पीएम मोदी को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे की घृणा नई बात नहीं है. पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों की बात करें तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अपने ही दल के मणिशंकर अय्यर से स्पर्धा करते दिखते हैं. मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. पार्टी की बात को मुखरता से रखते हैं. राज्यसभा में वे नेता विपक्ष की हैसियत रखते हैं, लेकिन पीएम मोदी को लेकर जब उनकी जुबान खुलती है तो विवाद होना निश्चित हो जाता है. खुद संवैधानिक पद पर होते हुए दूसरे संवैधानिक पद को लेकर इस तरह की घृणा का भारत के लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है. जनता भी ऐसे बयानों को शायद ही पसंद करती होगी. जनता को ये सब पसंद आता, तो मणिशंकर अय्यर और मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों से ही कांग्रेस बहुमत पा लेती. राहुल गांधी को अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत ही नहीं होती.
मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के बड़े दलित नेताओं में गिने जाते हैं. दलितों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ही कांग्रेस ने उन्हें अपना शीर्ष पद दिया है. खरगे यह अच्छी तरह जानते हैं कि पीएम मोदी या भाजपा का कोई भी नेता उनकी गाली का जवाब गाली से नहीं दे सकता, क्योंकि ऐसा करने पर SC-ST एक्ट लगने का खतरा रहेगा. इसलिए खरगे बिंदास बोल बोलते हैं. कुछ भी बोलते हैं. उन्होंने पीएम मोदी को क्या कुछ नहीं कहा है, लेकिन पीएम मोदी या भाजपा के किसी भी बड़े पदाधिकारी यहां तक कि प्रवक्ताओं ने भी खरगे को निशाना नहीं बनाया. खरगे के बहाने भाजपाई गांधी परिवार को निशाने पर लेते रहते हैं.
मल्लिकार्जुन खरगे एक जिम्मेदार पद पर हैं. देश की सबसे पुरानी पार्टी के मुखिया हैं और राज्यसभा में नेता विपक्ष भी. पार्टी के कार्यकर्ता कुछ भी बोलें, लेकिन संवैधानिक पद पर बैठक व्यक्ति इस तरह की स्तरहीन बातें कैसे कर सकता है. इसमें कोई दोराय नहीं कि पिछले कुछ सालों में राजनेताओं के बीच भाषा की मर्यादा टूटी है और इसमें पक्ष-विपक्ष के नेता भी शामिल हैं, लेकिन जो लोग संवैधानिक पद पर बैठे हैं, कम से कम उन्हें तो इस बात का ख्याल रखना चाहिए. सत्ता से दूर होने के फ्रस्ट्रेशन में अगर आप पीएम मोदी को गाली दे रहे हैं या उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह जान लीजिए कि वह व्यक्ति गाली का नाश्ता करता है और इससे आप सत्ता में वापसी नहीं कर सकते. देश की जनता अपने सर्वोच्च शक्तिशाली पद पर किसी गालीबाज को नहीं बैठा सकती. इतने बड़े नेता होकर भी किसी को अगर यह समझ में नहीं आती कि अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करके भी सामने वाले पर हमले किए जा सकते हैं तो फिर क्या ही कहा जाए.