राजस्थान में लोकतंत्र के लिए जुनून: कोई व्हीलचेयर, कोई एंबुलेंस में पहुंचा वोट देने, दादी बोली- आंखें ठीक करवा दो...
राजस्थान निकाय चुनाव में बुजुर्ग मतदाताओं का मतदान के प्रति जज्बा देखने को मिला. बहरोड़ में 85 वर्षीय लकवाग्रस्त बुजुर्ग एंबुलेंस से वोट डालने पहुंचे, जबकि 80 वर्षीय केशर देवी ने आंखों का इलाज कराने वाले को वोट देने की बात कही. कोटा में 87 वर्षीय महिला ने शारीरिक परेशानी के बावजूद आंसुओं के बीच मतदान किया. वहीं, धौलपुर के सरमथुरा में बुजुर्ग मतदाता लाठी और परिजनों के सहारे बूथ पहुंचे.
Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान लोकतंत्र के प्रति बुजुर्ग मतदाताओं का जज्बा देखने को मिला. बहरोड़ से लेकर कोटा और धौलपुर तक उम्र, बीमारी और शारीरिक कमजोरी भी उनके मतदान के संकल्प को नहीं रोक सकी. 85 साल के लकवाग्रस्त बुजुर्ग एंबुलेंस से बूथ पहुंचे तो 87 वर्षीय महिला ने शारीरिक तकलीफ और आंखों में आंसू के बावजूद वोट डाला. वहीं, 80 साल की केशर देवी ने अपनी आंखों का इलाज करवाने वाले प्रत्याशी को वोट देने की बात कहकर सबका ध्यान खींचा. धौलपुर में भी बुजुर्ग मतदाता लाठी और परिजनों के सहारे मतदान केंद्रों तक पहुंचे. इन तस्वीरों ने एक बार फिर संदेश दिया कि लोकतंत्र में एक-एक वोट की अहमियत होती है.
85 साल की उम्र और लकवे से जकड़ा शरीर भी नहीं रोक पाया मतदान का जज्बा
बहरोड़ नगर परिषद चुनाव में लोकतंत्र के प्रति एक बुजुर्ग मतदाता का जज्बा लोगों के लिए मिसाल बन गया. 85 वर्षीय बुजुर्ग करीब 15 साल पहले लकवे की वजह से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे, लेकिन मतदान के अधिकार और लोकतंत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास आज भी उतना ही मजबूत है. बहरोड़ के वार्ड नंबर 40 स्थित बूथ नंबर 47 पर वे एंबुलेंस से मतदान करने पहुंचे और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. हर चुनाव में एंबुलेंस के जरिए मतदान केंद्र पहुंचने वाले इस बुजुर्ग ने संदेश दिया कि हालात चाहे जैसे हों, मतदान जरूर करना चाहिए. शरीर भले ही साथ न दे रहा हो, लेकिन लोकतंत्र को मजबूत करने का उनका हौसला आज भी कायम है. उनका कहना है कि वोट सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी भी है. उनका यह जज्बा बताता है कि उम्र, बीमारी और शारीरिक मजबूरी भी मतदान के संकल्प के सामने छोटी पड़ जाती है.
80 साल की बुजर्ग महिला की अनोखी मांग, बोलीं- 'आंख ठीक करवाएगा, उसी को दूंगी वोट'
बहरोड़ की रहने वाली 80 वर्षीय केशर देवी ने अपनी अजीब गरीब मांग रखी. उन्होंने कहा कि वोट उसे दूंगी जो मेरी आंख ठीक करवाएगा. मेरी आंख खराब हो रही है लेकिन फिर भी बुजर्ग महिला अपना मत डालने आई है. इस अनोखी मांग की बहरोड़ नगरपरिषद में चर्चा बनी हुई है. अब देखना ये होगा कि इस बुजर्ग महिला की आंखें कौन सही करवा पाता है.
कोटा में 87 साल की बुजुर्ग महिला ने आंसुओं के बीच डाला वोट
कोटा के बूथ संख्या 104 से लोकतंत्र की दो बेहद प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आई हैं. पहली तस्वीर 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला की है, जो शारीरिक कमजोरी के बावजूद मतदान करने पहुंचीं. ऑटो से उतरने में उन्हें काफी परेशानी हुई और तकलीफ के कारण उनकी आंखों में आंसू भी आ गए. इसके बाद उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई और वह मतदान करने पहुंचीं. जब उनसे पूछा गया कि लोकतंत्र को मजबूत करने आई हैं तो उन्होंने उत्साह से कहा-'बिल्कुल, भारत माता की जय.' वहीं, लोकतंत्र की दूसरी तस्वीर भी बेहद भावुक करने वाली है. 88 वर्षीय एक बुजुर्ग, जो पिछले करीब 6 साल से लखवा में हैं, उन्हें भी उनके परिजन मतदान केंद्र तक लेकर आए. उन्हें होश मुश्किल से आ रहा है. परिजन उनकी ओर से मतदान की निर्धारित प्रक्रिया के तहत वोट डलवाने के लिए आवश्यक अनुमति लेकर पहुंचे हैं.
लाठी और परिजनों के सहारे बूथ पहुंचे बुजुर्ग
धौलपुर की सरमथुरा नगर पालिका चुनाव में बुजुर्ग मतदाता भी बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. लाठी के सहारे और परिजनों की मदद से बूथों पर पहुंचकर वोट डाल रहे हैं. लोकतंत्र के प्रति उनका उत्साह युवाओं के लिए प्रेरणा बना है. बुजुर्गों ने कहा, वोट देना हमारा अधिकार और कर्तव्य दोनों है.
कांस्टेबल ने दिया सहारा, दिव्यांग महिला ने डाला वोट
कोटा में मतदान के दौरान लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर सामने आई. चलने में असमर्थ दिव्यांग महिला जब मतदान केंद्र पहुंचीं तो ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल ने उन्हें सहारा देकर मतदान कक्ष तक पहुंचाया. महिला ने अपना वोट डाला और उंगली पर अमिट स्याही लगने के बाद उनके चेहरे पर खुशी और संतोष साफ नजर आया. कांस्टेबल की इस संवेदनशील पहल ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया.