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राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान इस वक्त सुर्खियों में है. इसकी वजह यहां हो रही इंडिया ब्लॉक की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली है, जिसमें विपक्ष की 19 पार्टियों के नेता शामिल हैं. विपक्ष ने SIR के विरोध में यह रैली आयोजित की है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है. विपक्ष के आह्वान पर यहां समर्थकों समेत लाखों लोग जुटे हैं. यहां हम इस प्रदर्शन की नहीं बल्कि प्रदर्शन स्थल की बात कर रहे हैं.
क्या कभी सोचा है कि जिस मैदान से देश की सत्ता को हिलाने वाले आंदोलन खड़े होते हैं, उसे प्रदर्शन के लिए बुक कैसे कराया जाता है? क्या वहां धरना देना बिल्कुल मुफ्त है या इसके लिए जेब भी ढीली करनी पड़ती है? आइए इन्हीं जरूरी सवालों के जवाब जानते हैं.

दरअसल, राजधानी में धरने-प्रदर्शन के पते को लेकर हाल ही में बड़ा बदलाव हुआ था, जिसके तहत दिल्ली पुलिस ने पुराने और सबसे मशहूर प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई कर दिया है. मतलब यहां अब धरना-प्रदर्शन नहीं हो सकता. इसके बदले पुलिस ने 3 जगहें तय की हैं. इनमें रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड हैं. इनमें सबसे वीआईपी और ऐतिहासिक पहचान रामलीला मैदान की ही है.
हां, लेकिन शर्त यह है कि भीड़ छोटी होनी चाहिए. दिल्ली नगर निगम (MCD) के नियमों के मुताबिक, रामलीला मैदान में जो एक छोटा सा कोना है, वहां सभा या प्रदर्शन के लिए कोई किराया नहीं लिया जाता. इस 'फ्री जोन' की सीमा तय है, मतलब यहां एक बार में सिर्फ 150 लोग ही इकट्ठा हो सकते हैं. अगर किसी संगठन को छोटी प्रेस वार्ता, सीमित विरोध या सांकेतिक प्रदर्शन करना हो, तो यह जगह बिना किसी शुल्क के मिल जाती है.
अगर किसी को यहां 5, 10 या फिर 50 हजार की भीड़ जुटाकर प्रदर्शन करना है तो फिर 12 एकड़ में फैला पूरा बड़ा मैदान बुक करना पड़ता है. इसके लिए हर दिन का 50 हजार रुपये देना होगा. इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर अलग से 55,000 रुपये जमा होते हैं. यह रकम रिफंडेबल होती है, यानी कार्यक्रम के बाद सब ठीक-ठाक रहने पर लौटा दी जाती है.
जीएसटी और अन्य टैक्स मिलाकर बुकिंग के वक्त करीब 1.21 लाख रुपये की शुरुआती पेमेंट करनी पड़ती है. बाद में सिक्योरिटी की रकम वापस खाते में आ जाती है.
सबसे पहले दिल्ली नगर निगम (MCD) के हॉर्टिकल्चर (बागवानी) विभाग में अर्जी लगानी होती है. लेकिन सिर्फ एमसीडी में पैसे जमा करने से बात पक्की नहीं होती. सबसे अहम पड़ाव है दिल्ली पुलिस की एनओसी (No Objection Certificate). जब दिल्ली पुलिस सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नजरिए से हरी झंडी देती है, तभी नगर निगम बुकिंग कंफर्म करता है. यानी दोनों विभागों की मंजूरी अनिवार्य है.
अगर कोई संगठन इस साल रामलीला मैदान में बड़ा जलसा करने की सोच रहा है, तो उसके लिए बुरी खबर है. अधिकारियों के मुताबिक, मैदान का शेड्यूल लगभग पूरी तरह पैक है. पूरे साल में अब सिर्फ 29, 30 और 31 दिसंबर की तीन तारीखें ही खाली बची हैं, बाकी सभी दिनों के लिए बुकिंग पहले ही फुल हो चुकी है.