SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

त्रिशूल से लेकर वज्र तक: ये हैं 10 देवी-देवताओं के शक्तिशाली शस्त्र, जानिए क्या है इनके पीछे का गहरा रहस्य!

त्रिशूल, वज्र, सुदर्शन जैसे की दिव्य शस्त्रों का हिंदु धर्म में जिक्र होता है जो देवी-देवताओं द्वारा धारण किए जाते हैं. आइए जानें इन अस्त्र-शस्त्र के पौराणिक रहस्य क्या हैं और इनके गहरे आध्यात्मिक संदेश क्या हैं.

Written By Padma Shree Shubham
Published: Oct 19, 2026, 04:00 PM IST | Updated: Oct 19, 2026, 04:00 PM IST
Join

हिंदू धर्म में हर देवी-देवता के पास उनका अस्त्र-शस्त्र है जो केवल युद्ध करने की शक्ति को ही नहीं दर्शाता है बल्कि इन शस्त्रों का कोई न कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य भी होता है. शिव जी का त्रिशूल जहां मनुष्यों के तीन गुणों को नियंत्रण में रखने की सीख देता है तो वहीं विष्णु जी का सुदर्शन चक्र समय के चक्र से संबंधित है. मां दुर्गा के अनेक अस्त्र-शस्त्र बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है. आखिर इन दिव्य अस्त्रों के पीछे कौन से रहस्य छिपे हैं, किन देवी-देवताओं के पास कौन से अस्त्र-शस्त्र हैं इसके बारे में आइए विस्तार से जानें.

भगवान शिव का शस्त्र त्रिशूल

त्रिशूल की तीन शूल भूत, वर्तमान और भविष्य का भी प्रतिनिधित्व कता है. त्रिशूल 3 तरह के कष्टों के विनाश का प्रतीक है, यह दैनिक, दैविक, भौतिक है. त्रिशूल में 3 तरह की शक्तियां सत, रज और तम समाहित हैं. त्रिशूल के 3 शूल सृष्टि के उदय, संरक्षण और लयीभूत होने को दर्शाता है. त्रिशूल वाम भाग के इड़ा, दक्षिण भाग के पिंगला और बीच के सुषुम्ना नाड़ियों का भी प्रतीक माना गया है. ये नाड़ियां मानव शरीर में प्राण के प्रवाह को नियंत्रित करने वाली शक्तियां हैं.

भगवान विष्णु का अस्त्र सुदर्शन चक्र

सुदर्शन का मतलब है शुभ दर्शन, इस चक्र में समय यानी काल चक्र की शक्ति समायी हुई है. जो निरंतर चलते रहने की सीख देती है. सुदर्शन चक्र अति शक्तिशाली अस्त्र है जिसका वार कभी खाली नहीं जाता है. सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु की शक्ति और न्याय का प्रतीक है जो हर बुराई पर जीत हासिल करता है. मन की एकाग्रता और बुरी शक्तियों के विनाश को भी सुदर्शन चक्र प्रतीक है. ध्यान दें भगवान विष्णु के ही आठवें अवतार भगवान श्रीकृष्ण के पास भी यही सुदर्शन चक्र है जिससे उन्होंने शिशुपाल का वध किया था.

माता दुर्गा के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र

महिषासुरमर्दिनी भगवती दुर्गा के पास अनेक शस्त्र हैं. माता अपने हाथों में फरसा, दण्ड, शक्ति, खड्ग, गदा, बाण, वज्र, धनुष, कुण्डिका, ढाल, शूल, पाश और चक्र धारण करती हैं. दुर्गा माता के हाथों में देवताओं की संयुक्त शक्तियां हैं जो बताती है कि संसार में जब महिषासुर रूपी पाप बढ़ता है तो सभी ब्रह्मांडीय ऊर्जा एक हो जाती हैं और आसुरी शक्तियों का अंत करती हैं.

दुर्गा मां के अस्त्र-शस्त्र

मां काली का शस्त्र खड्ग

मां काली जो हिंदू धर्म में समय, मृत्यु और परिवर्तन की एक शक्तिशाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं. वे आदिशक्ति और मां दुर्गा का ही एक रूप हैं जो उग्र और अति प्रचंड हैं. मां काली का मुख्य शस्त्र खड्ग है जो एक तरह का वक्र तलवार हैं. यह खड्ग अज्ञान, अहंकार, भय के साथ ही बुराइयों का अंत करता है. महाकाली का यह दिव्य शस्त्र अपने भक्तों की रक्षा करता है.

भगवान श्री राम का शस्त्र कोदंड धनुष

भगवान राम को धनुर्धारी भी कहा जाता है. भगवान का सबसे प्रमुख शस्त्र धनुष है. भगवान राम के धनुष का नाम 'कोदंड' हैं जिसके कारण ही उन्हें कोदंडपाणि कहते हैं यानी वो जो कोदंड को धारण करते हों. श्रीराम का धनुष मर्यादा और अनुशासन को दर्शाता है जो बताता है कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमेशा दृढ़ रहना चाहिए. जीवन में अपने कर्तव्यों और वचनों को खाली नहीं जाने देना चाहिए जैसे उनका धनुष और तीर कभी भी अपने लक्ष्य को खाली नहीं जाने देता है. ध्यान दें भगवान के गुरु महर्षि विश्वामित्र से लेकर अगस्त्य मुनि और भगवान परशुराम ने उन्हें कई दिव्य शस्त्र-अस्त्र शास्त्रानुसार भगवान श्रीराम के पास बला, अतिबला से लेकर ब्रह्मास्त्र, त्रिशूल, वज्र और नारायण अस्त्र भी था.

भगवान हनुमान का शस्त्र गदा

वैसे तो हनुमान जी के पास अनेक अस्त्र-शस्त्र हैं जो उन्हें अलग-अलग देवताओं ने उनके मूर्छित होने के बाद दिए थे. हालांकि हनुमान जी के शस्त्रों में सबसे पहला स्थान गदा का है. जिसे किसी भी तस्वीर में हनुमान जी के हाथ में ही देखते हैं. हनुमान जी की गदा आत्मबल और शक्ति का प्रतीक है. गदा सिखाती है कि कैसे बिना अहंकार किए अपार शक्ति का उपयोग करें जिससे धर्म की रक्षा हो सके और सेवा की भावना बनी रहे. हनुमान जी का पूरा अंग-प्रत्यंग, रद, मुष्ठि से लेकर नख, पूंछ, गदा और गिरि, पादप आदि एक दिव्यास्त्र की तरह ही है जो उनके और सबके प्रभु श्रीराम के अमंगलों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है. इसका एक उदाहरण लंका में मिलता है जब हनुमान जी ने अपनी पूंछ में लगाई गई आग से पूरी लंका को अग्नि स्नान कराया था.

भगवान गणेश का शस्त्र पाश और अंकुश

श्री गणेश के एक हाथ में हनेशा 'पाश' दिखता है जो सांसारिक मोह-माया को बांधने को दर्शाता है और गौरीपुत्र के दूसरे हाथ में 'अंकुश' है जो मनुष्य के मन के भीतर के क्रोध, अहंकार और नकारात्मक सोच को नियंत्रित करने के लिए प्रेरित करता है. गणेश जी अपने भक्तों को सिखाते हैं कि माया, मोह, और सांसारिक बंधन को तोड़कर सत्य व ईश्वर की ओर हमेशा बढ़ना चाहिए. भगवान अपने पाश और अंकुश से भक्तों के संचित कर्मों, बुराइयों और नकारात्मक विचारों को खींचकर उनसे दूर करते हैं.

भगवान कार्तिकेय का शस्त्र भाला

देवताओं के सेना पति और शिव-पार्वती पुत्र भगवान कार्तिकेय का शस्त्र भाला है. ऐसी पौराणिक कथा है कि यह दिव्यास्त्र भाला भगवान कार्तिकेय को उनकी ही आदिशक्ति देवी पार्वती ने दिया था. इसी भाला से ककुमार कार्तिकेय ने तारकासुर का वधकर देवताओं के दुख का नाश किया था. भाला शिव-शक्ति की संयुक्त ऊर्जा का प्रतीक है जो दिव्य शक्ति ज्ञान और विवेक को दर्शाता है. भाले का ऊपरी चौड़ा, लंबा और नुकाला हिस्सा सिखाता है कि मनुष्य को हमेशा अपने गहरे ज्ञान को सही दिशा में केंद्रित करना चाहिए.

और पढ़ें- रामायण-महाभारत से जुड़ी हैं शस्त्र पूजा की जड़ें: विजयादशमी पर क्यों निभाई जाती है यह परंपरा, क्या है इसका शमी के पेड़ से संबंध?

इंद्र देव का शस्त्र वज्र

वर्षा के देवता और स्वर्ग के राजा देवराज इंद्र वज्र धारण करते हैं. महर्षि दधीचि की अस्थियों से यह वज्र बना है जिसका कोई काट नहीं है. दृढ़ता और त्याग का प्रतीक यह शस्त्र सिखाता है कि अपनी इच्छाशक्ति को सही दिशा देकर किसी भी परेशानी को दूर सकते हैं. परेशानी असुरों का प्रतीक है और नष्ट करने की शक्ति वज्र का प्रतीक है.

यमराज के पास कालपाश

मृत्यु के देवता यमराज का अस्त्र कालपाश है जो बताता है कि मृत्यु ही अटल सत्य है जिससे संसार का कोई भी प्राणी बच नहीं सकता है.  काल यानी समय और कर्मों के इस इस अंकुश से कोई नहीं बच सकता है. जीवनकाल में धर्म के अनुसार काम करने के लिए कालपाश प्रेरित करता है. कालपाश एक ऐसा दिव्य पाश है जो किसी भी जीव को नहीं छोड़ता है. इस पाश में एक दिन सबको आना है मनुष्य, पशु, असुर या देवता, इससे कोई नहीं बच सकता है.

(Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं.)

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पद्मा श्री शुभम् को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव. मॉस कम्‍युनिकेशन ग्रेजुएट और हिंदी लिटरेचर से पोस्‍ट ग्रेजुएट. मीडिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म से करियर शुरू करने के बाद कई संस्थाओं में काम किया. Nedrick News, TFI Post जैसी संस्थाओं में कार्यरत रहीं. इसके बाद Zee News जॉइन किया. समाचार और वर्तमान घटनाओं पर लिखने पढ़ने में रुचि. धर्म और ज्योतिष में अधिक रुचि. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष संबंधी लेख लिखने में कार्यरत. पद्मा से आप padma.shubham@India.com मेल के जरिए सीधे संपर्क कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES