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सर्वपितृ अमावस्या पितृपक्ष का अंतिम दिन है जिसके कारण इस महत्व और अधिक बढ़ जाता है. सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के बाद सात्विक भोजन करवाने की परंपरा है. यह भोजन 10 लोगों के साथ जीवों को कराया जाता है जिससे पितरों तक भोजन पहुंचता है और उन्हें शांति और तृप्ति प्राप्त होती है. शास्त्रों में पितृ शांति के लिए पिपलिकादि बलि से लेकर ब्राह्मण भोज तक का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि कर्म करने के बाद भोज कराएं तो पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर किन 10 लोग और जीव को भोजन कराना चाहिए.
सर्वपितृ अमावस्या पर गोबलि दें अर्थात गाय को पत्ते पर भोजन परोसा खिलाएं तो पितृ प्रसन्न होते हैं. गाय को महुआ या पलाश के पत्तों पर भोजन रखकर दें और 'गौभ्यो नम:' कहकर माता को प्रणाम करें. ध्यान रहे घर से पश्चिम दिशा में ही गाय को भोजन कराएं.
सर्वपितृ अमावस्या पर श्वानबलि दें यानी पत्ते पर भोजन परोस कर कुत्ते को सम्मानपूर्वक खिलाएं. कुत्ता तुरंत न मिल पाए तो उसके लिए निकाला गया भोजन का अंश बहते जल में प्रवाहित करें या पीपल की जड़ के पास रख आएं.
सर्वपितृ अमावस्या पर काकबलि दें यानी कौए के लिए छत या भूमि पर भोजन परोस कर खिलाएं. धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार कौवे को यमराज का दूत कहा गया और पितरों का संदेशवाहक भी माना गया है. जब कौए को भोजन कराते हैं तो यह सीधे पितरों को पहुंचता है.
पिपलिकादि बलि यावी चींटी-कीड़े-मकौड़ों के लिए पत्ते भोजन परोसें. उनके लिए ऐसी जगह पर भोजन रखें जहां वे आकर सेवन कर सकें. सूखे गेहूं के आटे में थोड़ी चीनी मिलाकर चींटियों के बिल के पास डाल सकते हैं.
सर्वपितृ अमावस्या पर देवबलि यानी देवताओं के लिए भोजन निकालें जैसे- श्रीविष्णु, अर्यमा, यम, चित्रगुप्त आदि के लिए पत्ते पर भोजन परोस कर उनका आह्वान करें. अब इस परोसे गए भोजन को घर से बाहर निकालकर रख दें.
इन सभी को भोजन कराने के बाद ब्राह्मण भोज कराएं. सर्वपितृ अमावस्या पर जब घर बुलाए गए ब्राह्मण अच्छे से भोजन कर लें तो उन्हें दान- दक्षिणा दें. ब्राह्मण न मिले तो संन्यासी या साधुजन को भोजन करा दें.
ऐसा कहा जाता है कि 100 ब्राह्मण एक भानेज यानी एक भांजे को भोजन कराने से 100 ब्राह्मणों को भोजन कराने का फल प्राप्त होता है. अगर घर में भांजा या भांजी है तो सबसे पहले उन्हें भोजन करवाएं. ऐसा करना बहुत शुभ और पुण्यदायक माना गया है.
सर्वपितृ अमावस्या पर अगर जमाई या बहनोई को भोजन कराएं तो पितृ दोष से होने वाली परेशानियों का अंत होता है. इन्हें आदर-सत्कार के साथ भोजन कराने से पितर अति प्रसन्न होते हैं.
सर्वपितृ अमावस्या पर मछलियों को भी अन्न खिलाएं. हालांकि पितरों के निमित्त जो पिंडदान करते हैं उसे नदी में विसर्जित करने का विधान है जिससे मछलियों और जलचर जंतुओं का भोज हो जाता है.
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल को जल अर्पित करने और उसकी पूजा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है. पेड़ में जल देना पेड़ को भोजन देने जैसा ही है. सर्वपितृ अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें तो इसे अति शुभ माना गया है.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें और किसी भी प्रकार के निश्चित परिणाम या लाभ का दावा न मानें.)