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Triratra Vrat kya hai: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि पर्व का बड़ा महत्व है. यह समय होता है मां भगवती की उपासना करने और उनकी कृपा पाने का, इस समय माता अपने भक्त को ऊर्जा और शक्ति पाने का आशीर्वाद देती हैं. पूरे नौ दिनों तक भक्त माता की उपासना करते हैं, कलश स्थापना से लेकर कन्या पूजन तक मां के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी नवरात्रि से जुड़ा एक व्रत त्रिरात्र व्रत भी होता है. इन तीन दिनों के व्रत को करके नौ दिन का फल प्राप्त किया जा सकता है. आइए इस त्रिरात्र व्रत के बारे में विस्तार से जानें.
पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार के दिन से होगा और नवरात्रि का फल पाने के लिए भक्त पूरे नौ दिनों तक अन्न त्यागकर उपवास का संकल्प करते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति नौ दिनों का कठोर व्रत नहीं रख पाता है तो ऐसे में साधकों को त्रिरात्र व्रत रखना उत्तम माना जाता है. त्रिरात्र व्रत शारदीय नवरात्रि में अंतिम के तीन तिथियों पर रखा जाता है. यह तिथियां हैं सप्तमी, अष्टमी और नवमी.
त्रिरात्र व्रत नवरात्रि के अंतिम तीन तिथियों में सप्तमी, अष्टमी और नवमी को रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भक्त मां दुर्गा की विशेष उपासना अगर इन तीन दिनों में करें और व्रत के नियमों का सही से पालन करें तो माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साधक को इन तीन तिथियों में सात्विक भोजन या फलाहार करने का नियम है. त्रिरात्र व्रत में मातारानी के तीन प्रमुख स्वरूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की उपासना की जाती है. जिससे एक साथ शक्ति, धन और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है. धार्मिक मान्यता है कि इन तीनों शक्ति स्वरूपों की उपासना करने से जीवन के अनेक क्षेत्रों में सफलता मिलती है.
नवरात्रि का सातवां दिन यानी सप्तमी तिथि पर महाकाली की पूजा की जाती है. जिससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है.
नवरात्रि का आठवां दिन यानी अष्टमी तिथि पर महालक्ष्मी की पूजा की जाती है. धन, वैभव, समृद्धि और ऐश्वर्य का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि का नौवां दिन यानी नवमी तिथि पर महासरस्वती की पूजा की जाती है. ज्ञान, बुद्धि और कला का आशीर्वाद मिलता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)