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सात समंदर पार कैद शेखावाटी के सपने: वतन वापसी के लिए मांग रहे भीख, कब मिलेगी मदद ?

Rajasthan News: दुबई में नौकरी करने गए राजस्थान के चूरू और झुंझुनू जिले के युवाओं ने बदहाल हालात में फंसे होने का आरोप लगाते हुए भारत सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है. युवाओं का दावा है कि भारत लौटने के लिए प्रति व्यक्ति करीब 3 हजार दिरहम मांगे जा रहे हैं.

सात समंदर पार कैद शेखावाटी के सपने: वतन वापसी के लिए मांग रहे भीख, कब मिलेगी मदद ?
Image Credit: AI Image

Rajasthan News: परिवार की खुशहाली के सपने लेकर सात समंदर पार गए युवाओं को क्या पता था कि जिस नौकरी के भरोसे वे घर छोड़ रहे हैं. वही उनके लिए मुसीबत बन जाएगी. किसी ने परिवार से पैसे उधार लिए, तो किसी ने ब्याज पर कर्ज लेकर विदेश जाने का इंतजाम किया. एजेंट पर भरोसा किया, बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई की उम्मीद लगाई, लेकिन दुबई पहुंचते ही उनके सपने टूटने लगे. अब ये युवा कथित तौर पर बदहाल हालात में फंसे हैं और वीडियो जारी कर भारत सरकार, प्रशासन तथा अपने परिजनों से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

दुबई में फंसे शेखावाटी के युवाओं के वीडियो सामने आए हैं. इनमें कोई रोते हुए अपनी पीड़ा बता रहा है, तो कोई हाथ जोड़कर वतन वापस बुलाने की अपील कर रहा है. युवाओं का आरोप है कि भारत में उन्हें जिस कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था, दुबई पहुंचने पर वहां काम नहीं मिला. इसके बजाय उन्हें दूसरी सप्लाई कंपनी में लगा दिया गया. अब काम के लंबे घंटे, वेतन को लेकर अनिश्चितता, खाने-रहने की परेशानी और पासपोर्ट नहीं मिलने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है.

दुबई भेजने के लिए 50 हजार रुपये ऐंठे

झुंझुनूं जिले के डाबड़ी धीरसिंह निवासी मोहम्मद महबूब अली टाइल मिस्त्री हैं. महबूब का कहना है कि उन्होंने झुंझुनूं के एजेंट सुरेश कुमार को 50 हजार रुपये दिए थे. उन्हें दुबई की एमबीएम कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया. उनका इंटरव्यू भी इसी कंपनी के लिए हुआ और वीजा भी उसी कंपनी का दिया गया, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद उन्हें एमबीएम के बजाय एबीसी नाम की सप्लाई कंपनी में काम पर लगा दिया गया.

भारत लौटने की बात पर 80 हजार रुपये मांगने का आरोप

महबूब के मुताबिक, वहां पहुंचते ही उनका पासपोर्ट ले लिया गया. अब उन्हें बताया जा रहा है कि दो महीने बाद वेतन मिलेगा. ऐसे में सवाल यह है कि जब हाथ में पैसे नहीं हैं, तो दो महीने तक खाने-पीने का इंतजाम कैसे करें. परिवार से पैसे मांगकर आखिर कितने दिन गुजारा किया जा सकता है. महबूब का आरोप है कि जब उन्होंने भारत लौटने की बात कही, तो उनसे करीब 3 हजार दिरहम यानी लगभग 80 हजार रुपये मांगे गए. दुबई जाने के लिए पहले ही 50 हजार रुपये खर्च कर चुके महबूब के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना मुश्किल है. नौकरी के नाम पर विदेश पहुंचे महबूब अब अपने ही वतन लौटने के लिए बेबस नजर आ रहे हैं.

खाने तक के नहीं बचे पैसे

झुंझुनूं निवासी मोहम्मद शोएब अली की परेशानी भी कुछ ऐसी ही है. शोएब का कहना है कि उन्होंने भी एजेंट सुरेश को 50 हजार रुपये देकर दुबई जाने का इंतजाम किया था. भारत में उन्हें एक कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया, लेकिन दुबई पहुंचने के बाद वह कंपनी ही नहीं मिली. शोएब के मुताबिक, जब उन्होंने एजेंट से संपर्क कर अपनी परेशानी बताई, तो जवाब मिला कि उसका काम उन्हें दुबई भेजना था. वहां पहुंचने के बाद क्या हो रहा है, इसकी उसे जानकारी नहीं है. शोएब का कहना है कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं और जिस कंपनी में उन्हें काम पर लगाया गया है, वहां उनकी जिम्मेदारी लेने वाला भी कोई नहीं है.

16-16 घंटे तक युवकों से कराया जा रहा काम

युवाओं का कहना है कि विदेश जाने से पहले उन्हें करीब आठ घंटे की ड्यूटी की जानकारी दी गई थी, लेकिन वहां सुबह 4 बजे उठना पड़ता है. सुबह पांच से साढ़े पांच बजे तक काम के लिए निकलते हैं और रात 8 से 9 बजे तक काम करना पड़ता है. उनका आरोप है कि उनसे 16 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जबकि वेतन कब मिलेगा इसकी भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है. युवाओं की ओर से जारी वीडियो में उनकी बेबसी साफ दिखाई देती है. एक वीडियो में युवक फर्श पर बैठकर रोता नजर आता है. उसके साथी उसे ढांढस बंधाते हुए चुप कराने की कोशिश करते हैं.

बीमार होने पर भी काम पर जाने का दबाव

वहीं दूसरे वीडियो में एक युवक कहता है कि उससे अब काम नहीं हो पा रहा है. चक्कर आ रहे हैं और शरीर जवाब दे रहा है. वह बार-बार अपनी परेशानी बताने के बावजूद राहत नहीं मिलने की बात कहता है. कामगारों का आरोप है कि बीमार होने पर भी काम पर जाने का दबाव बनाया जाता है. काम पर नहीं जाने पर कमरे से बाहर निकालने या जुर्माना लगाने की बात कही जाती है. कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनके कमरों से सामान बाहर निकाल दिया और उन्हें बेघर जैसी स्थिति में छोड़ दिया. अब उनके सामने रहने और खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है.

पासपोर्ट वापस मांगने पर पैसे की मांग का आरोप

युवाओं का सबसे बड़ा आरोप है कि उनके पासपोर्ट कंपनी के पास हैं और वापस मांगने पर पैसे मांगे जा रहे हैं. उनका कहना है कि भारत लौटने के लिए प्रति व्यक्ति करीब तीन हजार दिरहम की मांग की जा रही है. पहले ही एजेंट को 50 से 60 हजार रुपये तक देने वाले युवाओं के लिए यह रकम जुटाना आसान नहीं है. जानकारी के अनुसार, चूरू और झुंझुनूं के छह लोग 1 से 3 अक्टूबर के बीच दुबई पहुंचे थे. युवाओं का दावा है कि उनके अलावा करीब 26 अन्य लोग भी वहां लंबे समय से फंसे हुए हैं. वीडियो में मोहम्मद अयान सहित अन्य कामगार भी अपनी परेशानी बताते हुए मदद की अपील कर रहे हैं.

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Aman Singh

Aman Singh

जून 2023 से ज़ी राजस्थान के साथ कार्यरत अमन लगातार अपनी क्रिएटिविटी और प्रोफेशनल स्किल्स के जरिए पाठकों तक तेज, सटीक और भरोसेमंद खबरें पहुंचा रहे हैं. वे उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं, अमन ने जौनपुर से ही अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पूरी की. इसके बाद उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया. डिजिटल पत्रकारिता में गहरी समझ, तेज खबर पकड़ने की क्षमता के कारण अमन सिंह एक उभरते हुए और भरोसेमंद मीडिया प्रोफेशनल के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं.
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