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केदारनाथ मूवी फेम सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा पर जमकर बहस छिड़ गई है. उत्तर प्रदेश के इस्लामिक मौलवी मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी द्वारा फतवा जारी किए जाने के बाद यह अब धार्मिक विवाद बन गया है. इतना ही नहीं एक और मुस्लिम स्कॉलर नाजिम खान ने इसे सही ठहराते हुए सारा अली खान द्वारा केदारनाथ मंदिर में पूजा करने को सबसे बड़ा गुनाह बताया है. Zee News से Exclusive बातचीत में मुस्लिम स्कॉलर नाजिम खान ने इस मुद्दे पर क्या-क्या कहा, जानिए.
नाजिम खान ने कहा है कि मजहब-ए-इस्लाम को मानने वाला यदि दूसरे धर्म के भगवान की पूजा करे तो उसके पास सिर्फ 2 ही रास्ते हैं, या तो अल्लाह से तौबा कर ले या फिर उसके खिलाफ फतवा दिया जाए. लिहाजा केदारनाथ में सारा अली खान द्वारा पूजा करने पर फतवा जारी करना सही है.
मजहब-ए-इस्लाम में साफ कहा गया है कि आपने अल्लाह के सिवाय किसी और को भगवान माना या उसकी पूजा की तो ये सबसे बड़ा गुनाह है. अल्लाह को शिर्क (अल्लाह की सत्ता या उसकी पूजा में किसी अन्य की पूजा करके उसे भागीदार बनाना) पसंद नहीं है. अल्लाह सिर्फ एक है और हर मुसलमान को सिर्फ उसकी ही इबादत करनी चाहिए.
यदि कोई महिला या पुरुष दूसरे धर्म की पूजा पद्धति को अपनाती है, अन्य भगवान की इबादत करती है तो शरिया उसको बल्किुल स्वीकार नहीं करेगा. शरिया अल्लाह के एक होने की बात कहता है.
नाजिम खान ने आगे कहा, सारा अली खान ने मजहब-ए-इस्लाम से अलग हटकर पूजा अर्चना की है और ऐसा करना बहुत बड़ा गुनाह है. लेकिन अल्लाह गुनाह माफ करने वाला है, यदि सारा अली खान सच्चे दिल से अल्लाह से तौबा करें तो अल्लाह माफ कर देगा. वह रहम करने वाला है और सभी के गुनाहों को माफ कर देता है. इसलिए सारा अली खान को अपना गुनाह मानते हुए माफी मांगनी चाहिए.
इस्लाम सभी धमों का सम्मान करता है. लेकिन पूजा-पद्धति इस्लाम के लिए एक ही है, अल्लाह एक है. मजहब ए इस्लाम को मानने वाला सिर्फ अल्लाह की इबादत करता है उसके सिवाय किसी की इबादत नहीं करता है. कोई दूसरे भगवान की इबादत करे तो वो मजहब ऐ इस्लाम में गुनेहगार है.
बता दें कि इससे पहले भी सारा अली खान केदारनाथ धाम की यात्रा कर चुकी हैं और वहां पूजा-अर्चना कर चुकी हैं. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं.