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Dholpur Parvati Dam: धौलपुर जिले के सरमथुरा क्षेत्र में स्थित पार्वती बांध आंगई में लगातार बारिश के बाद पानी तेजी से बढ़ रहा है. गुरुवार सुबह 8 बजे बांध का जलस्तर 222.05 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसकी कुल भराव क्षमता 223.41 मीटर है. यानी बांध अपनी पूरी क्षमता से सिर्फ 1.36 मीटर दूर है. कैचमेंट एरिया और डांग क्षेत्र में पिछले दो दिनों से बारिश होने के कारण बांध में लगातार पानी आ रहा है. ऐसे में जल संसाधन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और अगर पानी की आवक इसी तरह जारी रही तो देर शाम या शुक्रवार सुबह 2 से 4 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा सकता है. बांध के गेट खुलने पर पार्वती नदी से जुड़े निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.
हर घंटे बढ़ रहा जलस्तर, बांध पर विभाग की नजर
सरमथुरा क्षेत्र में पिछले 48 घंटे से रुक-रुककर बारिश हो रही है. इसका सीधा असर पार्वती बांध आंगई पर दिखाई दे रहा है. कैचमेंट एरिया से लगातार पानी बांध में पहुंच रहा है और जलस्तर हर घंटे बढ़ रहा है. गुरुवार सुबह 8 बजे गेज 222.05 मीटर तक पहुंच चुका था. बांध की अधिकतम क्षमता 223.41 मीटर है. ऐसे में अब केवल 1.36 मीटर की जगह बाकी है.
जल संसाधन विभाग की टीम बांध पर तैनात है और हर घंटे पानी के स्तर की निगरानी कर रही है. अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर बारिश और पानी की आवक लगातार बनी रहती है तो बांध को सुरक्षित स्तर पर रखने के लिए पानी की निकासी करनी पड़ सकती है. इसी वजह से आसपास के इलाकों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
गेट क्यों खोले जाते हैं?
बांध में पानी उसकी तय क्षमता के करीब पहुंचने पर गेट खोलकर अतिरिक्त पानी बाहर निकाला जाता है. इसका मकसद बांध पर पानी का दबाव ज्यादा बढ़ने से रोकना होता है. इस दौरान पानी नदी के रास्ते आगे बढ़ता है और उसका असर नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में देखने को मिल सकता है.
अधिकारियों के मुताबिक अगर पानी की आवक इसी रफ्तार से जारी रही तो पार्वती बांध के 2 से 4 गेट खोले जा सकते हैं. हालांकि कितने गेट खोले जाएंगे और कितनी मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा, यह उस समय बांध के जलस्तर और पानी की आवक को देखकर तय किया जाएगा.
पिछले साल भी कई बार खोलने पड़े थे गेट
पार्वती बांध के लिए ऐसी स्थिति नई नहीं है. मानसून 2025 में भी कैचमेंट एरिया और डांग क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण बांध का जलस्तर कई बार तेजी से बढ़ा था. उस दौरान जल संसाधन विभाग को 7 से ज्यादा बार गेट खोलकर पानी की निकासी करनी पड़ी थी.
पिछले साल 16 जुलाई को 2 गेट खोले गए थे. इसके बाद 18 जुलाई को 5 गेट और 19 जुलाई को 8 से 10 गेट खोलकर पानी छोड़ा गया था. 26 और 27 जुलाई को भी 8 गेट खोले गए. 31 जुलाई को 4 गेट से पानी निकाला गया. अगस्त में 4 अगस्त और 31 अगस्त को 4-4 गेट खोले गए थे. मानसून के आखिरी दौर में 4 अक्टूबर को भी जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए 2 गेट 2-2 फीट तक खोले गए थे.
गेट खुलने पर इन इलाकों में बढ़ सकती है परेशानी
पार्वती बांध से पानी छोड़े जाने का सबसे ज्यादा असर पार्वती नदी के किनारे और आसपास के निचले क्षेत्रों में पड़ता है. बसेड़ी, सैंपऊ, बाड़ी, धौलपुर ग्रामीण और राजाखेड़ा उपखंड के कई गांवों में पानी बढ़ने से परेशानी हो सकती है.
नदी का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में पानी भर सकता है. निचले स्थानों पर बने कच्चे मकानों में भी पानी पहुंचने का खतरा रहता है. ऐसे में लोगों को नदी के किनारे जाने से बचना चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए. खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को नदी या पानी से भरे इलाकों से दूर रखना जरूरी है.
पुल और रपट पर भी बढ़ेगा पानी, थम सकता है आवागमन
बांध से पानी छोड़े जाने के बाद सिर्फ गांवों में ही नहीं, बल्कि सड़क यातायात पर भी असर पड़ सकता है. बाड़ी-सैंपऊ और बसेड़ी मार्ग पर बने पुराने पुल और रपट पानी की चपेट में आ सकते हैं. सैंपऊ के पुराने पुल पर कई फीट तक पानी की चादर चलने की स्थिति बन सकती है.
ऐसे हालात में इन रास्तों से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. पानी सड़क के ऊपर बह रहा हो तो वाहन लेकर उसे पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. पानी की गहराई का अंदाजा बाहर से नहीं लगाया जा सकता. जरूरत पड़ने पर प्रशासन को ऐसे रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोकना चाहिए और लोगों को दूसरे सुरक्षित रास्तों से भेजना चाहिए.
पानी बढ़े तो गांवों में क्या करना जरूरी?
अगर बांध से पानी छोड़े जाने की सूचना मिलती है तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे पहले सुरक्षित स्थान की जानकारी रखनी चाहिए. घर के जरूरी सामान, दवाइयां, मोबाइल, चार्जर, जरूरी कागजात और कुछ खाने-पीने की चीजें सुरक्षित जगह पर रखनी चाहिए. बिजली के उपकरणों को पानी से दूर रखना जरूरी है. घर के आसपास पानी भरने लगे तो बिजली के तार या खंभे के पास नहीं जाना चाहिए.
प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच सूचना का सही और तेज पहुंचना भी जरूरी है. गांवों में लाउडस्पीकर, मोबाइल मैसेज और स्थानीय स्तर पर सूचना देकर लोगों को पहले से तैयार किया जा सकता है. अगर किसी रास्ते पर पानी तेज बह रहा है तो वहां जाने के बजाय प्रशासन की ओर से बताए गए सुरक्षित रास्ते का इस्तेमाल करना चाहिए.
बांध का भरना किसानों और आमजन के लिए राहत भी
पार्वती बांध में पानी बढ़ना सिर्फ खतरे की वजह नहीं है. इसका एक बड़ा फायदा भी है. बांध क्षेत्र में अच्छी बारिश और पर्याप्त पानी होने से किसानों को राहत मिलती है. इसके अलावा पार्वती बांध सरमथुरा उपखंड मुख्यालय सहित सैकड़ों गांवों की पेयजल व्यवस्था के लिए भी अहम है.
यानी बांध का भरना आने वाले समय के लिए पानी की जरूरत पूरी करने में मदद करता है. हालांकि जब बांध अपनी क्षमता के करीब पहुंचता है तो अतिरिक्त पानी की सुरक्षित निकासी भी उतनी ही जरूरी हो जाती है. फिलहाल विभाग की नजर जलस्तर और कैचमेंट से आने वाले पानी पर बनी हुई है. अगर पानी की आवक कम नहीं हुई तो गेट खोलने का फैसला लिया जा सकता है. ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने, प्रशासन की सूचना पर ध्यान देने और पानी वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है.
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