बारां जिले के छबड़ा में डीएपी खाद की किल्लत को लेकर किसानों का आक्रोश दूसरे दिन भी जारी रहा. खाद नहीं मिलने से नाराज किसानों ने गुरुवार को स्टेट हाईवे-51 पर हंगामा करते हुए चक्काजाम किया था. इसके बाद किसान नेता नरेश मीणा किसानों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए. धरने के दौरान 1,050 डीएपी टोकन बांटे गए, लेकिन अन्य किसानों को खाद दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहा.
1050 टोकन मिलने के बाद भी क्यों जारी रहा धरना?
गुरुवार को धरने के दौरान किसानों को डीएपी खाद के 1,050 टोकन दिए गए थे. इसके बावजूद कई अन्य किसानों को खाद दिलाने की मांग उठ रही थी. इसी मांग को लेकर नरेश मीणा ने किसानों के साथ खेल मैदान में ही डेरा डाल लिया. उन्होंने किसानों के साथ खुले आसमान के नीचे पेड़ के नीचे रात बिताई.
इस घटनाक्रम के बीच किसानों की मांग थी कि खाद की जरूरत वाले अन्य किसानों को भी डीएपी उपलब्ध कराया जाए. इसी वजह से टोकन वितरण के बाद भी धरना खत्म नहीं हुआ.
शुक्रवार सुबह प्रशासन ने बांटे 900 टोकन
किसानों के धरने के बाद शुक्रवार सुबह प्रशासन हरकत में आया. खेल मैदान में पुलिस और कृषि विभाग की निगरानी में 900 किसानों को डीएपी खाद के टोकन वितरित किए गए. इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक किसान को दो कट्टे खाद मिलेंगे.
इस तरह शुक्रवार सुबह हुए वितरण में 900 किसानों को टोकन दिए गए. किसानों को अब इन टोकन के आधार पर निर्धारित स्थानों से खाद प्राप्त करनी होगी.
निजी दुकानों और सहकारी समिति से मिलेगी खाद
सहायक कृषि अधिकारी चौथमल मीणा के अनुसार, किसान टोकन के आधार पर निर्धारित निजी दुकानों और छबड़ा क्रय-विक्रय सहकारी समिति से डीएपी खाद प्राप्त कर सकेंगे. प्रशासन की ओर से अगले दो दिनों में अतिरिक्त खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है.
किसानों को खाद मिलने का इंतजार
छबड़ा में खाद की किल्लत को लेकर शुरू हुआ विरोध सड़क पर चक्काजाम से लेकर एसडीएम कार्यालय के धरने और खेल मैदान में रात बिताने तक पहुंच गया. 1,050 टोकन वितरण के बाद भी अन्य किसानों को खाद दिलाने की मांग पर नरेश मीणा और किसान मैदान में डटे रहे.
शुक्रवार को 900 और किसानों को टोकन दिए जाने के बाद अब किसानों को खाद मिलने का इंतजार है. प्रशासन ने अगले दो दिनों में अतिरिक्त खाद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि टोकन मिलने के बाद किसानों को खाद कितनी जल्दी मिल पाती है और अतिरिक्त आपूर्ति से खाद की किल्लत दूर करने में कितनी मदद मिलती है.