Rajasthan Nikay Chunav 2026 : जयपुर का 80% वाला रिकॉर्ड और अरनोद का 92% का कमाल! जानिए आपका शहर वोटिंग में कहां है?
Rajasthan Nikay Chunav 2026 : शहर छोटा हो या बड़ा, लोकतंत्र में असली ताकत वोट की होती है और निकाय चुनाव के पहले चरण में छोटे शहरों ने बड़े शहरों को वोटिंग में पीछे छोड़ दिया. प्रदेश में 76.41 फीसदी मतदान हुआ, लेकिन प्रतापगढ़ के अरनोद में वोटिंग का मीटर करीब 92 फीसदी तक पहुंच गया. वहीं भीलवाड़ा नगर निगम में यह आंकड़ा महज 63.84 फीसदी रहा. जयपुर ने भी मतदान में दम दिखाया. यहां चुनाव वाले सभी 18 निकायों में 80 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े और कालाडेरा 89.91 फीसदी के साथ जिले में सबसे आगे रहा.
Rajasthan Nikay Chunav 2026 : राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के अंतिम आंकड़ों ने दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है. बड़े नगर निगमों के मुकाबले छोटी नगर पालिकाओं में मतदाताओं ने ज्यादा उत्साह दिखाया. पहले चरण के आंकड़ों में छोटे निकायों में ज्यादा और बड़े नगर निगमों में अपेक्षाकृत कम मतदान का पैटर्न साफ दिखाई देता है. प्रदेश के 162 नगरीय निकायों के 5,393 वार्डों में कुल 57 लाख 52 हजार 280 मतदाता थे। इनमें 43 लाख 95 हजार 488 ने वोट डाला. यानी प्रदेश में कुल 76.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
अरनोद नगर पालिका 91.98% के साथ नंबर वन
मतदान के आंकड़ों में सबसे ऊपर प्रतापगढ़ की अरनोद नगर पालिका रही. यहां 5,190 मतदाताओं में से 4,774 ने मतदान किया और वोटिंग 91.98% तक पहुंच गई. इसके उलट बड़े शहरों में शामिल भीलवाड़ा नगर निगम में प्रदेश का सबसे कम 63.84% मतदान हुआ. यहां 2 लाख 96 हजार 682 मतदाताओं में से 1 लाख 89 हजार 390 ही बूथ तक पहुंचे। यानी प्रदेश के सर्वाधिक और न्यूनतम मतदान वाले निकाय के बीच 28.14 प्रतिशत अंक का अंतर रहा. पहले चरण में जिन बड़े नगर निगमों में मतदान हुआ, वहां छोटी नगर पालिकाओं जैसा उत्साह नहीं दिखा. भीलवाड़ा नगर निगम में 63.84%, अलवर नगर निगम में 65.75%, बीकानेर नगर निगम में 68.97% और भरतपुर नगर निगम में 73.68% मतदान दर्ज हुआ। अलवर में 2,68,292 में से 1,76,402 मतदाताओं ने वोट डाला। जबकि बीकानेर में 4,77,789 में से 3,29,533 और भरतपुर में 2,11,359 में से 1,55,724 मतदाता बूथ तक पहुंचे.
जयपुर जिले में तस्वीर प्रदेश के बड़े शहरों से एकदम अलग रही. पहले चरण में शामिल जिले की 2 नगर परिषदों और 16 नगर पालिकाओं में से एक भी निकाय ऐसा नहीं रहा, जहां मतदान 80% से नीचे गया हो. सबसे आगे कालाडेरा नगर पालिका रही, जहां 89.91% मतदान हुआ. यहां 10,674 में से 9,597 मतदाताओं ने वोट डाला. इसके बाद दूदू में 89.04%, बस्सी में 88.92%, मनोहरपुर में 88.84%, चाकसू में 88.80%, जमवारामगढ़ में 88.52%, बगरू में 88.34% और कानोता में 88.01% मतदान हुआ. जिले की दोनों नगर परिषदों में भी वोटिंग का आंकड़ा ऊंचा रहा. चौमूं नगर परिषद में 53,182 में से 46,790 मतदाताओं ने वोट डाला और मतदान 87.98% रहा. शाहपुरा में 64,106 मतदाताओं में से 55,667 ने वोट डाला, यहां 86.84% मतदान हुआ. जयपुर जिले में सबसे कम मतदान सांभर नगर पालिका में 80.66% रहा। यहां 17,733 में से 14,303 मतदाताओं ने वोट डाला. इसके बाद फुलेरा में 81.39% और किशनगढ़-रेनवाल में 83.41% मतदान रहा. यानी जिले के सबसे कम मतदान वाले निकाय ने भी प्रदेश के औसत 76.41% से बेहतर वोटिंग की.
बहरहाल,पहले चरण की वोटिंग ने एक दिलचस्प तस्वीर छोड़ी है. बड़े शहर मतदान में पीछे रहे, तो छोटे निकायों ने वोट की ताकत दिखाई. प्रदेश में मतदान का आंकड़ा 76.41 फीसदी रहा, लेकिन जयपुर के सभी 18 निकायों ने 80 फीसदी का आंकड़ा पार कर दिया. अब वोटर अपना फैसला EVM में लॉक कर चुका है. कतारों में दिखा उत्साह किसके सिर जीत का ताज सजाएगा और किसके हिस्से हार आएगीइसका पिटारा 14 सितंबर को खुलेगा.
वरिष्ठ पत्रकार मनीष गोधा से पहले चरण के मतदान प्रतिशत और क्या इसका असर दूसरे चरण पर दिख सकता है जब ये सवाल किया गया तो उन्होनें कहा कि स्थानीय चुनाव होने के कारण ये कोई बहुत ज्यादा मत प्रतिशत नहीं है, इसलिए इससे सत्ता विरोधी लहर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता. इसके अलावा, पहले चरण का दूसरे चरण पर कोई खास असर नहीं होगा, और चूंकि कई निकायों में पहली बार चुनाव हुआ है, इसलिए इसकी पिछली बार से तुलना भी नहीं की जा सकती.