प्रदेश की राजनीति इन दिनों पंचायतीराज चुनाव के रंग में रंगी हुई है. चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमाने के कई दिग्गज नेताओ ने मैदान में ताल ठोकी है.
कुछ ऐसा ही मामला गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र के सायरा पंचायत समिति में भी देखने को मिल रहा है, जहां प्रदेश की विधानसभा में मंत्री रह चुके मांगीलाल गरासिया सायरा पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतरे है, जिससे यहां का चुनाव ओर भी रोचक हो गया है.
पूर्व राज्यमंत्री मांगीलाल गरासिया ने पंचायत चुनाव में ठोकी ताल
पंचायतीराज चुनाव को सक्रिय राजनीति की पहली सीढ़ी माना जाता है लेकिन कई बार राजनीतिक समीकरण कुछ इस तरह से बदल जाते है कि दिग्गज नेताओं को धरातल पर अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए पंचायतीराज के चुनावी मैदान में उतरना पड़ता है. कुछ ऐसा ही सायर पंचायत समिति के चुनाव में भी देखने को मिल रहा है, जहां भी प्रदेश की कांग्रेस सरकार में राज्यमंत्री रहे मांगीलाल गरासिया सायरा पंचातय समिति के वार्ड 9 से चुनावी मैदान में उतरे हुए हैं.
तीन विधानसभा चुनावों में हार के बाद प्रधान पद पर नजर
मांगीलाल गरासिया को पिछले तीन विधनसभा चुनावो में हार का सामना करना पड़ा है. ऐसे में अपने राजनीतिक जीवन को लम्बा करने और आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी को बनाए रखने के लिए उन्होंने पंचायत चुनाव का रुख किया है. सायरा पंचातय समिति एसटी वर्ग के लिए रिजर्व है. ऐसे में इस चुनाव में उनकी नजर प्रधान की कुर्सी पर है, जिस पर बैठकर वे अपनी जमीनी पकड़ को ओर मजबूत करना चाहते हैं.
जनता की मांग और पार्टी के आदेश पर लड़ रहे चुनाव
प्रदेश के सत्ता की गलियारों में कभी सक्रिय रहे मांगीलाल गरासिया अब पंचायत चुनाव के मैदान में है, जो उनके राजनीतिक सफर में अब एक नया मोड़ लेकर आएगा. लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद अब उन्होंने पंचायत समिति सदस्य के चुनावी मैदान ताल ठोकी है. गरासिया की नजर प्रधान की कुर्सी के अपनी दावेदारी को मजबूत करने की है लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे जनता की मांग और पार्टी के आदेश पर चुनाव लड़ रहे हैं.
पंचायत चुनाव तय करेगा आगे की सियासत की दिशा
लगातार तीन विधानसभा चुनवा में हार का सामना करने के बाद पूर्व मंत्री मांगीलाल गरासिया अब सायरा पंचायत समिति सदस्य के पड़ के लिए चुनावी मैदान में उतरे है. यह चुनाव परिणाम उनके आगे के राजनीतिक जीवन की दिशा को तय करेगा. देखना यह दिलचस्प होगा कि तीन विधानसभा चुनवा हारने वाले गरासिया पंचातय समिति के चुनाव में जनता की कितना अपने पक्ष में कर पाते है.