नवरात्र के 9 दिनों के अष्टमी-नवमी तिथि विशेष होती है. इस समय दुर्गा पूजा चरम पर होती है और हवन, कन्या-पूजन होता है. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र में कन्या-पूजन के बिना मां दुर्गा की पूजा-व्रत का पूरा फल नहीं मिलता है. लेकिन इस साल शारदीय नवरात्र में महाष्टमी और महानवमी की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि ये क्या दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे?
इसके पीछे वजह है आश्विन शुक्ल अष्टमी और नवमी तिथि के प्रारंभ और समापन का समय. द्रिक पंचांग के अनुसार जानते हैं कि अष्टमी-नवमी तिथि कब से कब तक रहेंगी और किस दिन मान्य होंगी. साथ ही कन्या पूजन के लिए मुहूर्त क्या रहेंगे?
अष्टमी तिथि प्रारंभ - 18 अक्टूबर की सुबह 08:27 बजे से
अष्टमी तिथि समापन - 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे तक
अष्टमी तिथि तारीख - उदयातिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को महाअष्टमी मनाई जाएगी.
नवमी तिथि प्रारंभ - 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे से
नवमी तिथि समापन - 20 अक्टूबर की दोपहर 12:50 बजे तक
नवमी तिथि की तारीख - अधिकांश पंचांग में 19 अक्टूबर को ही नवमी तिथि मानी गई है.
अलग-अलग परिवारों में कन्या-पूजन को लेकर भिन्न मान्यताएं हैं. जैसे कुछ परिवारों में अष्टमी को कन्या पूजन होता है तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं.
ऐसे में अष्टमी को कन्या पूजन का मुहूर्त - 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले तक.
नवमी को कन्या पूजन का मुहूर्त - 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे के बाद.
कन्या पूजन का अभिजीत मुहूर्त - 19 अक्टूबर 2026 की दोपहर • 12:02 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक.
धर्म-शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार, नवरात्र व्रत का पारण अष्टमी या नवमी को हवन व कन्या पूजन के बाद ही करना चाहिए. इस साल नवरात्र उपवास का पारण 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद करना ही उचित रहेगा. जो लोग अष्टमी के बाद पारण करते हैं और जो लोग नवमी के बाद पारण करते हैं, दोनों के लिए यही पारण समय है क्योंकि इस साल दोनों तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं और पंचांग पर आधारित है. अष्टमी-नवमी की तिथि और पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है. कन्या पूजन करने से पहले अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से समय की पुष्टि अवश्य करें.)