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Pitru Paksha tithi 2026: पितृ पक्ष में अष्टमी तिथि के श्राद्ध को अति शुभ फलदायी माना गया है. इस दिन उन पितृ का तर्पण और श्राद्ध कर्म संपन्न किया जाता है जिनका देहावसान किसी भी महीने के किसी भी पक्ष में अष्टमी तिथि पर हुआ हो. इस साल अष्टमी श्राद्ध शनिवार, 03 अक्टूबर 2026 को शुभ मुहूर्त में किया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, श्राद्ध कर्म के लिए हमेशा ही कुतुप, रोहिणी और अपराह्न काल को अति उत्तम माना गया है. ऐसे में आइए तर्पण का सही मुहूर्त और विधि को जान लें.
अष्टमी तिथि का प्रारंभ 03 अक्टूबर 2026 को सुबह के 07:59 बजे होगा.
अष्टमी तिथि का समापन 04 अक्टूबर 2026 को सुबह 05:51 बजे होगा.
कुतुप मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक होगा.
रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:34 बजे से लेकर 01:21 बजे तक होगा.
अपराह्न काल दोपहर 01:21 बजे से लेकर अपराह्न 03:43 बजे तक होगा.
स्नान आदि कर शुभ मुहूर्त में कुश के आसन पर पूर्व दिशा की ओर अपना मुख करके बैठ जाएं.
धूप, दीप जलाए और देव, ऋषि व पितरों के सामने पुष्प, माला एवं सुपारी चढ़ाएं.
एक थाली में जल, काले तिल, कच्चा दूध, जौ व तुलसी के पत्ते को मिलाएं. पास में खाली पात्र रखें.
अनामिका उंगली में कुश की पवित्री धारण कर हाथ में जल, सुपारी, सिक्का व फूल लेकर तर्पण का संकल्प करें.
जल में गुलाब की पंखुड़ियां डालें व हाथ में अक्षत लें.
देवों और ऋषियों का आह्वान कर मंत्रोच्चार करें.
अब पहली थाली से जल लें और उंगलियों से पूर्व दिशा में मुख कर देवताओं को व उत्तर दिशा में मुख कर ऋषियों को अर्पित करें.
वहीं अंगूठे से दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल दें.
अब हवन की अग्नि में दही, गाय के दूध, घी और खीर आहुति रूप में अर्पित करें.
अब भोजन से गाय, कुत्ते, कौवे और अतिथि के लिए का अंश निकाल लें.
अंत में योग्य ब्राह्मणों को, दामाद को या भांजे को सम्मानपूर्वक बुलाकर भोजन कराएं.
दान-दक्षिणा देने के बाद परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण कर लें.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार व्रत-त्योहारों की तिथि, पूजा-विधि एवं मान्यताओं में अंतर संभव है. पाठक इसे सामान्य धार्मिक जानकारी के रूप में देखें.)