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Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितरों को याद करने, उन्हें सम्मान देने और उनकी शांति के लिए पितृ पक्ष समर्पित है. इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म को संपन्न करते हैं. इस साल पितृ पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध आज 30 सितंबर को किया जा रहा है. इस लेख में हम पंचमी श्राद्ध के बारे में जानेंगे जिस कुंवारा श्राद्ध भी कहा जाता है. आइए जानें पंचमी तिथि के श्राद्ध के बारे में और कुंवारा पितृ दोष के लक्षण क्या हैं.
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 30 सितंबर 2026 को चतुर्थी तिथि के श्राद्ध के बाद पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक चतुर्थी तिथि है इसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी. पंचमी तिथि का समापन 1 अक्टूबर को दोपहर के श्राद्ध मुहूर्त से पहले ही समाप्त हो जाएगी. धर्मशास्त्रों में श्राद्ध कर्म के लिए उत्तम समय दोपहर को ही माना गया है. ऐसे में इस साल दोनों तिथियों का श्राद्ध 30 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच होगा.
पंचमी तिथि पर श्राद्ध उन पूर्वजों का किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी महीने के किसी पक्ष में पंचमी तिथि को हुई है. धार्मिक मान्यता है कि पंचमी श्राद्ध पर कुंवारे पितृ का तर्पण किया जाता है यानी वे पितृ जिनकी मृत्यु बिना विवाह किए ही हो गई हो. यही कारण है कि पंचमी तिथि के श्राद्ध को कुंवारा पंचमी कहते हैं.
कुंवारा पितृ दोष से बचने के लिए नारायण नागबली पूजा करें. त्रिम्बकेश्वर, गया या हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर नारायण नागबली या त्रिपंडी श्राद्ध करवाया जा सकता है. इससे अकाल मृत्यु या बिना विवाह के मृत्यु प्राप्त पितृ शांत होते हैं और कुंवारा पितृ दोष दूर होता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)