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शाम को चुनाव चिन्ह, सुबह वोटिंग: सरपंच चुनाव में होगा बड़ा खेल, इस नए नियम से उम्मीदवारों की बढ़ी धड़कन

Rajasthan News: राजस्थान पंचायत चुनाव में सरपंच उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलने के बाद प्रचार के लिए 24 घंटे से भी कम समय मिलेगा. नामांकन और मतदान के बीच कम समय ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है. अब सोशल मीडिया और AI से प्रचार पर जोर रहेगा.

Reported ByBabulal DhayalEdited BySAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 07, 2026, 03:09 PM IST|Updated: Oct 07, 2026, 04:30 PM IST
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शाम को चुनाव चिन्ह, सुबह वोटिंग: सरपंच चुनाव में होगा बड़ा खेल, इस नए नियम से उम्मीदवारों की बढ़ी धड़कन
Image Credit: Rajasthan Panchayat Chunav (AI IMAGE)

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Babulal Dhayal

Babulal Dhayal

बाबूलाल धायल ज़ी राजस्थान में सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट के रूप में कार्यरत हैं. पिछले 25 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और सीएमओ और मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों की खबरें प्रमुखता से कवर करते हैं. पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में उनकी मजबूत पहचान है और वे बीजेपी - कांग्रेस दोनों से जुड़ी खबरों को कवर करते रहे हैं. विधानसभा, सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों और ग्रामीण विषयों पर उनकी पकड़ खास मानी जाती है. बाबूलाल धायल,  राजस्थान पत्रिका, ईटीवी और न्यूज़18 जैसे संस्थानों में भी कार्य कर चुके हैं.
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Rajasthan Panchayat Chunav: चुनावी कार्यक्रम के तकनीकी और कानूनी पहलुओं ने उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की नींद उड़ा दी है. सरपंच के उम्मीदवारों को इस बार जनता के बीच चुनाव चिह्न के साथ प्रचार करने के लिए बहुत कम समय मिलेगा. आधिकारिक चुनाव चिह्न मिलने के बाद प्रचार के महज कुछ ही घंटों का समय मिल रहा है, जिसे लेकर गांवों में बहस छिड़ी हुई है.

14,403 ग्राम पंचायतों में लागू हुई आचार संहिता
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 3 अक्टूबर 2026 को पंचायती राज चुनावों का शंखनाद कर दिया गया है. 14,403 ग्राम पंचायतों में आचार संहिता लागू हो चुकी है और चारों तरफ चुनावी बिसात बिछने लगी है. लेकिन इस बार का यह महामुकाबला ग्रामीण राजनीति के सबसे अहम पद यानी 'सरपंच' के प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है.

दरअसल, आयोग द्वारा जारी चुनावी कार्यक्रम के बारीक कानूनी पन्नों को पलटने पर एक ऐसी जमीनी हकीकत सामने आई है, जिसने उम्मीदवारों की नींद उड़ा दी है. तकनीकी नियमों के जाल के कारण सरपंच उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद प्रचार के लिए 24 घंटे से भी कम यानी महज कुछ घंटों का समय मिल रहा है. इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर चौपालों तक ऐतराज जताया जा रहा है.

नामांकन के बाद प्रचार के लिए कम समय
एक ओर जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों को नामांकन के बाद प्रचार के लिए काफी वक्त मिल रहा है, दूसरी ओर भावी सरपंचों के पैरों तले से जमीन खिसक रही है. नामांकन दाखिल होने और जांच के बाद अधिकृत उम्मीदवार बनने तक का सफर चंद घंटों का है. चुनाव चिन्ह शाम होते-होते मिलेंगे और मतदान अगले दिन सुबह से शुरू हो जाएगा.

ऐसे में नेताओं के चेहरों पर उदासी पसर रही है. पिछले कुछ चुनावों में सरपंचों को भी ठीक-ठाक वक्त मिल जाता था, पर अब गांवों में बिना उम्मीदवारी के गाड़ियां दौड़ाने के सिवा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है. चुनाव चिह्न क्या आवंटित होगा, उसे कैसे मतदाताओं तक पहुंचाएंगे, इसके लिए अभी से रणनीति बनना भी शुरू हो रही है.

एक तरफ कम पढ़े-लिखे ग्रामीण इस वक्त को नाकाफी मानते हैं, तो दूसरी तरफ गांव की पंचायती के कई सक्रिय चेहरे मानते हैं कि हर घर में मोबाइल है, इसलिए चुनाव चिह्न के प्रचार में ज्यादा दिक्कतें नहीं आएंगी.

सोशल मीडिया और AI का भी होगा इस्तेमाल
जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के दबदबे का है, इसलिए गांवों में भी पंचायतों के चुनाव में इसका जमकर उपयोग देखने को मिलेगा. हर घर उम्मीदवार पहुंच पाए या नहीं, बल्कि उसका संदेश हर हाल में पहुंचेगा. आखिर तकनीक के जमाने में बुजुर्ग हो या जवान, कोई भी वक्त से पीछे नहीं चलना चाहता. वक्त के साथ जो कदम मिलाकर चलेगा, वो अपने विरोधियों पर इस चुनाव में हर हाल में भारी पड़ेगा.

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