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पहले लिफाफा खुला, फिर डील हुई: IDBI बैंक-फेयरफैक्स के ₹53000 करोड़ के सौदे पर क्यों उठ रहे सवाल, क्या सस्ते में बिक गया बैंक?

देश के अब तक के सबसे महंगे FDI सौदे पर विवाद और राजनीति भी शुरू हो गई है.कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोर्चा खोला है, तो विपक्ष इस डील पर सवाल उठा रहे हैं. इन बीच Businessworld में छपी एक रिपोर्ट ने सौदे पर भी सवाल उठाया है.

पहले लिफाफा खुला, फिर डील हुई: IDBI बैंक-फेयरफैक्स के ₹53000 करोड़ के सौदे पर क्यों उठ रहे सवाल, क्या सस्ते में बिक गया बैंक?
Image Credit: IDBI Bank ( AI IMAGE)

IDBI Bank-Fairfax Deal:  14 अक्टूबर को खबर आई कि केंद्रीय कैबिनेट ने IDBI बैंक में अपनी 60.72% की हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है. सरकार की मंजूरी के बाद 62 साल पुराने IDBI बैंक की कमान कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल के हाथों में चली जाएगी. सरकार को इस डील से 52,878 करोड़ रुपये मिलेंगे और Fairfax को बैंक की सबसे हिस्सेदारी. अब इस डील में ट्वीस्ट तब आया, जब बिजनेसवर्ल्ड की एक रिपोर्ट सामने आई. 

IDBI बैंक की डील पर क्यों उठ रहे हैं सवाल ? 

देश के अब तक के सबसे महंगे FDI सौदे पर विवाद और राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोर्चा खोला है, तो विपक्ष इस डील पर सवाल उठा रहे हैं. इन बीच Businessworld में छपी एक रिपोर्ट ने सौदे पर भी सवाल उठाया है.

 

 

बिजनेसवर्ल्ड के पत्रकार पलक शाह ने अपनी रिपोर्ट ने IDBI Bank-Fairfax Financial की डील के प्रोसेस पर सवाल उठाये हैं.  रिपोर्ट में DIPAM नोट के आधार पर दावा किया गया है कि 13 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों ने सीलबंद लिफाफा खोला, जिस लिफाफे के अंदर IDBI Bank  के लिए कनाडा की कंपनी फायरफैक्स ने अपनी अंतिम बोली रखी थी.  इसी दिन बैंक में विनिवेशन (Disinvestment) के लिए पहले से तय किए रेट्स हटा दिए गए.

पहले लिफाफा खुला, फिर तय हुई कीमत?

बिजनेस वर्ल्ड  ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अधिकारियों ने  Fairfax की फाइनल बोली देखने को बाद IDBI बैंक के लिए नए नियम के साथ नए वैल्यूएशन का आदेश दिया.  रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय के DIPAM के 10 पन्नों के एक आंतरिक नोट का हवाला  दिया गया है. 13 अगस्त 2026 को DIPAM के सेक्रेटरी अरुणिस चावला के साइन किए नोट में  फायरफैक्स की सिफारिश की गई. यह नोट IDBI Bank की बिक्री प्रक्रिया की निगरानी करने वाले Core Group of Secretaries on Disinvestment (CGD) के पैनल को लिखा गया. उनसे सिफारिश की गई कि जिस बोलीदाता को “QIP-3” कहा गया है, उसे खरीदार के रूप में चुना जाए. बाद में केंद्रीय कैबिनेट ने भी कनाडा की कंपनी फायरफैक्स की इस डील को मंजूरी दे दी.

क्या फायरफैक्स को पहुंचाया गया फायदा ?  

बिजनेस वर्ल्ड ने दावा किया है कि उन्होंने Department of Investment and Public Asset Management (DIPAM) की 10 पन्नों की वो नोट देखी है, जिसमें कनाडा की कंपनी फायरफैक्स के साथ डील की सिफारिश की गई है. वैल्यूएशन में बदलाव किया गया है.  रिपोर्ट में दावा किया है कि पहले की प्रक्रिया में रिजर्व प्राइस बोली का लिफाफा खोलने के बाद बदला गया. शुरुआती बोली कम रहने पर प्रक्रिया में बदलाव किया गया.  

रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती राउंड में प्रति शेयर 94.42 रुपये का रिजर्व प्राइस था. बाद में Fairfax  में  81 रुपये प्रति शेयर  की बोली लगाई. जबकि सरकार ने अंतिम बेंचमार्क कीमत 75.99 रुपये प्रति शेयर बताई. चूंकि इस प्राइस से Fairfax की बोली अधिक थी, इसलिए सरकार ने फायरफैक्स के पक्ष में फैसला लिया और Fairfax को IDBI Bank की 60.72% हिस्सेदारी खरीदने के लिए चुना गया.  

राहुल गांधी ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस डील पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने डील के प्रोसेस से ज्यादा बैंक को बेचे जाने पर सवाल उठाया है. IDBI बैंक के कर्मचारियों को चिट्ठी लिखी है.  केंद्र सरकार को घेरते हुए उन्होंने इस प्रस्ताव की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के शासनकाल में बैंक बनते थे, लेकिन मोदी सरकार बैंकों को बेच रही है. एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा है.. "कांग्रेस के समय में IDBI बना - देश का उद्योग खड़ा करने के लिए, लेकिन मोदी के समय में पहले बोली देखी गई, फिर दाम तय हुआ.  

सरकार का जवाब - ना कीमत बदली, ना प्रक्रिया 

डील में वैल्यूएशन को लेकर उठ रहे सवाल पर सरकार ने सफाई दी है.  IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर उठे सवालों के बीच वित्त मंत्रालय ने बचाव किया है.  सरकार ने साफ किया है कि बैंक की बिक्री के दौरान ना तो रिजर्व प्राइस में कोई कटौती की गई और न ही इसे बढ़ाया गया.  

  • वित्त मंत्रालय के मुताबिक साल 2025-26 में पहले राउंड की शुरुआती बोली कराई गई, लेकिन उस समय प्राप्त बोलियों को मंजूरी नहीं मिला.  
  • पहले राउंड में सफलता नहीं मिलने के बाद कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की ओर से कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन डिसइन्वेस्टमेंट (CGD) ने दूसरे राउंड की बिडिंग कराई.  
  • दूसरे राउंड में  रिजर्व प्राइस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. बिडिंग प्रोसेस में बदलाव का अधिकार सीजीडी के पास है.
  • IDBI बैंक की वैल्यूएशन के लिए दो स्वतंत्र सलाहकारों की मदद ली गई थी, वैल्यूएशन के लिए Market Multiple Method का इस्तेमाल किया गया था. 


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी को जवाब

IDBI बैंक डील में अब राजनीति शुरू हो गई है. राहुल गांधी के सवाल के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का जवाब आया है. वित्त मंत्री ने X पोस्ट के जरिए राहुल गांधी को जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि जब NDA सरकार को IDBI बैंक मिला था, तो उसकी हालत बेहद खराब थी.  सरकार की पेशेवर प्रबंधन, कर्ज को लेकर सतर्क नीति और 25,000 करोड़ से ज्यादा की रिकैपिटलाइजेशन की मदद से इसकी वित्तीय स्थिति को सुधारा गया है.

वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि पहले बैंक को Videocon, Winsome, ABG Shipyard और Kingfisher जैसे बड़े कारोबारियों को कर्ज देने के लिए मजबूर किया गया, जो कर्ज NPA में बदल गया और बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ. सरकार बैंक को ग्रोथ फेज के लिए तैयार कर रही है.  
 

 

 

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About the Author

Bavita Jha

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बवीता झा बिजनेस पत्रकार हैं, उन्हें डिजिटल और टीवी न्यूज़ मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News Hindi (Digital) में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. व्यापार जगत की जटिलताओं और आर्थिक आंकड़ों को आम पाठकों के लिए सरल भाषा में डिकोड करना उनका मजबूत पक्ष है.  • शेयर बाजार • बिजनेस एक्सप्लेनर • पर्सनल फाइनेंस और टैक्सेशन  • कमोडिटी, गोल्ड-सिल्वर ट्रेड• ग्लोबल ट्रेड • जियो इकोनॉमिकस डेवलपमेंट • कारोबार से जुड़ी सरकारी योजना और पॉलिटी • बिजनेस और मार्केट ट्रेंडZee News से पहले बवीता ने नवभारत टाइम्स (NBT) के बिजनेस सेक्शन और Oneindia जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल संस्थानों में इवनिंग शिफ्ट, होम पेज मैनेजमेंट और ट्रेडिंग न्यूज़ की अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं. इसके अलावा महुआ न्यूज़, जनसंदेश और सहारा जैसे टीवी चैनलों में प्रोग्राम प्रोड्यूसर और रनडाउन मैनेजमेंट का उनके पास 4 वर्षों का ठोस अनुभव है.  दिल्ली से पत्रकारिता में स्नातक और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली बवीता, खबरों की सत्यता और वित्तीय मामलों की सटीक रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देती हैं.  बवीता झा से आप bavita.jha@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स  पर https://x.com/youthreporter2 के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कनेक्ट होने के लिए फेसबुक पेज https://www.facebook.com/bavita.jha , इंस्टाग्राम instagram.com/bavita.jha पर जुड़ सकते हैं. बवीता झा की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक कर सकते हैं.
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