पाकिस्तान के सीनियर क्रिकेटर मोहम्मद रिजवान और इमाम उल हक इंग्लैंड दौरे के बीच में स्वदेश भेजे गए और बुरी तरह फंसे हुए हैं. रिजवान और इमाम से पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) ने लाहौर के जोहर टाउन स्थित अपने कार्यालय में लगभग दो से चार घंटे तक कड़ी पूछताछ की है. यह कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) द्वारा दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के बाद शुरू हुई है. पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी देश के गृह मंत्री भी हैं और NCCIA उन्हीं के गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है.
पाकिस्तान के जियो न्यूज (Geo News) और डॉन के रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी की पूछताछ का मुख्य केंद्र इंग्लैंड में चल रही टेस्ट सीरीज के दौरान ड्रेसिंग रूम से गोपनीय रणनीतिक चर्चाओं, टीम के अंदरूनी मामलों और संवेदनशील जानकारियों के बाहरी स्रोतों को लीक होने के आरोप हैं. जांच अधिकारियों ने दोनों खिलाड़ियों से यूके (UK) में अभ्यास सत्रों और मैचों के दौरान उनके संपर्कों, बैठकों और गतिविधियों को लेकर सवाल-जवाब किए.

मोबाइल फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आया?
लॉर्ड्स टेस्ट में हार के तुरंत बाद टीम प्रबंधन के सुरक्षा अधिकारी ने रिजवान और इमाम के व्यक्तिगत मोबाइल फोन जब्त कर लिए थे, जिन्हें बाद में जांच अधिकारियों को सौंप दिया गया था. जांचकर्ताओं ने फॉरेंसिक रूप से विश्लेषित इन मोबाइल उपकरणों से प्राप्त डेटा, संदेशों और कॉल रिकॉर्ड्स का सहारा लेकर खिलाड़ियों से पूछताछ की. लंबी पूछताछ के बाद दोनों क्रिकेटरों ने बताया कि उनके फोन तकनीकी विश्लेषण के लिए पहले ही दिए जा चुके हैं और उन्होंने लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है.

बैंक लेन-देन की जांच क्यों हो रही है?
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच एजेंसी ने दोनों खिलाड़ियों के वित्तीय खातों और बैंक लेन-देन की जांच का दायरा बढ़ा दिया. अधिकारी इंग्लैंड सीरीज से पहले और बाद के बैंकिंग रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं. इसके अंतर्गत बाहरी कंपनियों, संगठनों या व्यक्तियों से कथित तौर पर प्राप्त धन, मनी ट्रांसफर और भुगतानों की गहन समीक्षा की जा रही है.
10 पॉइंट्स में हम आपको इस मामले की पूरी जानकारी दे रहे हैं:

NCCIA क्या है और कैसे करता है काम?
नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) पाकिस्तान की एक संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसी है. यह गृह मंत्रालय (Ministry of Interior) के तहत काम करती है. इस एजेंसी का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों, डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन डेटा उल्लंघन से निपटना है. यह संस्था मुख्य रूप से डिजिटल फॉरेंसिक, तकनीकी निगरानी और साइबर इंटेलिजेंस के माध्यम से काम करती है, ताकि हाई-प्रोफाइल डिजिटल अपराधों, हैकिंग और संवेदनशील डेटा के अनधिकृत प्रसार की जांच की जा सके. इसके जांचकर्ता संचार लीक और साइबर खतरों का पता लगाने के लिए उन्नत मोबाइल डेटा एक्सट्रैक्शन, डिवाइस फॉरेंसिक और डिजिटल ऑडिटिंग का उपयोग करते हैं. आम पुलिस इकाइयों की तुलना में व्यापक कानूनी शक्तियों के साथ कार्य करते हुए यह एजेंसी डिजिटल सुरक्षा उल्लंघनों, ऑनलाइन वित्तीय अपराधों और राष्ट्रीय संस्थानों को प्रभावित करने वाली सेंधमारी को टारगेट करती है.

2010 का फिक्सिंग कांड
साल 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट सीरीज के दौरान पाकिस्तान का कुख्यात स्पॉट फिक्सिंग घोटाला सामने आया था. इस मामले ने कप्तान सलमान बट, गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर की संलिप्तता वाले एक बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था. ब्रिटिश अखबार 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' के एक स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ कि खिलाड़ियों ने मैच के दौरान जानबूझकर नो-बॉल फेंकी थीं. इसके बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने दोषी खिलाड़ियों पर कई सालों का प्रतिबंध लगा दिया, जबकि ब्रिटेन (UK) की अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी की साजिश रचने और भ्रष्ट भुगतान स्वीकार करने के जुर्म में जेल की सजा सुनाई थी. यह घटना क्रिकेट इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक के रूप में दर्ज है.