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Shashti Shraddha 2026 Pitru Paksha In Hindi: आश्विन मास की षष्ठी तिथि का श्राद्ध कर्म 1 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा. पितृपक्ष में हर तिथि का एक विशेष महत्व है, इसी तरह षष्ठी तिथि भी पितृपक्ष की महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है. शास्त्रों में षष्ठी तिथि को चिद्र तिथि कहा गया है जोकि मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित है. हालांकि पितृपक्ष में इसका महत्त्व बढ़ जाता है. आइए जानते हैं पितृ पक्ष की षष्ठी तिथि पर श्राद्ध कर्म करने का महत्व और इस तिथि का मुहूर्त क्या है.
जिन पितरों की मृत्यु किसी भी पक्ष की षष्ठी तिथि पर हुई हो उनका श्राद्ध कर्म षष्ठी श्राद्ध पर करने का विधान है. कुछ परंपराओं में स्त्रियों का विशेष श्राद्ध षष्ठी तिथि पर ही किया जाता है. इस दिन के श्राद्ध कर्म से पितर संतुष्ट होकर परिवार को साहस और सुरक्षा का आशीर्वाद देते हैं. संतान सुख और संतान रक्षा का आशीर्वाद तो मिलता है लेकिन इसके साथ ही शत्रु भय का भी नाश होता है. परिवार में चल रहीं संतान-संबंधी बाधाओं का अंत होता है. पितरों के निमित्त इस दिन श्राद्ध कर्म करने के साथ ही स्कंद पूजन करना भी अति शुभ फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान स्कंद की उपासना करने से से पितृ शांति, संतान रक्षा और परिवार की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
01 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:35 बजे से षष्ठी तिथि का प्रारंभ होगा और तिथि का समापन 02 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:15 बजे तक होगा. आइए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान के लिए शुभ मुहूर्त देखें.
षष्ठी श्राद्ध मुहूर्त:
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से लेकर दोपहर 12:34 बजे तक.
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:34 बजे से लेकर दोपहर 01:22 बजे तक.
अपराह्न काल: दोपहर 01:22 बजे से लेकर अपराह्न 03:45 बजे तक.
सुबह स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें.
पवित्र स्थान पर कुशा, जल और तिल से पितरों का तर्पण करें.
पितरों के नाम चावल, तिल, जौ और घी से पिंड बनाएं और दान करें.
ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.
पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त मंत्र बोलें. मंत्र है- ॐ पितृदेवाय नमः.
परिवार के सदस्य सात्विक भोजन करें और जरूरतमंदों में दान दें.
पितरों का तर्पण करें.
पितरों का पिंडदान करें.
ब्राह्मणों को भोजन कराएं.
श्राद्ध भोज में पंचबलि कर्म करें यानी चींटी, कीड़े-मकौड़ों आदि, कुत्ता, कौवा, देवता और गाय के लिए भोजन निकालें.
जान-अनजाने हुई गलतियों की क्षमा पितरों से मांगे.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)