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Dashami Shradh 2026: इस साल पितृ पक्ष 24 सितबंर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा. इसी कड़ी में पितृपक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध 05 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा. दशमी तिथि पर उन पितरों की आत्मा की शांति व मुक्ति के लिए तर्पण किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी माह के किसी भी पक्ष की दशमी तिथि पर हुई हो. इस साल सोमवार, 05 अक्टूबर को होने वाले दशमी श्राद्ध के मुहूर्त क्या हैं, तर्पण की विधि और दशमी श्राद्ध का महत्व क्या है? आइए इस बारे में जानें.
दशमी तिथि की शुरुआत: 05 अक्टूबर 2026 को प्रातः 03:53 बजे.
दशमी तिथि का समापन: 06 अक्टूबर 2026 को प्रातः 02:07 बजे.
कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:46 से लेकर 12:33 बजे तक.
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 से लेकर 01:20 बजे तक.
अपराह्न काल: दोपहर 01:20 से लेकर शाम 03:41 बजे तक.
दशमी तिथि पर पितरों का विधि-विधान से किया गया श्राद्ध उनकी आत्मा को तृप्त करता है, जिससे वे प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, समृद्धि, सफलता के साथ ही वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. वेदी पर श्रद्धापूर्वक पिंडदान करने से कष्ट परिवार जन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भटकती आत्मा को शांति मिलती है. पितृ को मोक्ष की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि दशमी तिथि पर किसी पवित्र कुएं के किनारे बैठकर पिंडदान करें तो इसका फल अश्वमेध यज्ञ के जितना मिलता है.
सुबह स्नान आदि कर लें और साफ कपड़े पहनें. घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
श्राद्ध मुहूर्त में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं.
तांबे के पात्र में जल, थोड़ा सा दूध, जौ, काले तिल, चावल और सफेद फूल मिलाएं.
अब इस जल से पितरों का नाम लेते हुए और ध्यान करते हुए उनका तर्पण करें.
अब पके हुए चावल और आटे से पिंड बनाएं और पितरों का तर्पण करते रहें.
सात्विक भोजन बनाएं और पंचबलि भोग निकालें.
धूप जलाएं और 'ॐ पितृदेवताभ्यो नमः' मंत्र का जाप करें.
कुतुप मुहूर्त में 10 या कम से कम 1 योग्य ब्राह्मण को घर बुलाएं और भोजन करवाएं.
ब्राह्मणों को वस्त्र व दक्षिणा दें. जरूरतमंदों को आटा, गुड़, घी, नमक व शक्कर दान में दें.
श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय का पाठ करें. परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)