शारदीय नवरात्र: दुर्गा सप्तशती के पाठ से पहले देवी कवच पढ़ना क्यों होता है जरूरी? जानें इसके लाभ
इस खबर में हम नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले देवी कवच क्यों पढ़ना चाहिए, इसके बारे में डिटेल से बताएंगे. साथ ही देवी कवच के महत्व, नियम और इससे मिलने वाले लाभ के बारे में भी बताएंगे.
शारदीय नवरात्र शुरू हो चुका है. इन पावन दिनों में माता दुर्गा के कई रूपों की पूजा किया जाता है. जिसका अपना तरीका होता है.
नवरात्र के इन 9 दिनों में माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह के उपाय और अनुष्ठान करते हैं.इनमें दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे जरूरी माना जाता है.
सभी भक्त नौ दिनों का उपवास रखने के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से तेरह अध्याय होते हैं.
पाठ की शुरुआत में देवी कवच दिया गया है, जिसका पाठ करने से भक्तों के सभी अंगों की रक्षा होती है.
ऐसा कहा जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करे, तो सबसे पहले कवच का पाठ करना जरूरी होता है.
क्या होता है देवी कवच और इसकी क्या है कथा?
देवी कवच दुर्गा सप्तशती की शुरुआत का एक ऐसा जरूरी हिस्सा है, जो अठारह पुराणों में से एक मार्कंडेय पुराण के अंदर आता है.
इस महाफलदायिनी देवी कवच को स्वयं ब्रह्मा जी ने महर्षि मार्कंडेय को सुनाया था.
इस कवच में 37 श्लोक दिए गए हैं और अंत में 9 श्लोकों में इस पाठ को करने या सुनने से इंसान को क्या-क्या फायदे मिलेंगे उसके बारे में लिखा हुआ है.
इस कवच में ब्रह्मा जी माता पार्वती के नौ अलग-अलग दैवीय रूपों का बखान करते हैं.
ब्रह्मा जी का कहना है कि जो भी व्यक्ति हमेशा इस कवच का पाठ करता है, माता दुर्गा का आशीर्वाद उसके जीवन में हमेशा बना रहता है.
पाठ शुरू करने से पहले देवी कवच पढ़ना क्यों है जरूरी?
दुर्गा सप्तशती के नियमों के अनुसार, पाठ शुरू करने से पहले सबसे पहले देवी कवच पढ़ना बेहद जरूरी माना गया है.
इसमें एक खास श्लोक मिलता है, जिसके अनुसार सप्तशती का रोज पाठ करने से पहले कवच का पाठ करना जरूरी होता है.
मां दुर्गा के इस कवच का प्रभाव बहुत ही शक्तिशाली होता है. ऐसी मान्यता है कि कवच का पाठ करने वाला मनुष्य जहां-जहां भी जाता है, उसे हर काम में विजय और पैसों का लाभ जरूर होता है.
ये पाठ भक्तों के लिए एक सुरक्षा चक्र की तरह काम करता है, जो उन्हें हर संकट से बचाता है.
जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है देवी कवच का पाठ
देवी कवच का महत्व दुर्गा सप्तशती में बहुत ही डिटेल से समझाया गया है. शास्त्रों के अनुसार, इस कवच का पाठ करने वाले व्यक्ति को घर से बाहर निकलते समय किसी भी प्रकार की अनहोनी या परेशानी का डर नहीं रहता है.
वह व्यक्ति जिस भी अच्छी वस्तु या लक्ष्य की इच्छा करता है, उसे इस कवच के प्रभाव से अवश्य प्राप्त हो जाती है.
वो इंसान इसी संसार में रहकर महा ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि को भोगता है. कवचधारी मनुष्य पूरी तरह से निर्भय हो जाता है और समाज तथा तीनों लोकों में उसका मान-सम्मान बढ़ता है.
अकाल मृत्यु के भय होता है दूर
माता का ये पावन कवच इतना शक्तिशाली है कि देवताओं के लिए भी इसे कठिन माना गया है.
जो व्यक्ति नियम और पूरी श्रद्धा के साथ रोजाना इसका पाठ करता है, उसे खास देव शक्ति की प्राप्ति होती है.
ऐसा भक्त तीनों लोकों को जीतने की क्षमता रखता है और उसके जीवन से अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए दूर हो जाता है.
वो व्यक्ति लंबी आयु प्राप्त करता है और उसके शरीर को रोग तथा दोष छू भी नहीं पाते हैं. उसका पूरा जीवन माता की कृपा से आनंदमय बीतता है.
सप्तशती पाठ की पूर्णता के लिए कवच का है खास स्थान
दुर्गा सप्तशती में कवच की इस महिमा को ब्रह्मा जी ने खुद ऋषि मार्कंडेय को बताया था.
उन्होंने साफ किया था कि किसी भी भक्त को सप्तशती का मुख्य पाठ शुरू करने से पहले देवी कवच का पाठ अवश्य करना चाहिए.
इसके बिना पाठ को अधूरा माना जाता है. नवरात्र के इन पवित्र दिनों में यदि आप भी दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं, तो नियमों का पूरा पालन करें.
कवच के साथ अपनी पूजा की शुरुआत करें, ताकि माता रानी की असीम कृपा आपके और आपके पूरे परिवार पर सदैव बनी रहे.
(Disclaimer): यह लेख धार्मिक ग्रंथों, पुराणों की कथाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों तक शास्त्रीय जानकारी पहुंचाना है.
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