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इंसानों ने नहीं बनाई ये मूर्ति... जानिए 1700 ईस्वी में तालाब के किनारे कैसे प्रकट हुए प्रसिद्ध 'खोड़ा गणेश'?

इस खबर में अजमेर के प्रसिद्ध खोड़ा गणेश मंदिर के अद्भुत इतिहास के बारे में जानेंगे. साथ ही समझिए कैसे तालाब की किनारे पर बप्पा की प्रतिमा खुद प्रकट हुई और 300 साल पुराने पेड़ के तने में गणेश जी की 12 आकृतियां नजर आती हैं.

इंसानों ने नहीं बनाई ये मूर्ति... जानिए 1700 ईस्वी में तालाब के किनारे कैसे प्रकट हुए प्रसिद्ध 'खोड़ा गणेश'?

राजस्थान का अजमेर शहर अपने पुराने और चमत्कारी मंदिरों के लिए मशहूर है. यहां कई ऐसी पवित्र जगहें हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था और सदियों पुरानी मान्यताएं जुड़ी हैं.

इन्हीं में से एक है अजमेर का मशहूर खोड़ा गणेश मंदिर. गणेश चतुर्थी पर हर साल यहां दूर-दूर से लाखों लोग बप्पा के दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां रखी मूर्ति किसी इंसान ने नहीं बनाई.

1700 ईस्वी में तालाब के किनारे प्रकट हुई थी मूर्ति

वहां के लोगों के मान्यता के मुताबिक खोड़ा गणेश मंदिर का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. करीब 1700 ईस्वी के आसपास इस पूरे इलाके में एक बड़ा तालाब हुआ करता था. एक दिन अचानक उस तालाब के किनारे गणेश जी की एक बड़ी मूर्ति खुद-ब-खुद प्रकट हो गई.

अपने आप बनी होने की वजह से इस मूर्ति की ताकत बहुत ज्यादा मानी जाती है. समय के साथ यहां एक बड़ा मंदिर बनवाया गया. आज ये मंदिर अजमेर और आसपास के इलाकों के लिए आस्था की सबसे बड़ी जगह बन चुका है.

300 साल पुराने दो पेड़ों का अनोखा मिलन

खोड़ा गणेश मंदिर की सबसे अनोखी बात यहां मौजूद 300 साल से भी पुराने पेड़ हैं. मंदिर के अंदर बरगद और इमली के दो बड़े पेड़ लगे हैं.

हैरानी की बात यह है कि दोनों अलग-अलग पेड़ होकर भी एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं. दोनों के तने इस तरह मिले हुए हैं कि इन्हें अलग करना मुमकिन ही नहीं.

ये प्राकृतिक मिलन अपने आप में एक बड़ा चमत्कार माना जाता है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं.

पेड़ के तने में दिखती हैं गणपति की 12 आकृतियां

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इन जुड़े हुए पेड़ों के तनों में छिपी है. गौर से देखने पर तनों पर करीब 12 अलग-अलग जगहों पर गणेश जी जैसी आकृतियां साफ नजर आती हैं.

लोग इन 12 आकृतियों को गणेश जी के 12 अलग-अलग रूपों की तरह मानते हैं. यहां आने वाले भक्त मुख्य मूर्ति के दर्शन के साथ-साथ इस पेड़ की भी पूजा करते हैं और इन आकृतियों के सामने सिर झुकाते हैं.

धागा बांधने से पूरी होती हैं मुरादें

खोड़ा गणेश मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. लोग अपनी मन्नत मांगने के लिए इस पुराने पेड़ के तने पर धागा बांधते हैं.

गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां खास महाआरती, मोदक का भोग और पूजा-पाठ का आयोजन होता है. इस दिन मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, और सुबह से ही यहां बप्पा के जयकारे गूंजते रहते हैं.

कैसे पहुंचें अजमेर का खोड़ा गणेश मंदिर?

अगर आप गणेश चतुर्थी या किसी भी दिन खोड़ा गणेश मंदिर जाने का सोच रहे हैं, तो यहां पहुंचना काफी आसान है. यह मंदिर अजमेर शहर से करीब 26 किलोमीटर दूर है.

वहीं किशनगढ़ से इसकी दूरी सिर्फ 10 किलोमीटर है. अजमेर या किशनगढ़ से आप अपनी गाड़ी, ऑटो, टैक्सी, बस या बाइक से आसानी से और कम समय में यहां पहुंच सकते हैं.

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है. यह केवल सामान्य जानकारी के लिए है, इसे ऐतिहासिक तथ्य न मानें. यह वेबसाइट/चैनल इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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