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'गौतमेश्वर महादेव' का सच: 11 रुपये में मिलता है 'पाप मुक्ति प्रमाण पत्र'; जानिए इसे क्यों कहते हैं आदिवासियों का हरिद्वार?

राजस्थान के प्रतापगढ़ स्थित गौतमेश्वर महादेव मंदिर में खंडित शिवलिंग की पूजा होती है. इस स्टोरी में हम मंदिर की जानकारी, मंदाकिनी कुंड और 11 रुपये में पाप मुक्ति प्रमाण पत्र मिलने के पूरे सच के बारे में डिटेल से जानेंगे.

'गौतमेश्वर महादेव' का सच: 11 रुपये में मिलता है 'पाप मुक्ति प्रमाण पत्र'; जानिए इसे क्यों कहते हैं आदिवासियों का हरिद्वार?

भारत में कई कमाल के मंदिर हैं जो अपने अनूठे इतिहास के लिए जाने जाते हैं. ऐसे ही एक चमत्कारिक मंदिर का नाम गौतमेश्वर महादेव मंदिर है.

ये मंदिर राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्थित है. इस मंदिर को मोक्ष प्रदान करने वाले तीर्थ के रूप में पूजा जाता है. इस मंदिर के चारों ओर घने जंगल हैं.

इस मंदिर की शिखर के ऊपर से एक प्राकृतिक झरना बहता है. जो इस मंदिर को और खूबसूरत बनाती है. जैसा कि हम जानते हैं सनातन धर्म में किसी भी खंडित मूर्ति या शिवलिंग की पूजा करना वर्जित माना जाता है.

लेकिन गौतमेश्वर धाम एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां तीन टुकड़ों में बंटे खंडित शिवलिंग की बहुत ही श्रद्धा से पूजा की जाती है. आज हम इस मंदिर की पूरी जानकारी डिटेल से देंगे.

जब गजनवी ने शिवलिंग तोड़ने का किया प्रयास

इस मंदिर के शिवलिंग के तीन भागों में होने का भी अपना इतिहास है. कहा जाता है कि आक्रमणकारी महमूद गजनवी देश के मंदिरों को बर्बाद करता हुआ यहां पहुंचा, तो उसने इस शिवलिंग पर भी प्रहार किया.

उसने जब पहली बार गदा से वार किया तो शिवलिंग से दूध की धार फूट पड़ी. दूसरे वार पर दही की धारा निकली.

लेकिन जैसे ही उसने तीसरी बार शिवलिंग पर हमला किया, उसमें से अचानक लाखों मधुमक्खियों का हमलावर झुंड बाहर निकल आया.

मधुमक्खियों ने गजनवी और उसकी पूरी सेना पर ऐसा हमला बोला कि उन्हें जान बचाकर भागना पड़ा. तभी से इस खंडित शिवलिंग का पूजन जारी है.

आदिवासियों का हरिद्वार है ये धाम

गौतमेश्वर महादेव मंदिर को अंचल के आदिवासियों का हरिद्वार भी कहा जाता है. मंदिर परिसर में एक बेहद पवित्र जल कुंड है, जिसे मंदाकिनी कुंड के नाम से पुकारा जाता है.

मान्यता है कि इस कुंड के पानी में डुबकी लगाने से इंसान के जन्मों-जन्मांतर के सारे पाप धुल जाते हैं.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सप्तऋषियों में शामिल महर्षि गौतम पर एक बार गौ-हत्या का बड़ा कलंक लग गया था.

इस पाप के प्रायश्चित के लिए ऋषि गौतम ने इसी मंदाकिनी कुंड में स्नान करके भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी.

तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें पाप से मुक्त कर दिया था. इस कुंड का जल कभी नहीं सूखता है.

यहां मिलता है पाप मुक्ति का प्रमाण पत्र

इस मंदिर की सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि यहां लोगों को पाप से मुक्ति पाने का लिखित प्रमाण पत्र दिया जाता है.

परिसर में वहां के आदिवासियों का पुराना न्यायालय काम करता है. कोई भी अगर अपने पाप से मुक्ति पाना चाहता है, तो वो वहां के मंदाकिनी कुंड में स्नान करता है.

जिसके बाद उन्हें मंदिर उन्हें लिखित प्रमाण पत्र दिया जाता है. जिसके लिए मंदिर ट्रस्ट द्वारा करीब 11 रुपये की तय रसीद काटा जाता है.

वैशाख महीने में उमड़ती है भारी भीड़

इस मंदिर में दर्शन करने बस राजस्थान से ही लोग नहीं आते हैं.  यहां हर साल वैशाख के महीने में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है.

जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से लाखों लोग दर्शन करने पहुंचते हैं. वहां भक्त मंदाकिनी कुंड में डुबकी लगाते हैं और अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं.

नहाने के बाद श्रद्धालु इस कुंड के जल को गंगाजल के समान पवित्र मानकर कांच की बोतलों में भरकर अपने घर ले जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस जल को घर में रखने से खुशहाली आती है.

(Disclaimer): यह लेख स्थानीय धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और मंदिर ट्रस्ट द्वारा दी गई जानकारियों पर आधारित है.

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Harsh Singh

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हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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