गोवा में पटाखों से पहले जलता है 'नरकासुर': पूरे शहर में ढोल-नगाड़ों के साथ निकलता है जुलूस, जानें दिवाली की सुबह की पूरी कहानी
गोवा में दिवाली की शुरुआत बेहद अनोखे अंदाज में होती है. नवंबर की रात नरकासुर के विशाल पुतलों का जुलूस निकाला जाता है और सूर्योदय से पहले उनका दहन होता है. इस खबर में अभ्यंग स्नान, कड़वे करीट फल और 5 तरह के पोहे से जुड़ी इस खास परंपरा के बारे में डिटेल से जानेंगे.
पूरे भारत में लोग दिवाली का इंतजार कर रहे हैं. लोग इस त्योहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं. लेकिन गोवा में इस त्योहार को शुरू करने का तरीका काफी अनोखा है.
गोवा के लोगों के लिए नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं है. ये राज्य का सबसे बड़े उत्सव में से एक है.
दिवाली से ठीक एक दिन पहले पूरा गोवा कला, संगीत और पुरानी परंपराओं के रंग में रंग जाता है.
नरकासुर के पुतले और हफ्तों की मेहनत
दिवाली आने से पहले ही वहां के लोग मिलकर नरका सुर के पुतले बनाना शुरू कर देते हैं. इनका साइज काफी बड़ा होता है.
इन पूतलों को बनाने के लिए बांस, अखबार, घास और रंगीन कागजों का इस्तेमाल होता है. कुछ पुतले तो दो फ्लोर के जितने ऊंचे बनाए जाते हैं.
वहां के क्लब वाले इन पुतलों की प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं. दक्षिण गोवा का देवबाग इलाका अपनी खास और कलात्मक गुड़ियों के लिए पूरे गोवा में जाना जाता है.
07 नवंबर की रात का जश्न और नरकासुर वध
साल 2026 में नरक चतुर्दशी का ये त्योहार 08 नवंबर को मनाया जाएगा. इसका जश्न 07 नवंबर की रात से ही शुरू हो जाता है.
रात होते ही सड़कों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगती है. लोग गाड़ियों और पैदल जुलूसों के साथ इन पुतलों को पूरे शहर में घुमाते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने इसी दिन राक्षस नरकासुर का वध किया था.
इसी जीत को याद करते हुए 08 नवंबर की सुबह सूर्योदय से ठीक पहले इन सभी पुतलों में आग लगा दी जाती है. ये रस्म बुराई पर अच्छाई की जीत की निशानी है.
सुबह का स्नान और कड़वे करीट फल की खास रस्म
पुतले जलाने के बाद गोवा के हर घर में रस्मों की शुरुआत होती है. सुबह जल्दी उठकर सभी लोग खुशबूदार तेल और जड़ी-बूटियों का उबटन लगाकर स्नान करते हैं.
इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है. इसके बाद परिवार के पुरुष सदस्य अपने पैरों से करीट नाम के एक छोटे और कड़वे फल को कुचलते हैं.
ये रस्म घर और मन से निगेटिविटी को बाहर निकालने का प्रतीक मानी जाती है. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है.
पांच तरह के पोहे
गोवा में नरक चतुर्दशी के दिन खाने की अपनी एक खास जगह है. इस दिन हर घर में पांच अलग-अलग तरीकों से पोहा बनाया जाता है.
ये परंपरा भगवान कृष्ण और उनके मित्र सुदामा की पौराणिक कहानी से जुड़ी हुई है.
इन पांच पोहों में नारियल-गुड़ वाला फोव, दूध और इलायची वाला पोहा, दही-छाछ वाला पोहा, मसालेदार आलू बटाटा पोहा और नारियल के दूध वाला रोसंतले पोहा शामिल है.
पूजा के बाद पूरा परिवार एक साथ बैठकर इस खास पकवान का आनंद लेता है.
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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक-परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक गोवा की सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी पहुंचाना है.