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Shardiya Navratri 2026 Havan Samagri List: शारदीय नवरात्र का बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है जो नौ दिन तक चलता है. यह त्योहार नौ दिन का होता है. कुछ घरों में नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन किया जाता है तो किसी घर में अष्टमी तिथि पर हवन कर व्रत और पूजा को संपन्न किया जाता है. उत्साह और श्रद्धा भाव के साथ भक्त मातारानी की नौ दिन उपासना करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. इस साल नवरात्र की शुरुआत 12 अक्टूबर को शुरू हुआ है और 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग हो रहा है.
नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन करने का विशेष महत्व है. हवन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह मानसिक शांति का भी कारक होता है. विशेषकर दुर्गा अष्टमी और महानवमी पर हवन करने से देवी मां की कृपा बनी रहती है. नवरात्र के हवन में कुछ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया जाता है. आइए हवन सामग्री की पूरी लिस्ट को देख लें.
कूष्माण्ड (पेठा), 15 पान, 15 सुपारी
15 जोड़े लौंग, 15 छोटी इलायची
15 कमल गट्ठे, जायफल 2
मैनफल 2, पीली सरसों
पंच मेवा, सिंदूर, उड़द मोटा
शहद 50 ग्राम, ऋतु फल 5
केले, नारियल 1, गोला 2
गूगल 10 ग्राम, लाल कपड़ा
चुन्नी, गिलोय, सराईं 5, आम के पत्ते
सरसों का तेल, कपूर
पंचरंग, केसर, लाल चंदन
सफेद चंदन, सितावर
कत्था, भोजपत्र
काली मिर्च, मिश्री
अनारदाना, 1.5 किलो चावल
बूरा, घी एक किलो, जौ 1.5 किलो, 2 किलो तिल.
नोट- अगर, तगर, नागर मोथा, बालछड़, छाड़छबीला, कपूर कचरी, भोजपत्र, इन्द जौ, सितावर, सफेद चंदन को बराबर मात्रा में थोड़ी-थोड़ी सामग्री मिलाकर रखें.
हवन के समय सही सामग्री को इकट्ठा कर लें और सही मुहूर्त पर इन्हें हवन के लिए उपयोग में लाएं. इससे मां दुर्गा प्रसन्न होंगी और जीवन में सुख-समृद्धि पाने का आशीर्वाद देंगी. इस नवरात्र पर नियम अनुसार हवन करें तो जीवन में सकारात्मकता आ सकती है. आध्यात्मिक उन्नति के रास्ते खुल सकते हैं. विधि-विधान से हवन कर पूर्ण आहुति देने के बाद यजमान को यथाशक्ति दक्षिणा मां के चरणों में अर्पित करना चाहिए. इसके बाद एक साथ आकर पूरे परिवार को आरती करनी चाहिए. हवन संपन्न करें और मां से भूलचूक के लिए क्षमा मांगें. इससे घर के सभी कार्य संपन्न होंगे और जीवन मंगलमय होगा.
(Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं, स्थानीय परंपराओं और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सूचना देना है, किसी मान्यता या दावे की पुष्टि करना नहीं.)