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Pitru Paksha 2026 Bhadrapada Purnima: भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से ही पितृ पक्ष शुरू हो जाता है. इस दिन से ही अपने पूर्वजों को उनके वंशज तर्पण कर संतुष्ट करते हैं, पिंडदान करते हैं और श्राद्ध कर्म कर उनकी शांति की कामना करते हैं. इस साल आज 26 सितंबर से यानी भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है. इसी दिन से पितृलोक का दरवाजा खुल जाता है और हमारे पूर्वज यानी पितृ पृथ्वी लोक पर आकर तर्पण ग्रहण करते हैं. सनातन धर्म में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है. सवाल ये है कि भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर ही पितृलोक का दरवाजा खुलने का रहस्य क्या और इसके पीछे का पौराणिक कारण क्या हैं.
पौराणिक मान्यताएं हैं कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन यमलोक के द्वारों को यमराज खोलते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर मृत्यु के देवता यमराज सभी मृत आत्माओं यानी पितरों को अपने बंधन से मुक्त करते हैं. यमराज की अनुमति पाकर पितर अपने वंशजों से तर्पण, अर्घ्य और भोजन लेने के लिए पृथ्वी लोक पर आ जाते हैं.
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पितृलोक का समय पृथ्वी के समय से भिन्न होता है. जब पृथ्वी में एक साल बीत रहा होता है तो यह पितृलोक के एक दिन और एक रात के बराबर माना जाता है. भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के 16 दिन पितरों के लिए उनके भोजन काल मान लिया जाता है. जिसके कारण ही वे अपने वंशजों से तर्पण के माध्यम से जल और भोजन ग्रहण करने आते हैं.
जिन पूर्वजों की मृत्यु किसी भी माह की पूर्णिमा तिथि पर हुई है उनका श्राद्ध इसी तिथि पर किया जाता है. इस तरह से इसी दिन से 16 दिनों का महापर्व यानी पितृ पक्ष शुरू हो जाता है. जिस तिथि पर मृत्यु हुई हो उसी तिथि पर तर्पण का विधान है. इस दिन से लोग तिथि अनुसार अपने पितरों के नाम से जल, तिल और कुशा से तर्पण करते हैं. अगर मृत्यु तिथि की जानकारी न हो तो ऐसे पितृ का अश्विन अमावस्या तिथि पर सर्वपितृ अमावस्या के दिन तर्पण किया जाता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)