दिया गया, जबकि दिव्यांशी खुद को फिट बता रही हैं. बाहर करने के लिए नियम क्या कहता है, आइए समझते हैं.

EXPLAINED: ट्रायल में जीत, किट भी मिली... फिर अचानक Asian Games से बाहर हुईं दिव्यांशी चौधरी, क्या कहता है नियम?

Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 का आगाज 19 सितंबर से होना है. जापान के लिए रवानगी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. लेकिन इससे पहले भारत की युवा वुशु प्लेयर दिव्यांशी चौधरी टूर्नामेंट से अचानक बाहर हो गईं. दिव्यांशी का दर्द छलका और उनके बयान से बवाल मच गया है. दिव्यांशी खुद को फिट बता रही हैं, जबकि स्पोर्ट्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की रिपोर्ट में वह अनफिट हैं. उनके बयान के बाद ये मुद्दा तूल पकड़ चुका है. एशियन गेम्स से बाहर करने का पूरा नियम क्या कहता है और कितने खिलाड़ी इस तरह से अचानक बाहर हुए हैं, हम आपको समझाते हैं.

दिव्यांशी चौधरी भारत के स्क्वाड का हिस्सा थीं. उन्हें एशियाई खेलों की किट भी मिल चुकी थी और नई दिल्ली में भारतीय ओलंपिक संघ के विदाई समारोह में भी शामिल हुई थीं. इसके बाद भी उन्हें ड्रॉप करने का फैसला किया गया. दिव्यांशी ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि उन्होंने इस साल की शुरुआत में सिलेक्शन ट्रायल में अनुभवी खिलाड़ी नओरेम रोशिबिना देवी को हराकर महिलाओं की 60kg सांडा कैटेगरी में अपनी जगह पक्की की थी. फाइनल ट्रायल के लिए खिलाड़ियों की आधिकारिक लिस्ट में भी 60kg कैटेगरी में दिव्यांशी और रोशिबिना दोनों का नाम दावेदारों में शामिल था.

दिव्यांशी ने ठोका ये दावा

एशियाई खेलों में दो बार मेडल जीत चुकीं रोशिबिना को अब उनकी जगह टीम में रिप्लेसमेंट के तौर पर चुना गया है. बाहर होने के बाद दिव्यांशी ने कहा, "मैं बेबस महसूस कर रही हूं. मैं इससे थक चुकी हूं, मुझे जीने का कोई मकसद नहीं दिखता. मानसिक रूप से मुझे परेशान किया गया है. जून-जुलाई से ही वे मेरे पीछे पड़े थे क्योंकि रोशिबिना जाना चाहती थी. जब मैंने उसे हराया था, तो अब उसे क्या दिक्कत है? मैंने उसे हराया था, इसलिए वहां जाना मेरा हक है. वह अलग-अलग जगहों पर कोशिश कर रही थी. यह सत्ता का गलत इस्तेमाल है."

फेडरेशन ने दिया ये जवाब

वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस बात की पुष्टि की, कि यह फैसला मेडिकल आधार पर लिया गया, न कि सिलेक्शन में किसी को प्राथमिकता देने की वजह से. वुशु फेडरेशन ने लिगामेंट की समस्या का हवाला दिया. WAI के CEO सुहेल अहमद ने बताया कि कैंप के दौरान SAI की मेडिकल जांच में दिव्यांशी को मेडिकल रूप से अनफिट पाया गया था. सुहेल ने 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' को बताया, "उन्हें मेडिकल तौर पर अनफिट पाया गया. उन्हें लिगामेंट की कोई समस्या या ऐसी ही कोई दिक्कत है. SAI ने कैंप के दौरान उनका मेडिकल टेस्ट किया था. वह सच में एक अच्छी खिलाड़ी हैं और यह हमारे लिए एक झटका है. आखिरी समय में चोटिल होना वाकई दुखद है. लेकिन नियमों के चलते, हम चोटिल खिलाड़ियों को नहीं भेज सकते." दिव्यांशी के मुताबिक उनके अपने डॉक्टर ने उन्हें फिट बताया है.

क्या कहता है नियम?

अब सवाल है कि नियम क्या कहता है, OCA संविधान और मेडिकल गाइडलाइंस के तहत हर एथलीट को प्रतियोगिता से पहले प्री-पार्टिसिपेशन मेडिकल असेसमेंट पास करना अनिवार्य है. इस टेस्ट में फिजिकल मेडिकल हिस्ट्री, फिजिकल एग्जामिनेशन और जरूरी डायग्नोस्टिक टेस्ट शामिल होते हैं. हर तरह से फिट प्लेयर को ही विदाई की अनुमति होती है. अनफिट या चोटिल खिलाड़ी को भेजना NOC (भारत में IOA) की जिम्मेदारी के खिलाफ माना जाता है. युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (MYAS) और SAI के दिशानिर्देशों के अनुसार भी यही प्रावधान है. नेशनल कैंप या अंतिम एंट्री से पहले SAI द्वारा मेडिकल जांच में पास होना जरूरी होता है.

पहले कितने खिलाड़ी हुए बाहर?

दिव्यांशी चौधरी ऐसी पहली प्लेयर नहीं हैं, जिन्हें फिटनेस के चलते अचानक बाहर किया गया है. चनंबाम रिशिकांत सिंह (वेटलिफ्टिंग) घुटने की चोट की वजह से मेडिकल ग्राउंड पर आखिरी समय में नाम वापस ले लिया गया. हर्षित राणा का भी एशियाई खेल टीम में नाम था, लेकिन फिटनेस पर संशय था. जांघ की मांसपेशी में खिंचाव के कारण बाहर कर दिया गया और यश ठाकुर को रिप्लेसमेंट बनाया गया. शाहनवाज खान और नित्या गांधे (एथलेटिक्स) भी इस लिस्ट में शामिल हैं, जो फिटनेस के चलते एशियन गेम्स 2026 से बाहर हुए.

क्या है वुशू?

वुशू एक पारंपरिक चीनी मार्शल आर्ट है, इसे सामान्य भाषा में आधुनिक "कुंग फू" भी कहा जाता है. वुशु दो अलग-अलग प्रारूपों में खेला जाता है. पहला सांडा और ताओलू होता है. सांडा एक फुल-कॉन्टैक्ट फाइटिंग इवेंट है, मुक्केबाजी की तरह इसमें भी दो खिलाड़ी एक ऊंचे प्लेटफॉर्म पर आमने-सामने मुकाबला करते हैं. लेकिन इसमें बिना रस्सियों वाला रिंग होता है. इसमें मुक्केबाजी, किक, थ्रो/गिराना और स्वीप्स की अनुमति होती है. प्लेयर्स हेडगियर, चेस्ट गार्ड, ग्लव्स और माउथगार्ड पहनकर उतरते हैं. सटीक पंच और किक मारने पर अंक मिलते हैं. विपक्षी को जमीन पर पटकने या प्लेटफॉर्म से नीचे गिराने पर सबसे ज्यादा अंक मिलते हैं. इसमें 2-2 मिनट के 3 राउंड होते हैं, जो भी प्लेयर दो राउंड जीतता है आमतौर पर यह 2-2 मिनट के 3 राउंड का होता है। जो खिलाड़ी 2 राउंड जीतता है, वह विजेता बनता है.

ताओलू क्यों है अलग

ताओलू की बात करें, तो यह जिम्नास्टिक या फिगर स्केटिंग की तरह एक नॉन-कॉम्बैट (बिना लड़ाई वाला) प्रदर्शन आधारित इवेंट है. इसमें खिलाड़ी मार्शल आर्ट के पारंपरिक मूव्स, कलाबाजी और हथियारों के साथ अपना प्रदर्शन करते हैं. रेफरी 10 अंकों के पैमाने पर खिलाड़ी के प्रदर्शन का आकलन करते हैं. इसमें मूवमेंट की सटीकता, संतुलन, गति, जंप्स और लैंडिंग को परखा जाता है.

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About the Author

Kavya Yadav

Kavya Yadav

4 साल से खेल पत्रकारिता में सक्रिय. 2022 में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर डेब्यू किया. क्रिकट्रैकर, न्यूज18 से होते हुए अब जी न्यूज हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर स्पोर्ट्स टीम का हिस्सा हैं. खेल जगत की हर हलचल, हर खास कहानी और हर ब्रेकिंग न्यूज पर पकड़. IPL, ODI World Cup, T20 World Cup, Olympics समेत कई बड़े इवेंट्स कवर किए हैं.
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