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गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार आते ही हर तरफ बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. बाजारों में छोटे-बड़े आकार और अलग-अलग रूपों में गणेश जी की सुंदर मूर्तियां सज जाती हैं.
जब भक्त अपने घर के लिए मूर्ति खरीदने निकलते हैं, तो उनके मन में कई तरह के सवाल आते हैं. सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि गणपति की सूंड किस तरफ मुड़ी होनी चाहिए और घर के लिए कैसी मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है.
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को सुख, समृद्धि और विघ्नहर्ता माना गया है. इसलिए मूर्ति का सही चयन करना बहुत जरूरी होता है.
घर में स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति सबसे उत्तम होते हैं. बाईं तरफ सूंड वाले गणेश जी को वामावर्ती गणपति कहा जाता है.
इस स्वरूप को बहुत ही शांत, सौम्य और दयालु माना गया है. इनकी पूजा के नियम बेहद सरल होते हैं और इन्हें सामान्य विधि-विधान से पूजा जा सकता है.
यही वजह है कि ज्यादातर लोग अपने घर के मंदिर या गणेश उत्सव के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा ही पसंद करते हैं.
दूसरी तरफ दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी को सिद्धिविनायक या दक्षिणावर्ती गणपति कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्वरूप में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है.
इनकी पूजा-अर्चना के नियम बेहद सख्त और कठिन माने जाते हैं. अगर पूजा में थोड़ी सी भी चूक हो जाए, तो शुभ फल नहीं मिलता है.
इसी कारण आम तौर पर घर के भीतर दाईं सूंड वाले गणपति स्थापित करने से परहेज किया जाता है. इनकी स्थापना मंदिरों में ही अधिक देखने को मिलती है.
मूर्ति पसंद करते समय केवल सूंड की दिशा ही नहीं, बल्कि बप्पा की मुद्रा का भी ध्यान रखना चाहिए. घर के लिए हमेशा बैठी हुई मुद्रा वाले गणपति की मूर्ति चुनना सबसे अच्छा माना जाता है.
बैठी हुई प्रतिमा घर में धन, सुख और शांति को स्थिर बनाए रखती है. इसके अलावा मूर्ति लेते समय यह भी देखें कि बप्पा के साथ उनका वाहन चूहा मौजूद हो और उनके एक हाथ में मोदक या लाडू जरूर हो. ऐसा स्वरूप घर में समृद्धि लाता है.
गणपति की प्रतिमा खरीदते समय घर के पूजा स्थल के आकार का ध्यान रखना चाहिए. बहुत ज्यादा बड़ी मूर्ति घर लाने के बजाय छोटे या मध्यम आकार की प्रतिमा चुनना समझदारी है.
छोटी मूर्ति की पूजा-सेवा घर में आसानी से की जा सकती है. इसके साथ ही गणेश जी के चेहरे के भाव शांत और प्रसन्नचित्त होने चाहिए. खंडित यानी कहीं से भी टूटी हुई या धुंधली नक्काशी वाली मूर्ति भूलकर भी घर न लाएं.
घर में मूर्ति लाते समय स्थान और दिशा का सही चुनाव करना भी बहुत आवश्यक है. गणपति बप्पा की प्रतिमा को घर के उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ फलदायी होता है.
मूर्ति स्थापित करते समय ध्यान रखें कि बप्पा का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ रहे. स्थापित करने के बाद प्रतिदिन सुबह-शाम नियम से बप्पा की आरती करें और उन्हें दूर्वा व मोदक का भोग लगाएं. इससे घर में सदैव सकारात्मक ऊर्जा और मंगल बना रहता है.
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषाचार्यों के मतों और पारंपरिक शास्त्रों पर आधारित एक विवरणात्मक रिपोर्ट है. इसका उद्देश्य पाठकों तक गणेश पूजन और वास्तु से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है.