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पितरों की भी होती है दिवाली! जानिए इस साल कब है यह खास दिन और दीपदान के नियम

जिस तरह हम लोगों की दिवाली होती है, देव दिवाली होती है वैसे ही पितरों की भी दिवाली होती है. पितरों की दिवाली के दिन उनके लिए दीपदान करना च‍ाहिए. इससे उनके स्‍वर्ग जाने का रास्‍ता खुलता है. इस साल पितृ दिवाली कब है, जानिए तारीख.

पितरों की भी होती है दिवाली! जानिए इस साल कब है यह खास दिन और दीपदान के नियम
Image Credit: पितृ दिवाली पर पितरों के निमित्‍त दीपदान करें. (Photo:Ai)

पितृ पक्ष का हर दिन खास होता है और पितरों यानी कि पूर्वजों को समर्पित है. लेकिन इसकी कुछ तिथियां विशेष हैं, जैसे- पितृ दीपावली या पितृ दिवाली. हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (पितृ पक्ष) को पितृ दिवाली मनाई जाती है. मान्‍यता है कि इस दिन पितरों के लिए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने और उनके निमित्‍त दीपदान करने से उन्‍हें स्‍वर्ग मिलता है. पितृ अपने परिजनों के साथ भोजन करने के लिए आते हैं.

पितृ दिवाली पर दीपदान के खास स्‍थान

वैसे तो लोग अपने घर या आसपास के जलाशयों के पास पितृ दीपावली का दीपदान करते हैं लेकिन देश के कुछ खास स्‍थान ऐसे हैं, जहां पितृ दिवाली पर दीपदान करना विशेष शुभ माना गया है. ये स्‍थान हैं - गया का विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी का देवघाट. हर साल आश्विन कृष्‍ण त्रयोदशी पर यहां देश-दुनिया से लोग पहुंचते हैं और बड़ी संख्‍या में दीपदान करते हैं.

श्रद्धालु यहां अपनी श्रद्धा अनुसार 108 से लेकर 1001 दीए जलाते हैं. शाम को यहां का माहौल देखने काबिल होता है. जब हजारों दीए यहां जगमगाते हैं.

लगाएं भोग

पितृ दिवाली के दिन पितरों के निमित्‍त श्राद्ध किया जाता है, साथ ही इस दिन गया धाम के विष्णुपद मंदिर में 56 भोग अर्पित किए जाते हैं. खासतौर पर खीर का भोग जरूर लगाना चाहिए. मान्‍यता है कि भूख-प्‍यास से व्‍याकुल पितरों को जब उनके परिजन खीर का भोग लगाते हैं, तो वे तृप्‍त होकर उन्‍हें खूब आशीर्वाद देते हैं.

इस दिन ब्राह्मणों को खीर खिलाकर पितरों को तृप्त करें. साथ ही गरीबों को भी खीर-पूरी का भोजन कराएं. ऐसा करने से पितर बहुत प्रसन्न होते हैं.

ऐसे करें पितृ दिवाली पर दीपदान

जो लोग गया जाकर दीपदान नहीं कर पा रहे हैं, वे अपने घर पर रहकर भी पितरों के लिए दीपदान कर सकते हैं. इसके लिए मिट्टी के दीपक में चौमुखी बाती रहे हैं, फिर इसमें 2 लौंग और सरसों का तेल डालें. इस दीपक को जलाकर घर की दक्षिण दिशा में रखें. वहीं कुछ लोग सर्व पितृ अमावस्‍या के दिन पितरों के लिए दीपदान करते हैं. ऐसे में आपके परिवार में जो परंपरा हो, आप उसका पालन कर सकते हैं.

(Disclaimer: यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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