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Shani Ke Upay: नवग्रहों में सूर्यपूत्र शनि देव का भी स्थान है. शनि ग्रह न्याय और कर्मफल का कारक ग्रह है जो व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल देता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह जब कुंडली में अशुभ स्थान पर हो या कमजोर स्थिति में हो तो शनि दोष लगता है. जिसके कारण जातक के जीवन में अनेक समस्याएं आती हैं. शनि दोष के कारण व्यक्ति का संघर्ष बढ़ जाता है. शनि दोष के लक्षणों और उसे दूर करने के उपायों के बारे में आइए जान लें.
वैदिक ज्योतिष में शनि कर्मशील ग्रह माना गया है. शनि कर्म के अनुसार उसका फल देते हैं. यह ग्रह सेहत और जीवन का भी कारक है. शनि ग्रह गरीब वर्ग का कारक भी है. ऐसे में जो भी जातक गरीबों या मजदूरों की सेवा करते हैं उन्हें शनिदेव परेशान नहीं करते हैं. शनि के शुभ प्रभाव से व्यक्ति बड़े पद को प्राप्त करता है. लोहे का काम, खदान, कबाड़ का काम से लेकर तेल की मिल चलाने का काम, सरसों का काम करने का कारक शनि ही है. कुंडली में शनि ग्रह की सही स्थिति न हो तो चलती हुई फैक्ट्री भी बंद हो सकती है. शनि के स्वामित्व में मकर और कुभ राशि आती है. पुष्य,अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी भी शनि देव ही हैं.
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष हो या शनि की स्थिति कमजोर हो तो व्यक्ति का धन बेकार के कार्यों में बर्बाद होने लगता है.
कुंडली में कमजोर शनि के कारण व्यक्ति वाद-विवाद में फंसता है, उस पर झूठे आरोप लगने लगते हैं और कोर्ट केस तक हो जाता है.
कमजोर शनि के कारण व्यक्ति शराब, जुआ और अन्य गंदी आदतों में पड़ जाता है. बनते हुए काम बिगड़ने लगचे हैं.
कर्ज बढ़ने लगता है. घर में आग लग सकती है. मकान बिकने से लेकर मकान की दीवार गिरने तक की नौबत आ जाती है.
जातक की कुंडली में शनि दोष हो तो उसके बाल तेजी से झड़ने लगते हैं. आंख-कान में दिक्कतें आती है.
शनि ग्रह के खराब होने पर शारीरिक कमजोरी बनी रहती है. पेट में दर्द से लेकर टीबी, कैंसर, चर्म रोग जैसी दिक्कतें होती हैं.
कमजोर शनि व्यक्ति के संघर्ष को बढ़ा देता है. मेहनत का पूरा फल नहीं प्राप्त होता है. नौकरी में परेशानियां बढ़ने लगती है.
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या तिथि पर पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिश्रित मीठा जल अर्पित करें. तिल या सरसों के तेल का दीया जलाएं. शनि का प्रभाव शुभ होगा और कष्ट दूर होंगे.
हर शनिवार को लोहे के कटोरे में साबुत उड़द, काले चने व सरसों का तेल मिला लें और एक कपड़े में बाधकर पोटली बना लें. इसके बाद इस पोटली को अपने माथे से लगाकर दान कर दें. शनि दोष दूर होगा.
शनिवार को शनिदेव की भव्य पूजा करें. अब उनके दिव्य मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जाप करें. मन की बैचैनी और डर दूर होगी.
शनिदेव के आराध्य महादेव हैं. शनि दोष की शांति के लिए अगर शनिवार के दिन अगर शिव जी की पूजा करें और शिवलिंग पर जलाभिषेक करें तो शनि की स्थिति कुडली में शुभ होगी.
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए अगर शनिवार को व्रत रखें और मजदूरों व गरीबों की मदद करे या सेवा करें तो जीवन में आए संकट दूर होंगे.
शनिदेव और हनुमान जी की पूजा अगर हर शनिवार को करें तो उनकी कृपा से जीवन के संघर्षों का अंत होगा और शनिदोष से बहुत जल्द ही मुक्ति मिल जाएगी.
(डिस्क्लेमर- यह सामग्री पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं एवं ग्रह गोचर की व्याख्याओं पर आधारित है. इसे सामान्य सूचना के रूप में देखें, न कि किसी निश्चित परिणाम या भविष्यवाणी के दावे के रूप में. किसी भी व्यक्ति पर ग्रह का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा, अंतर्दशा तथा अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.)