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अष्टमी की पूजा, नवमी का भोज या दशमी को पारण? नवरात्र के आखिरी दिनों का पूरा हिसाब समझिए

शारदीय नवरात्र समापन की ओर हैं, अष्‍टमी-नवमी के कन्‍या पूजन की तारीख, समय और विधि को लेकर सभी जरूरी बातें जान लें. साथ ही दशमी के दिन नवरात्र व्रत का पारण कब-कैसे करें, इसके भी नियम जान लेना चाहिए.

अष्टमी की पूजा, नवमी का भोज या दशमी को पारण? नवरात्र के आखिरी दिनों का पूरा हिसाब समझिए
Image Credit: कन्‍या पूजन पहले करें या हवन, नवरात्र व्रत का पारण अष्‍टमी को करें, नवमी को करें या दशमी को. सारे जवाब जानें. (Photo:Ai)

नवरात्र व्रत के आखिर में होने वाले हवन पूजन, कन्‍या पूजन और व्रत पारण को लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग परंपराएं होती हैं. लेकिन धर्म-शास्‍त्रों में इन्‍हें लेकर सही विधि और कुछ नियम बताए गए हैं. ताकि व्रत, पूजा का पूरा फल मिले, मां दुर्गा की कृपा हो. कुछ लोगों को कंफ्यूजन रहता है कि पहले पूजा करें या कन्‍या पूजन करें. व्रत का पारण कब करें, कैसे करें? आदि. इस साल अष्‍टमी-नवमी एकसाथ 19 अक्‍टूबर 2026, सोमवार को मनाई जा रही है. वहीं दशमी तिथि पर दशहरा 20 अक्‍टूबर 2026, मंगलवार को. ऐसे में कब क्‍या करें, जान लीजिए.

पहले हवन या कन्‍या पूजन?

अष्‍टमी तिथि पर मां दुर्गा के 8वें रूप मां महागौरी और नवमी पर 9वें रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. कुछ परिवारों में अष्‍टमी के दिन हवन-पूजन किया जाता है, वहीं कुछ परिवारों में नवमी को होता है. ऐसे में आपके परिवार में जिस परंपरा का चलन हो उस दिन हवन करें.

हवन के बाद कन्‍या पूजन या कुमारिका पूजन करें. यानी कि सबसे पहले मातारानी की पूजा करके उन्‍हें भोग लगाएं. फिर कन्‍याओं को भोजन कराएं.

कन्‍या पूजन की विधि

- कन्‍याओं को सम्‍मानपूर्वक निमंत्रण दें. 
- जब वे घर आएं तो उनके पैर धुलाएं. 
- उनको कुमकुम, अक्षत से तिलक लगाएं. उन पर फूल बरसाएं. 
- मां दुर्गा का स्‍मरण करते हुए उनके पैर छुएं. 
- फिर सम्‍मानपूर्वक बिठाकर हलवा, पूरी, चने, खीर आदि का भोजन कराएं. ध्‍यान रखें कि भोजन सात्विक हो. इसमें लहसुन-प्‍याज आदि न डालें. 
- फिर कन्‍याओं को भेंट में चुनरी, श्रृंगार का सामान, फल, गिफ्ट, अनाज, पैसे आदि अपनी सामर्थ्‍य अनुसार दें. 
- फिर से उनके पैर छुएं और सम्‍मानपूर्वक विदा करें.

नवरात्र व्रत का पारण कब करें?

हवन और कन्‍या पूजन की तरह नवरात्र के व्रत पारण को लेकर भी हर परिवार में एक जैसी परंपराएं नहीं हैं. कुछ लोग अष्‍टमी-नवमी की पूजा के बाद कन्‍या पूजन कराकर व्रत का पारण कर लेते हैं. हालांकि धर्म-शास्‍त्रों में जो वर्णन मिलता है, उसके अनुसार नवरात्र के 9 दिन के 9 व्रत रखने के बाद दशमी को व्रत का पारण करना चाहिए. लेकिन इस मामले में अपनी पारिवारिक परंपरा का भी ध्‍यान रखें. इस साल दशमी तिथि 20 अक्‍टूबर 2026 को है. इसी दिन दशहरा मनाया जाएगा और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा.

- व्रत पारण से पहले मां दुर्गा का पूजन करें, उन्‍हें सात्विक चीजों जैसे- खीर, हलवा, पूरी आदि का भोग लगाएं. 
- फिर प्रसाद खाकर ही व्रत का पारण करें. 
- पूरे दिन कोई भी तामसिक चीज का सेवन न करें. 
- हालांकि सेहत संबंधी समस्‍या हो तो उसे प्राथमिकता दें.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं और पंचांग संबंधी विवरणों पर आधारित है. अष्टमी-नवमी की पूजा, कन्या पूजन और व्रत पारण की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है. पूजा का समय तय करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से सलाह लें.)
 

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About the Author

Shraddha Jain

Shraddha Jain

पत्रकारिता में 15 वर्षों का व्यापक अनुभव रखने वाली श्रद्धा जैन वर्तमान में Zee News की नेशनल डिजिटल टीम में बतौर असिस्‍टेंट न्‍यूज एडिटर सक्रिय हैं. जहाँ वे धर्म, ज्योतिष, ग्रह गोचर, अंक शास्‍त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अपनी विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन और सिम्बॉयसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से क्रिएटिव राइटिंग की पढ़ाई की है. बतौर फोटो जर्नलिस्ट करियर शुरू करने वाली श्रद्धा ने दूरदर्शन, दैनिक भास्कर और चौथी दुनिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.12 वर्षों की फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ बनाने के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया और देश 24*7 जैसे पोर्टल्स में नेतृत्व की भूमिका निभाई. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और हस्तरेखा जैसे विषयों पर गहन अध्ययन और लेखन करते हुए जटिल विषयों को सरल और रोचक भाषा में पाठकों के सामने पेश कर रही हैं.
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