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राजस्थान का अजमेर शहर अपने पुराने और चमत्कारी मंदिरों के लिए मशहूर है. यहां कई ऐसी पवित्र जगहें हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था और सदियों पुरानी मान्यताएं जुड़ी हैं.
इन्हीं में से एक है अजमेर का मशहूर खोड़ा गणेश मंदिर. गणेश चतुर्थी पर हर साल यहां दूर-दूर से लाखों लोग बप्पा के दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां रखी मूर्ति किसी इंसान ने नहीं बनाई.
वहां के लोगों के मान्यता के मुताबिक खोड़ा गणेश मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. करीब 1700 ईस्वी के आसपास इस पूरे इलाके में एक बड़ा तालाब हुआ करता था. एक दिन अचानक उस तालाब के किनारे गणेश जी की एक बड़ी मूर्ति खुद-ब-खुद प्रकट हो गई.
अपने आप बनी होने की वजह से इस मूर्ति की ताकत बहुत ज्यादा मानी जाती है. समय के साथ यहां एक बड़ा मंदिर बनवाया गया. आज ये मंदिर अजमेर और आसपास के इलाकों के लिए आस्था की सबसे बड़ी जगह बन चुका है.
खोड़ा गणेश मंदिर की सबसे अनोखी बात यहां मौजूद 300 साल से भी पुराने पेड़ हैं. मंदिर के अंदर बरगद और इमली के दो बड़े पेड़ लगे हैं.
हैरानी की बात यह है कि दोनों अलग-अलग पेड़ होकर भी एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं. दोनों के तने इस तरह मिले हुए हैं कि इन्हें अलग करना मुमकिन ही नहीं.
ये प्राकृतिक मिलन अपने आप में एक बड़ा चमत्कार माना जाता है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इन जुड़े हुए पेड़ों के तनों में छिपी है. गौर से देखने पर तनों पर करीब 12 अलग-अलग जगहों पर गणेश जी जैसी आकृतियां साफ नजर आती हैं.
लोग इन 12 आकृतियों को गणेश जी के 12 अलग-अलग रूपों की तरह मानते हैं. यहां आने वाले भक्त मुख्य मूर्ति के दर्शन के साथ-साथ इस पेड़ की भी पूजा करते हैं और इन आकृतियों के सामने सिर झुकाते हैं.
खोड़ा गणेश मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. लोग अपनी मन्नत मांगने के लिए इस पुराने पेड़ के तने पर धागा बांधते हैं.
गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां खास महाआरती, मोदक का भोग और पूजा-पाठ का आयोजन होता है. इस दिन मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, और सुबह से ही यहां बप्पा के जयकारे गूंजते रहते हैं.
अगर आप गणेश चतुर्थी या किसी भी दिन खोड़ा गणेश मंदिर जाने का सोच रहे हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है. यह मंदिर अजमेर शहर से करीब 26 किलोमीटर दूर है.
वहीं किशनगढ़ से इसकी दूरी सिर्फ 10 किलोमीटर है. अजमेर या किशनगढ़ से आप अपनी गाड़ी, ऑटो, टैक्सी, बस या बाइक से आसानी से और कम समय में यहां पहुंच सकते हैं.
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है. यह केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे ऐतिहासिक तथ्य न मानें. यह वेबसाइट/चैनल इसकी पुष्टि नहीं करता है.