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Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने एक ऐसा बयान दे डाला जिसने देश के तमाम बिजनेस स्कूलों और मैनेजमेंट एजुकेशन सिस्टम की नींव हिलाकर रख दी है. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा है कि भारत में इन ट्रेडिशनल बिजनेस स्कूलों को बंद कर देना चाहिए और अपना पूरा ध्यान स्टार्टअप इनक्यूबेटर बनाने पर लगाना चाहिए. आखिर श्रीधर वेम्बू ने ऐसा क्यों कहा और सोशल मीडिया से लेकर स्टार्टअप जगत में इस बात पर इतना हंगामा क्यों मचा हुआ है?
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर की बात से मिला समर्थन
इस पूरी बहस की शुरुआत तब हुई जब यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज जज बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर क्रिस मार्क्विस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर यह कहा कि वो एक बिजनेस स्कूल में पढ़ाते हैं और अब वक्त आ गया है कि इन स्कूलों को बंद कर दिया जाए.
उनकी इस बात पर तुरंत रिएक्ट करते हुए जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने कहा कि वो इस बात से सौ प्रतिशत सहमत हैं और पिछले दो दशकों से यही बात कहते आ रहे हैं. वेम्बू का साफ कहना है कि भारत को बिजनेस स्कूल चलाने के बजाय बड़े पैमाने पर स्टार्टअप तैयार करने और युवाओं को खुद नए आइडिया के साथ एक्सपेरिमेंट करने का मौका देने की जरूरत है.

सोशल मीडिया पर भिड़े लोग: क्या एमबीए सच में हो चुका है आउटडेटेड?
श्रीधर वेम्बू के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए हैं. एक तरफ जहां कई लोग इस बात से पूरी तरह सहमत नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग पारंपरिक मैनेजमेंट शिक्षा का बचाव भी कर रहे हैं. एक यूजर ने तो यहां तक कह दिया कि भारत के पास पहले से ही लाखों एमबीए ग्रेजुएट्स की फौज है, लेकिन कमी इस बात की है कि लोग खुद से जमीन पर उतरकर कोई नया बिजनेस शुरू करने से डरते हैं. उस यूजर का सुझाव था कि देश के आधे बिजनेस स्कूलों को बंद करके वहां स्टार्टअप इनक्यूबेटर बना दिए जाने चाहिए, जहां युवा खुद कंपनियां बनाकर, गलतियां करके और उनसे सीखकर आगे बढ़ सकें.
देश के छोटे शहरों से लेकर कस्बों तक फैल रहा है स्टार्टअप का जाल
अगर हम श्रीधर वेम्बू के इस तर्क को गहराई से समझें, तो इसके पीछे भारत के बदलते हुए स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक बड़ी तस्वीर नजर आती है. आज के समय में ऐसा बिल्कुल नहीं है कि बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने का हक सिर्फ बड़े-बड़े मेट्रो शहरों के चुनिंदा लोगों के पास ही हो. सरकारी आंकड़ों यानी DPIIT के डेटा पर नजर डालें तो भारत में अब ढाई लाख से ज्यादा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हो चुके हैं, जो देश के 770 से ज्यादा जिलों में फैले हुए हैं.
इन कंपनियों ने मिलकर देश में पच्चीस लाख से ज्यादा रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं. सबसे मजेदार बात यह है कि इनमें से लगभग बानवे प्रतिशत स्टार्टअप्स छोटे शहरों और महानगरों से बाहर के इलाकों से ऑपरेट हो रहे हैं, जो यह साफ दिखाता है कि आंत्रप्रेन्योरशिप का कीड़ा अब देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है. इसके अलावा सरकार की तरफ से भी स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के जरिए हजारों नए स्टार्टअप्स को करोड़ों रुपये की फंडिंग मिल रही है, जिससे युवाओं को अपने आइडिया को जमीन पर उतारने में काफी मदद मिल रही है.
एआई के दौर में कैसी होगी काम करने की दुनिया?
श्रीधर वेम्बू की सोच सिर्फ बिजनेस स्कूल बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इस बात पर भी गहरी चिंता जताई है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे AI और ज्यादा ताकतवर होता जाएगा, लोगों के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा. उनका मानना है कि एक स्किल्ड इंसान अगर सही तरीके से एआई का इस्तेमाल करे, तो वो अकेले ही उतने काम चुटकियों में कर सकता है जिसके लिए पहले दस लोगों की पूरी टीम की जरूरत पड़ती थी.
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कंप्यूटर पर काम करने वाले सभी लोगों की नौकरियां चली जाएंगी, बल्कि इसका मतलब यह है कि कंपनियों को अपने काम बांटने के तरीके में बदलाव करना होगा. वेम्बू के मुताबिक, एआई के साथ काम करने के लिए लोगों को अपने गोल एकदम साफ रखने होंगे, किसी भी बड़ी और मुश्किल समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना आना चाहिए और यह पहचानना आना चाहिए कि तकनीक कहां गलती कर रही है. उन्होंने इन सभी क्षमताओं को मेटा-लेवल स्किल्स कहा है, जो आज के दौर में हर युवा के लिए सीखना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है.