चौमूं क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों को नए सरपंच मिल गए हैं. पंचायत चुनाव में विभिन्न ग्राम पंचायतों से निर्वाचित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर गांव की सरकार की कमान संभाली है. अमरपुरा से गीता देवी सरपंच निर्वाचित हुईं, वहीं, अनन्तपुरा (जै.) से वासुदेव पांचोली ने जीत हासिल की. बड़कीलाई-भोजलावा से रमेश और बरवाड़ा से बनवारी राईका ने सरपंच पद पर जीत दर्ज की.
इन ग्राम पंचायतों में भी चुने गए नए सरपंच
भोपावास से बादामी योगी, बिशनपुरा चारणवास से बिमला और चीथवाड़ी से बिमला देवी सरपंच निर्वाचित हुईं. दौलतपुरा से संतरा देवी ने जीत दर्ज की, वहीं, देवपुरा से कविता कंवर और डोला का बास से किरण कुमारी मीना ने सरपंच पद हासिल किया. फतेहपुरा से संज्या देवी और गौरी का बास से रामस्वरूप निर्वाचित हुए. घिनोई से भगवती देवी तथा हाड़ौता से वन्दना देवी ने जीत दर्ज की.
हाथनोदा से राजू जाट, ईंटावा भोपजी से अजय चौधरी और जयसिंहपुरा से मुरलीधर यादव सरपंच चुने गए. जैतपुरा से सुमित्रा देवी गुलिया, जालिम सिंह का बास से विजयपाल यादव और जाटावाली से बंशीधर मीणा ने भी जीत हासिल की.
बाकी ग्राम पंचायतों के विजेता
कानपुरा से फूल चन्द, कुशलपुरा से लक्ष्मी देवी और लोहरवाड़ा से लाडो देवी सरपंच निर्वाचित हुईं. महार कलां से योगेश, मण्डा भिण्डा से कृष्ण कान्त और मोरीज़ा से सीता देवी ने जीत दर्ज की. नांगल भरड़ा से गोपाल तथा नृसिंहपुरा से उर्मिला देवी सरपंच बनीं. निवाणा से गिरधारी और सामोद से रामकिशोर रेगर ने जीत हासिल की.
वहीं, टांकरड़ा से योगेश कुमार, उदयपुरिया से बीना देवी, बिज्जसिंहपुरा से शंकरलाल और विमलपुरा से उर्मिला देवी सरपंच निर्वाचित हुईं. इन परिणामों के साथ चौमूं क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में नए नेतृत्व का चयन हुआ है. अब ग्रामीणों को नए सरपंचों से स्थानीय समस्याओं के समाधान और गांवों के विकास की उम्मीद रहेगी.
गांव की सरकार चुनने उमड़े मतदाता
गांव की सरकार चुनने के लिए इस बार मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. वोटिंग के मामले में मतदाताओं ने पिछले रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए. दो दिन पहले ईवीएम के जरिए जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों का चुनाव करने वाले मतदाताओं ने शनिवार को बैलेट पेपर से गांव का मुखिया चुना. सरपंच चुनाव में मतदान प्रतिशत में 18.27 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
मतदान का उत्साह सुबह से ही नजर आने लगा था. वोटिंग शुरू होने से पहले ही पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की कतारें लग गईं. शाम को मतदान का निर्धारित समय खत्म होने के बाद भी कई जगह मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते रहे. कहीं बुजुर्ग लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचे, तो कहीं महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने आईं. आखिरी वोट तक प्रत्याशियों ने भी पूरी ताकत झोंक दी. गांव की सरकार के चुनाव में उत्साह, भागीदारी और मुकाबले के ऐसे ही कई रंग देखने को मिले.
गांव की सत्ता का संग्राम हुआ खास
गांव का मुखिया चुनने के लिए मतदाताओं में खासा उत्साह दिखाई दिया. जयपुर की 212 ग्राम पंचायतों में शनिवार को मतदान के दौरान ऐसा ही नजारा देखने को मिला. मतदान शुरू होने से पहले ही पोलिंग बूथों के बाहर कतारें लग गईं और लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए.
किसी को वोट डालने के बाद खेत पर जाना था, तो किसी को दुकान खोलनी थी. कई लोगों को घर के काम भी निपटाने थे. इसके बावजूद मतदान केंद्रों पर सबसे पहले पहुंचकर वोट डालने की होड़ दिखाई दी. मतदाताओं ने अपने रोजमर्रा के कामों से पहले मतदान को प्राथमिकता दी और गांव का मुखिया चुनने में भागीदारी निभाई.