Pitru Paksha 2026: पितृ को परम शांति दिलाता है त्रयोदशी श्राद्ध, जान लें कुतुप-रौहिण मुहूर्त और तर्पण विधि
Pitru Paksha 2026 Trayodashi Shradh: त्रयोदशी तिथि पर पितृ के तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है, इस तिथि पर अपने पितृ का विधि-विधान से तर्पण करें तो पितृ सद्गति पाते हैं और वंशजों को आशीर्वाद देते हैं.
पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि का बड़ा महत्व बताया गया है. इस दिन पितृ का श्राद्ध कर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और परिवारवालों को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इस साल 2026 में त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध 08 अक्टूबर, गुरुवार के दिन त्रयोदशी श्राद्ध है. त्रयोदशी तिथि पर उन पितृ का भी तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि पर हुई हो. त्रयोदशी तिथि पर श्रद्धा भाव से किया गया तर्पण पितृ को परम शांति दिलाता है. आत्मा को सद्गति और मोक्ष प्राप्त होता है. पितृ प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और धन प्राप्ति का आशीर्वाद देते हैं.
त्रयोदशी श्राद्ध तिथि
त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 07 अक्टूबर 2026 को रात 23:16 बजे से होगी. त्रयोदशी तिथि का समापन 08 अक्टूबर 2026 को रात 22:15 बजे तक होगी. श्राद्ध कर्म 08 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा.
त्रयोदशी श्राद्ध के मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त श्राद्ध करने का सर्वश्रेष्ठ समय होगा: दोपहर 11:45 से लेकर 12:32 बजे तक.
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 से लेकर 01:19 बजे तक.
अपराह्न काल श्राद्ध का मुख्य समय होगा: दोपहर 01:19 से लेकर 03:39 बजे तक.
त्रयोदशी श्राद्ध पर तर्पण विधि
सुबह उठकर स्नान आदि कर साफ वस्त्र पहनें.
अब शुभ मुहूर्त में श्राद्ध के लिए घर के आंगन, किसी पवित्र नदी तट या मंदिर प्रांगण को चुनें.
फिर से स्नान करके स्वच्छ और पवित्र वस्त्र पहनकर श्राद्ध कर्म के लिए आसन लेकर बैठ जाएं.
जल, दूध और काले तिल को मिलाकर पितरों का ध्यान करें और श्रद्धाभाव से तर्पण करें.
जौ के आटे, पके चावल और काले तिल के मिश्रण से कुशा पर पिंड बनाकर रखें.
अब इन पिंडों को पूर्वजों के नाम अर्पित करें और उनकी शांति की प्रार्थना करें.
अब सात्विक भोजन बनाएं और पंचबलि भोग निकालें.
इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं. अब वस्त्र, अन्न और दान दक्षिणा दें.
त्रयोदशी श्राद्ध पर किन बातों का रखें ध्यान
त्रयोदशी श्राद्ध पर अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितृ का तर्पण करें.
श्राद्ध का भोजन शुद्ध और सात्विक हो इसका ध्यान करें. भोजन तामसिक सामग्री न रखें.
श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को पूरे दिन शांत रहना चाहिए. क्रोध करने से बचें
पूजा स्थल और भोजन पकाने वाली जगह को शुद्ध रखें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)