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दिवाली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी पर्व मनाया जाता है. इस साल नरक चतुर्दशी शनिवार, 7 नवंबर 2026 को मनायी जाएगी. इस पर्व को छोटी दिवाली और रूप चौदस भी कहा जाता है. इस दिन दीपदान किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण की उपासना भी की जाती है. इस दिन यम का दीपक जलाने का भी विधान है. इन सबके अलावा नरक चतुर्दशी की सुबह अभ्यंग स्नान करने का भी विधान है. अभ्यंग स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है. इस स्नान से शारीरिक स्वच्छता के साथ ही आत्मिक शुद्धि भी होती है. आइए विस्तार से जानें कि अभ्यंग स्नान कैसे किया जाता है और इससे जुड़ा शुभ मुहूर्त क्या है.
अभ्यंग स्नान हर दिन के स्नान से थोड़ा अलग होता है. इस स्नान के लिए पहले पूरे शरीर या शरीर के प्रमुख अंगों पर तेल लगाया जाता है. इसके बाद पूरे शरीर पर उबटन लगाया जाता है. जहां तक आयुर्वेद की बात करें तो अभ्यंग स्नान दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है. पारंपरिक रूप से इस स्नान के लिए तिल का तेल, नारियल का तेल या संबंधित मौसम से जुड़े तेल का इस्तेमाल किया जाता है. अभ्यंग स्नान करने से त्वचा निखरती है और कोमल होती है. इस स्नान को करने से शरीर में रक्त का संचार अच्छी तरह होता है. इस स्नान को करने से शरीर सभी तरह की नकारात्मकता से मुक्त होता है. अभ्यंग स्नान करने से माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं और दरिद्रता दूर होती है.
पौराणिक कथा है कि भौमासुर जिसका एक नाम नरकासुर था उसने इंद्रदेव को हराया और स्वर्ग से देवताओं को निकाल दिया. इसके बाद उसने तीनों लोकों पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया. देवताओं और ऋषियों पर उसने बहुत अत्याचार किए. भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं व आम लोगों की कन्याओं का हरण कर बंदी बना लिया था. देवराज इंद्र ने जब भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी तब भगवान ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर नरकासुर का वध कर दिया. जब युद्ध समाप्त हुआ तो भगवान श्रीकृष्ण की देह पर रक्त और धूल लगी थी. तब स्वयं को स्वच्छ करने के लिए श्रीकृष्ण ने तेल और उबटन से स्नान किया. इसी स्नान को अभ्यंग स्नान कहा गया. तभी से नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान करने की परंपरा चली आ रही है. नरकासुर वध का वर्णन कई शास्त्रों में मिलता है.
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान 07 नवंबर को किया जाएगा. इस दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान की तैयारी करें. इसके बाद सुबह 6 बजकर 37 मिनट पर स्नान करें.
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह उठकर स्नान की तैयारी करें.
सबसे पहले अपने शरीर पर तिल या सरसों का तेल मलें.
अभ्यंग स्नान के लिए अपने-अपने घर की परंपरा का पालन करें.
उबटन बनाएं और पूरे शरीर पर लगाएं.
उबटन लगाने के कुछ समय बाद पानी से स्नान कर लें.
स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें.
भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु का स्मरण करें.
घर के मंदिर में दीप जलाएं और नियमित पूजा करें.
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है, मुहूर्त और पूजा विधि स्थान के अनुसार बदल सकती है.