)
16 shradh paksha 2026: पितृ पक्ष में तृतीया तिथि के श्राद्ध का विशेष महत्व है. इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी किसी भी माह के किसी भी पक्ष की तृतीया तिथि को हुई है. इसे तीज का श्राद्ध भी कहा जाता है. इस बार का तीज का श्राद्ध विशेष है क्योंकि इस दिन महाभरणी श्राद्ध पड़ रहा है. यह श्राद्ध आज यानी 29 सितंबर 2026, मंगलवार को पड़ है. आइए इस बारे में विस्तार से जानेंगे.
तृतीया तिथि की शुरुआत 28 सितंबर की शाम को 07:13 बजे होगी और तिथि का समापन 29 सितंबर की शाम को 05:09 बजे होगा. श्राद्ध कर्म के लिए शास्त्रों में दोपहर के समय को उत्तम माना गया है. इस तरह 29 सितंबर को कुतुप मुहूर्त को सुबह 11:47 से लेकर दोपहर 12:35 बजे तक होगा. रौहिण मुहूर्त दोपहर के 12:35 बजे से लेकर दोपहर के 01:23 बजे तक होगा. अपराह्न काल दोपहर के 01:23 से लेकर दोपहर के 03:46 बजे तक होगा. इन मुहूर्तों में श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान किया जाएगा.
हिंदू धर्म में यमराज और महाभरणी श्राद्ध का गहरा संबंध है. दरअसल, भरणी नक्षत्र के स्वामी धर्मराज यमराज हैं. वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र में से एक भरणी नक्षत्र है. मान्यता है कि पितृ पक्ष में चंद्रमा जब भरणी नक्षत्र में प्रवेश कर जाता है तो पितृलोक से आए पूर्वजों की तृप्ति के रास्ते और भी सुगमता से खुल जाते हैं. भरणी नक्षत्र में पड़ने वाली श्राद्ध तिथि को महाभरणी श्राद्ध कहते हैं. यमराज के आधिपत्य वाला नक्षत्र होने के कारण इसमें पितृ तर्पण करें तो पितर पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं. इस साल तृतीया तिथि पर महाभरणी श्राद्ध पड़ रहा है.
शास्त्रों के अनुसार ऐसे लोग जो आर्थिक, शारीरिक या पारिवारिक कारणों से गया जाकर पिंडदान नहीं कर सकते हैं वो अगर महाभरणी श्राद्ध के दिन घर पर ही या किसी स्थानीय पवित्र नदी तट पर ही पितृ का विधिपूर्वक श्राद्ध करें तो ऐसे श्राद्ध का फल गया में श्राद्ध करने के बराबर मिलता है.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)