SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

अमेठी का रहस्यमयी कालिकन धाम: जहां कदम रखते ही महसूस होती है दिव्य ऊर्जा, जानिए इस सिद्धपीठ का सच

आज हम आपको अमेठी के प्रसिद्ध कालिकन धाम का इतिहास क्या है उसके बारे में बताएंगे. साथ ही महर्षि च्यवन की तपोस्थली, अमृत कुंड और मां कालिका के इस सिद्धपीठ से जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में बताएंगे .

Written By Harsh Singh
Published: Oct 12, 2026, 04:52 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 05:06 PM IST
Join


मां कालिका की पूरे भारत में हजारों मंदिर है पर आज हम भारत के ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में बताएंगे जहां दर्शन करने मात्र से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है.

ये मंदिर यूपी के अमेठी जिले में पड़ता है. इस मंदिर का नाम कालिकन धाम है. इसी जगह पर महान ऋषि च्यवन ने तपस्या की थी.

इस मंदिर के पास हर सोमवार को मेले का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं.

नवरात्र के दिनों में उमड़ता है श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब

शारदीय नवरात्र  शुरू हो चुका है. लोग दर्शन करने के लिए उमड़ चुके हैं. इन दिनों इस मंदिर का रौनक देखने लायाक होती है.

नवरात्र के 9 दिनों में 3 बजे ही लोग पहुंच कर दर्शन करना शरू कर देते हैं. कुछ लोग  तो ऐसे होते हैं जो वहीं दर्शन करने के साथ-साथ हवन, पूजन और अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं.

पूरे नवरात्र के दौरान इस पूरे धाम का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय रहता है. ऐ

सी अटूट मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ मां के दरबार में आता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है.

यही कारण है कि यह स्थान क्षेत्र के सबसे प्रमुख आस्था केंद्रों में शुमार है.

महर्षि च्यवन की तपस्या

कालिकन धाम के पीठाधीश्वर के अनुसार, पुराणों में महर्षि च्यवन की जिस प्रसिद्ध तपोस्थली का वर्णन मिलता है, उसका संबंध इसी संग्रामपुर स्थित स्थल से जोड़ा जाता है.

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार अयोध्या के राजा अपनी पुत्री सुकन्या के साथ जंगल में घूमते हुए महर्षि च्यवन के आश्रम पहुंचे थे.

उस समय महर्षि गहरी तपस्या में लीन थे और उनकी आंखें दीपक की लौ के समान चमक रही थीं.

राजकुमारी सुकन्या ने उन चमकती रोशनियों को कीमती हीरा-जवाहरात समझ लिया और नासमझी में एक तिनके से उनकी आंखों में छेद कर दिया, जिससे महर्षि की आंखों से रक्त बहने लगा.

इसके बाद राजा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने क्षमा मांगकर अपनी पुत्री का विवाह महर्षि से कर दिया.

अश्विनी कुमारों द्वारा महर्षि को फिर से युवा बनाने का प्रसंग


कथा में आगे वर्णन मिलता है कि कुछ समय बाद वहां देवताओं के वैद्य माने जाने वाले अश्विनी कुमार पहुंचे. 

उन्होंने महर्षि च्यवन की तपस्या से खुश होकर उनकी आंखों की ज्योति वापस लौटाई और उन्हें फिर से युवा बना दिया. 

महर्षि के अनुरोध पर ही अयोध्या नरेश ने एक भव्य सोमयज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सभी देवी-देवताओं और अश्विनी कुमारों को आमंत्रित किया गया था. 

देवताओं के इस यज्ञ में शामिल होने पर देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने राजा पर प्रहार करने की कोशिश की तब महर्षि च्यवन ने अपने योगबल और मंत्रों से इंद्रदेव को वहीं बेहोश कर दिया था.

कैसे प्रकट हुई थीं मां कालिका?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अमृत की रक्षा के लिए सभी ऋषियों के खास बुलाने पर एक कुंड के शिलापट पर मां कालिका खुद प्रकट हुई थीं.

मान्यता है कि उसी अति पवित्र स्थल पर आज मां कालिका का यह भव्य कालिकन धाम स्थापित है.

वैसे तो मां यहां अमृत कुंड पर विराजमान हुई थीं, इसलिए उन्हें श्रद्धा से अमृत कुंड वासिनी भी कहा जाता है.

इसके अलावा, स्थानीय परंपराओं में ये भी माना जाता है कि महर्षि च्यवन के इसी आश्रम से मशहूर आयुर्वेदिक औषधि च्यवनप्राश की उत्पत्ति की कथा भी जुड़ी हुई है.
ये भी पढ़ें: उम्मीद की नई किरण: 34 साल बाद खुला ऐतिहासिक शीतलनाथ मंदिर, कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की जगी आस

(Disclaimer): यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है. इसका उद्देश्य पाठकों तक जानकारी पहुंचाना है.

<response-element class="no-md md-has-block-component" ng-version="0.0.0-PLACEHOLDER"><code-block class="ng-tns-c3379029758-103 enable-luminous-code-block ng-star-inserted" style="" _nghost-ng-c3379029758="">
Plaintext
<gem-icon-button class="mat-mdc-tooltip-trigger download-button ng-tns-c3379029758-103 gem-button gem-button-badge-size-small gem-button-size-small gem-button-type-on-surface lm-enabled ng-star-inserted" _ngcontent-ng-c3379029758="" type="onSurface" size="small" fonticonname="arrow_circle_down" theme="lm" arialabel="Download code" gemtooltip="Download code" _nghost-ng-c3972826185="" aria-describedby="cdk-describedby-message-ng-1-19" cdk-describedby-host="ng-1"></gem-icon-button><gem-icon-button class="mat-mdc-tooltip-trigger copy-button ng-tns-c3379029758-103 gem-button gem-button-badge-size-small gem-button-size-small gem-button-type-on-surface lm-enabled ng-star-inserted" _ngcontent-ng-c3379029758="" type="onSurface" size="small" fonticonname="copy" theme="lm" arialabel="Copy code" gemtooltip="Copy code" data-test-id="gem-copy-button" _nghost-ng-c3972826185="" aria-describedby="cdk-describedby-message-ng-1-20" cdk-describedby-host="ng-1"></gem-icon-button>
<pre class="ng-tns-c3379029758-103" _ngcontent-ng-c3379029758=""><code class="code-container formatted ng-tns-c3379029758-103" _ngcontent-ng-c3379029758="" role="text" data-test-id="code-content"></code></pre>
</code-block></response-element>
Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES