वो 5 कारण जिनके चलते सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध-तर्पण है बेहद जरूरी! न करने से क्या-क्या होते हैं नुकसान?
सर्व पितृ अमावस्या पर श्राद्ध-तर्पण का विशेष महत्व है, लेकिन क्यों? इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं. साथ ही धार्मिक मान्यता है कि यदि पितृ अमावस्या के दिन तर्पण न करें तो इससे जीवन में कई समस्याएं आ सकती हैं.
पितृ पक्ष का सबसे अहम दिन होता है इसका समापन यानी कि सर्व पितृ अमावस्या का दिन. इस दिन पितरों के लिए आखिरी श्राद्ध-तर्पण करके विदाई दी जाती है. सर्व पितृ अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्व है. हालांकि कई लोगों के मन में जिज्ञासा है कि पितृ पक्ष के सारे दिनों में अमावस्या सबसे ज्यादा खास क्यों है, जबकि पूर्वजों का श्राद्ध उस दिन विशेष रूप से किया जाता है, जिस तिथि को उनका निधन हुआ हो. आइए जानते हैं कि सर्व पितृ अमावस्या क्यों इतनी खास है? साथ ही इस दिन श्राद्ध-तर्पण न किया जाए तो क्या-क्या नुकसान हो सकता है?
...इसलिए खास है सर्व पितृ अमावस्या?
1. सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण किया जा सकता है, जिनकी तिथि ज्ञात नहीं है.
वहीं कई लोगों को अपने सारे पूर्वजों के बारे में जानकारी नहीं होती है. ऐसे में इस तिथि पर ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध-तर्पण किया जाता है.
2. सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है. इस दिन पितरों को विदाई दी जाती है. वे मृत्युलोक से वापस पितृ लोक में जाते हैं. ऐसे में उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई देनी चाहिए. लिहाजा इस दिन जरूर तर्पण आदि पितृ कर्म करना चाहिए.
3. कई बार लोग पूर्वजों के निधन की सभी तिथियों पर श्राद्ध नहीं कर पाते हैं. ऐसे में जिन पितरों का श्राद्ध नियत तिथि पर नहीं हो पाया है, उनका श्राद्ध भी सर्व पितृ अमावस्या के दिन किया जा सकता है.
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4. ज्योतिष के अनुसार, सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है. वरना पितृ दोष जीवन में ढेर सारी समस्याएं देता है. जैसे- आर्थिक तंगी, घर में झगड़े-कलह, वंश न बढ़ना, घर में शादी योग्य लड़का-लड़की का विवाह न हो पाना.
5. पितृ पक्ष में श्राद्ध-तर्पण पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है. साथ ही कुछ नियमों का पालन किया जाता है. यदि पितृ पक्ष के दौरान कोई भूल-चूक हो गई हो, नियम टूट गया हो, तब आखिरी दिन अमावस्या को विधिवत तरीके से श्राद्ध-तर्पण करके पितरों से गलतियों की माफी मांगें. उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें, ताकि वे आपको धन, यश, बल और वंशवृद्धि का आशीर्वाद दें.
श्राद्ध-तर्पण न करने के नुकसान
मान्यता है कि यदि श्राद्ध-तर्पण विधिवत तरीके से न किया जाए तो पितृ नाराज हो जाते हैं. इससे पितृ दोष लगता है, जो कि हंसते-बसते परिवार को भी बर्बाद कर देता है. दरिद्रता घेर लेती है, घर के लोगों के बीच झगड़ा-तनाव रहता है. कामों में बाधाएं आती हैं, योग्यता के बाद भी तरक्की नहीं मिल पाती है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय धारणाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है. इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है. श्राद्ध, तर्पण और पितरों से जुड़े कर्मकांड करते समय अपनी श्रद्धा, परंपरा और मान्यताओं का ध्यान रखें.)