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सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर कोई हंसता है, तो कोई मनोरंजन के लिए उसे बार-बार देखता है. इसी में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो वहां दिखने वाले किरदारों से भावनात्मक रूप से जुड़ भी जाते हैं. चीन में इन दिनों इसी कमजोरी का फायदा उठाने का एक नया तरीका सामने आया है. यहां शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर AI से बनाए गए किशोर लड़कों के वीडियो की बाढ़ आ गई है.
इन किरदारों को चीन में 'शियाओहाई' (Xiaohai) नाम दिया गया है. ये लड़के आमतौर पर स्कूल यूनिफॉर्म या सफेद शर्ट पहने नजर आते हैं. वीडियो में कभी वे रोते हैं, तो कभी अपनी गरीबी और परेशानियों का जिक्र करते हैं. इनकी कहानियां इस तरह बनाई जाती हैं कि देखने वाले को उन पर तरस आ जाए. खास बात यह है कि वीडियो में ये लड़के बुजुर्ग महिलाओं को प्यार से 'आंटी' और 'मां' कहकर बुलाते हैं. फिर अपनी परेशानी बताते हुए उनसे कोई न कोई सामान खरीदने की अपील करते हैं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इन वीडियो में दिखाई जाने वाली कहानियां भी काफी सोच-समझकर तैयार की जाती हैं. एक वीडियो में AI लड़का हाथ में भाप से बना हुआ बन लिए बैठा है. वह बताता है कि उसके सभी दोस्त बाहर जाकर खाना खा रहे हैं, जबकि उसे पैसे की कमी के कारण क्लासरूम में छिपकर खाना पड़ रहा है. ऐसे ही एक दूसरे वीडियो में लड़के को बारिश के बीच परेशान दिखाया जाता है. वह दावा करता है कि फीस जमा नहीं करने के कारण उसके साथ पढ़ने वाले बच्चे उसे परेशान कर रहे हैं.
इसके बाद वह दर्शकों से एक खास तरह का अनाज खरीदने की अपील करता है. उसका कहना होता है कि सामान बेचने का टारगेट पूरा नहीं हुआ, तो उसे दोबारा बेइज्जती झेलनी पड़ेगी. कुछ दूसरे AI किरदार हेल्थ सप्लीमेंट और घर में इस्तेमाल होने वाले सामान बेचते हैं. वे कभी बीमार पिता का हवाला देते हैं, तो कभी अकेले पिता की आर्थिक मदद करने की बात कहते हैं. मतलब हर वीडियो में एक ऐसी कहानी दिखाई जाती है, जिससे देखने वाले का दिल पसीज जाए.
इस पूरे खेल में सिर्फ इमोशन का इस्तेमाल नहीं हो रहा, बल्कि सामान की कीमतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि एक AI कैरेक्टर ने खाना पकाने वाला तेल 99 युआन में बेचने का प्रचार किया. जबकि यही सामान दूसरे दुकानदारों के यहां करीब 60 युआन में मिल रहा है. इसके बावजूद लोग इन वीडियो को देखकर सामान खरीद रहे हैं. इसके पीछे वजह एकदम साफ है. खरीदारी करने वाले कुछ लोगों को लगता है कि वे किसी जरूरतमंद बच्चे की मदद कर रहे हैं. उन्हें यह एहसास ही नहीं होता कि पर्दे पर दिख रहा लड़का असली इंसान नहीं, बल्कि AI से तैयार किया गया एक काल्पनिक कैरेक्टर है.
इस तरह के वीडियो बनाने वालों के लिए यह काम कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में सामान की बिक्री पर 55 फीसदी तक कमीशन मिलने की बात सामने आई है. द बीजिंग न्यूज से बातचीत में एक इंडस्ट्री से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI प्रॉम्प्ट का इस्तेमाल करके शियाओहाई जैसे वीडियो तैयार किए जा सकते हैं. कुछ कंटेंट बनाने वाले लोग इससे हर दिन 2,000 से 3,000 युआन तक कमाने का दावा कर रहे हैं. चीन के शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर इस ट्रेंड से जुड़े विषयों को 60 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन AI कैरेक्टरों की पहुंच कितनी तेजी से बढ़ी है.
इन वीडियो के कमेंट सेक्शन में नजर डालें, तो पता चलता है कि इनके साथ जुड़ने वाले लोगों में बड़ी संख्या मिडिल एज और बुजुर्ग महिलाओं की है. कई महिलाएं इन AI से बने लड़कों के लिए चिंता जताती हैं और उन्हें अपने बच्चों की तरह समझने लगती हैं. एक यूजर ने कमेंट किया कि तुम सिर्फ बन क्यों खा रहे हो? आंटी-मम्मी का दिल टूट रहा है. वहीं एक दूसरी महिला ने लिखा कि प्यारे बेटे, मम्मी ने तुम्हारे चार सामान ऑर्डर किए हैं. तुमसे हमेशा प्यार करती हूं. ये कमेंट बताते हैं कि कुछ लोग वीडियो में दिखाई देने वाले किरदारों से किस हद तक इमोशनल रूप से जुड़ चुके हैं. उनके लिए यह सिर्फ ऑनलाइन वीडियो देखने का मामला नहीं रह गया है.
इस ट्रेंड का एक मामला तो और भी हैरान करने वाला है. मई में चीन के उरुमची में पुलिस ने 79 साल की एक महिला को ट्रेन में अकेले सफर करते हुए रोका. महिला पढ़ना-लिखना नहीं जानती थी और अकेले ही उत्तरी चीन के शांक्सी प्रांत जा रही थी. पूछताछ में उसने बताया कि वह वहां एक शियाओहाई से मिलने जा रही है. महिला के अनुसार, उस लड़के ने लाइवस्ट्रीम के दौरान उसे मशरूम खाने और फूल देखने के लिए बुलाया था. पुलिस ने महिला को समझाया कि वीडियो में दिखने वाला लड़का असली नहीं है, बल्कि AI से बनाया गया एक कैरेक्टर है. इसके बाद पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क किया और महिला को सुरक्षित घर वापस भेजने का इंतजाम किया.
इस मामले ने चीन में बुजुर्गों के अकेलेपन और डिजिटल वर्ल्ड में उनके इमोशनल जुड़ाव को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है. पेकिंग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मा लियांग ने 'चाइना न्यूजवीक' से बातचीत में कहा कि कई बुजुर्ग अपने रोजमर्रा के जीवन में अकेलापन महसूस करते हैं. ऐसे में वे डिजिटल दुनिया के जरिए उस खालीपन को भरने की कोशिश करते हैं. शियाओहाई जैसे AI कैरेक्टर इसी इमोशन को निशाना बनाते दिखाई दे रहे हैं. जब कोई बुजुर्ग महिला किसी लड़के को अपना बच्चा समझने लगती है, तो उसके लिए यह पहचान पाना मुश्किल हो सकता है कि सामने दिखाई जा रही कहानी सच है या सिर्फ सामान बेचने के लिए बनाई गई है.
इस ट्रेंड को लेकर कानूनी जानकारों ने भी चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर जानबूझकर झूठी कहानियां बनाकर लोगों को सामान खरीदने के लिए उकसाया जाता है, तो यह धोखाधड़ी के दायरे में आ सकता है. रिपोर्ट सामने आने तक इस कथित धोखाधड़ी से जुड़ी कुल रकम का खुलासा नहीं हुआ था. हालांकि, चीन के शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म से शियाओहाई से जुड़े ज्यादातर वीडियो हटाए जाने की जानकारी सामने आई.
दिलचस्प बात यह है कि कुछ टेक्नोलॉजी की जानकारी रखने वाले लोग अब AI का इस्तेमाल करके ही इस ट्रेंड के खिलाफ वीडियो बना रहे हैं. वे 'ईविल शियाओहाई' नाम से पैरोडी वीडियो तैयार कर रहे हैं. इन वीडियो में वही AI लड़के कभी जेल की वर्दी पहने अपने फैंस से माफी मांगते दिखाई देते हैं, तो कभी महंगे कपड़े पहनकर और सिगरेट पीते हुए अपनी करतूतों पर शेखी बघारते हैं. इनका मकसद लोगों को यह समझाना है कि भावुक करने वाली हर ऑनलाइन कहानी पर भरोसा करना ठीक नहीं है. फिलहाल चीन में शियाओहाई का मामला सिर्फ महंगे सामान बेचने तक सीमित नहीं रह गया है. इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि AI से बनी तस्वीरों और वीडियो के दौर में आम लोगों, खासकर बुजुर्गों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचाया जाए.