IAS के रिजॉर्ट के अंदर पहुंचा Hidden Camera! मैनेजर ने हड़बड़ाकर ये क्या बता दी बात? पढ़ें Z News की पड़ताल
IAS Shikhar Agrawal: राजस्थान के IAS शिखर अग्रवाल के परिवार के नाम पर 40 कॉटेज खरीदने का मामला चर्चा में है। Zee News की टीम अलवर के अनंता रिजॉर्ट पहुंची. Hidden Camera में मैनेजर से हुई बातचीत के दौरान कॉटेज के मालिकाना हक को लेकर अहम सवाल उठे.
Ananta Resort Alwar: राजस्थान के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर सहित परिवार के सदस्यों के नाम पर अलवर और उदयपुर में 40 कॉटेज खरीदे जाने का मामला इन दिनों प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा का विषय बना हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, IAS दंपति ने अपने दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर एक ही बिल्डर ग्रुप से ये कॉटेज खरीदे हैं. इस मामले के सामने आने के बाद शिखर अग्रवाल को APO कर दिया गया है. हालांकि, APO के आधिकारिक आदेश में प्रॉपर्टी खरीद या कथित भ्रष्टाचार को इसकी वजह नहीं बताया गया है.
अब इस मामले में जी न्यूज की टीम ने इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की है. टीम अलवर के अनंता रिजॉर्ट पहुंची और मैनेजर से कॉटेज के मालिकाना हक को लेकर सवाल किए. रिपोर्टर ने जब रिजॉर्ट के मालिकों और कॉटेज के स्वामित्व से जुड़ी जानकारी मांगी, तो बातचीत के दौरान मैनेजर भी हड़बड़ाता नजर आया. आखिर रिपोर्टर के सवालों पर मैनेजर ने क्या जवाब दिया और बातचीत में कौन-सी बातें सामने आईं? पढ़ें जी न्यूज की यह पूरी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट.
रिपोर्टर: "क्या शुभ नाम है? मैनेजर साहब का? आप ही हैं? अच्छा! नमस्कार! सॉरी, मैं सोचा कहीं से आने हैं, मैं वेट कर रहा था."
मैनेजर: "आइए ना, बैठिए."
रिपोर्टर: "बस, हमें तो कुछ सिर्फ इतनी सी जानकारी चाहिए थी कि क्या सिस्टम है? ये होटल है, प्राइवेट रिजॉर्ट है या इन्वेस्टर के बने हुए कॉटेज हैं, एक स्टोरी के हिसाब से?"
मैनेजर: "सर, ये वैसे रिजॉर्ट प्रॉपर्टी है एक."
रिपोर्टर: "जी."
मैनेजर: "दैट्स इट, आई थिंक... अगर कोई गेस्ट स्टे करने का प्लान करता है, दे कैन कम एंड दे कैन स्टे ओवर हियर."
रिपोर्टर: "नहीं, जैसे वो जानकारी में आता है ना, इन्वेस्टर अपने इन्वेस्ट करते हैं और वो अपना एक कॉटेज खरीदते हैं, फिर आप लोग उसको चलाते हैं होटल के रूप में. यही प्रोसेस तो है?"
मैनेजर: "हाँ, कुछ वैसा ही है सर, बिल्कुल-बिल्कुल."
रिपोर्टर: "तो इसमें इन्वेस्टर कौन होते हैं?"
मैनेजर: "वो इंडिविजुअल होते हैं सर. इंडिविजुअल होते हैं, इसके लिए अलग-अलग होते हैं."
रिपोर्टर: "नहीं, बहुत सारे आईएएस, आईपीएस वगैरह ने अपने यहां कॉटेज..."
मैनेजर: "सर, इसकी जो जानकारी है, हम लोग एक्चुअली यहाँ पे ऑपरेशंस देखते हैं."
रिपोर्टर: "अच्छा."
मैनेजर: "वो... वो रियल एस्टेट चैप्टर जो देखते होंगे, उनके पास रहता होगा."
रिपोर्टर: "जयपुर के अंदर हमारा हेड ऑफिस है, वो चीजें वहाँ से कोऑर्डिनेट होती हैं. हम लोग यहाँ पे सिर्फ ऑपरेशन पार्ट देखते हैं."
रिपोर्टर: "अच्छा."
मैनेजर: "जी. अब आइए, बैठिए."
रिपोर्टर: "नहीं, कोई बात नहीं, वैसे जानकारी तो ले सकते हैं. आपसे जरूरी नहीं कि हम... नहीं, नहीं, बैठने के लिए कह रहा हूँ. मैं तो कह रहा हूँ वैसे भी अगर आपसे, जैसे अभी क्या है, दैनिक भास्कर में भी एक खबर छपी थी."
मैनेजर: "हाँ-हाँ, मैंने भी सुना था."
रिपोर्टर: "है ना? वो वो वाली वो जिसमें आईएएस हैं, आईएएस हैं, उन्होंने दस-दस अपने कॉटेज यहाँ खरीदे हैं और लीज पे यहाँ चलाए जाते हैं."
मैनेजर: "ओके."
रिपोर्टर: "उसी संदर्भ में हम कंफर्म करने के लिए आए थे कि हम लोगों को बिल्कुल आइडिया नहीं होता है, क्योंकि हम लोगों का हम यहाँ पे सिर्फ ऑपरेशंस देखने का होता है बेसिकली. हम लोगों का इन सब चीजों... ये जो भी कोऑर्डिनेशन होता है रिगार्डिंग विलास एंड ऑल, वो जयपुर में हमारे हेड ऑफिस में होता है."
रिपोर्टर: "अच्छा, आपको ये नहीं पता किसी की प्रॉपर्टी कौन सी है, कोई पता नहीं."
मैनेजर: "नहीं, नहीं. ये हमारे पास डिटेल्स होती ही नहीं हैं. हमारे पास बीइंग अ ऑपरेशन टीम, हमारे पास में एक रिजॉर्ट प्रॉपर्टी है, ठीक है? हमें यहाँ पे... भई ये है सर जो... कितने... कितने कॉटेज, कितने रूम्स हैं?"
रिपोर्टर: "135 रूम्स हैं."
मैनेजर: "135."
रिपोर्टर: "135."
मैनेजर: "अच्छा, अच्छा."
रिपोर्टर: "और एक कॉटेज में कितने रूम बना रखे होंगे ये?"
मैनेजर: "एक कॉटेज में..."
रिपोर्टर: "आइए ना सर, बैठते हैं."
मैनेजर: "नहीं, बस निकलूँगा मैं. एक कॉटेज में कितने रूम हैं अंदाज़न?"
रिपोर्टर: "आप देख सकते हैं जैसे... आइए, वैसे बता दीजिए, मैं निकलूँगा मैं, ऐसी कोई बात नहीं है."
मैनेजर: "मेरे को कुछ अजीब सा लग रहा है आप ये मतलब वो जिस तरीके से वो सेट कर रखा है, ये जो चीज़ें हैं सर..."
रिपोर्टर: "वो तो रिकॉर्डिंग करने ही आए थे हम लोग, हम तो रिकॉर्डिंग करने ही आए थे."
मैनेजर: "आइए बैठ के बात करते हैं, यहीं बैठ जाएंगे, कोई बात नहीं."
ये भी पढ़ें- IAS शिखर अग्रवाल को किया APO, प्रशासनिक कारणों से लिया गया फैसला
रिपोर्टर--जुगल किशोर