गांव की सरकार चुनने के लिए इस बार मतदाताओं ने सारे रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए. दो दिन पहले ईवीएम से जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों को चुनने वाले मतदाताओं ने शनिवार को बैलेट पेपर से गांव का मुखिया चुना. सरपंच चुनाव में मतदान का उत्साह ऐसा रहा कि वोटिंग प्रतिशत में 18.27 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सुबह मतदान शुरू होने से पहले ही पोलिंग बूथों पर कतारें लग गईं, तो शाम को मतदान का समय खत्म होने के बाद भी मतदाता अपनी बारी का इंतजार करते रहे. कहीं बुजुर्ग लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचे, तो कहीं महिलाएं चूल्हा-चौका छोड़कर वोट डालने आईं. आखिरी वोट तक प्रत्याशियों ने पूरा जोर लगाया. देखिए, गांव की सरकार के चुनाव के अलग-अलग रंगों पर यह खास रिपोर्ट.
गांव की सत्ता का संग्राम, वोट डालने के लिए उमड़े मतदाता
गांव का मुखिया चुनने के लिए मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. जयपुर की 212 ग्राम पंचायतों में शनिवार को कुछ ऐसा ही नजारा रहा. मतदान शुरू होने से पहले ही पोलिंग बूथों पर कतारें लग गईं. किसी को खेत पर जाना था, किसी को दुकान खोलनी थी, तो किसी को घर का काम संभालना था. इसके बावजूद सबसे पहले वोट डालने की होड़ नजर आई. शाम 6 बजे मतदान का निर्धारित समय खत्म हो गया, लेकिन कई मतदान केंद्रों पर कतारें नहीं टूटीं. जो मतदाता समय रहते मतदान केंद्र पहुंच गए थे, उन्होंने अपना वोट डालकर ही दम लिया.
दो दिन में बदले मतदान के आंकड़े, 18.27 प्रतिशत अंकों का उछाल
दो दिन के अंतराल में चुनाव का तरीका बदला, लेकिन मतदाताओं का उत्साह सरपंच चुनाव में कहीं ज्यादा नजर आया. 22 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव में 68.29 प्रतिशत मतदान हुआ था. वहीं, 24 अक्टूबर को सरपंच चुनाव में मतदान का आंकड़ा बढ़कर 86.56 प्रतिशत पहुंच गया.

इस तरह मतदान प्रतिशत में 18.27 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई. जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में 5 लाख 7 हजार 796 मतदाताओं ने वोट डाले थे. वहीं, सरपंच चुनाव में 6 लाख 43 हजार 710 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. यानी गांव का मुखिया चुनने के लिए 1 लाख 35 हजार 914 अधिक मतदाता घरों से निकले.
बुजुर्गों से लेकर पहली बार वोट देने वालों तक दिखा उत्साह
गांव की सरकार चुनने का जुनून ऐसा रहा कि उम्र और शारीरिक परेशानियां भी मतदाताओं के कदम नहीं रोक सकीं. बुजुर्ग लाठी के सहारे मतदान केंद्र पहुंचे, तो कुछ मतदाताओं को उनके परिजन व्हीलचेयर पर लेकर आए. पहली बार मतदान करने वाले युवाओं में भी वोट डालने के बाद उत्साह नजर आया.
महिलाओं ने भी मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. कई महिलाएं घूंघट में कतारों में खड़ी नजर आईं. वे घर का काम छोड़कर सबसे पहले वोट डालने पहुंचीं. महिलाओं का कहना था कि गांव में नल तो हैं, लेकिन पानी नहीं आता. सड़क, शिक्षा और इलाज के लिए आज भी शहर की तरफ देखना पड़ता है. इसके बावजूद गांव की तस्वीर बदलने की उम्मीद में वोट डालना जरूरी है.
एक-एक वोट के लिए प्रत्याशियों ने झोंकी पूरी ताकत
सरपंच की कुर्सी के लिए एक-एक वोट की अहमियत थी. यही वजह रही कि प्रत्याशियों ने आखिरी वक्त तक पूरा जोर लगाया. कोई घर-घर जाकर मतदाताओं को बुलाता नजर आया, तो कोई बुजुर्गों को सहारा देकर मतदान केंद्र तक पहुंचाता दिखा.
मतदान केंद्रों के बाहर चुनाव चिह्नों के साथ प्रचार की तस्वीरें भी सामने आईं. कहीं केतली, कहीं कटहल तो कहीं दूसरे चुनाव चिह्न लेकर प्रत्याशी और उनके समर्थक नजर आए. इस दौरान कुछ जगह फर्जी मतदान को लेकर शिकायतें और विवाद सामने आने की खबरें भी आईं.

आठों पंचायत समितियों में बढ़ा मतदान प्रतिशत
जयपुर जिले की सभी आठ पंचायत समितियों में सरपंच चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के मुकाबले ज्यादा रहा.
मतदान के तीन दिलचस्प आंकड़े
1. सांभर में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
सांभर पंचायत समिति में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के दौरान 65.45 प्रतिशत मतदान हुआ था. सरपंच चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर 87.18 प्रतिशत पहुंच गया. यहां मतदान में 21.73 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो आठों पंचायत समितियों में सबसे ज्यादा रही.
2. झोटवाड़ा दोनों चुनावों में आगे
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव में झोटवाड़ा 73.65 प्रतिशत मतदान के साथ पहले स्थान पर था. सरपंच चुनाव में भी यहां सबसे ज्यादा 89.70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. यानी करीब हर 10 में से 9 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.
3. किशनगढ़ रेनवाल में सबसे कम मतदान, फिर भी बड़ा उछाल
दोनों चुनावों में किशनगढ़ रेनवाल का मतदान प्रतिशत आठों पंचायत समितियों में सबसे कम रहा. हालांकि, यहां भी सरपंच चुनाव में मतदान 62.87 प्रतिशत से बढ़कर 81.53 प्रतिशत पहुंच गया. इस तरह यहां 18.66 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई.
अब गांव की उम्मीदों पर खरा उतरने की बारी
ईवीएम का बटन दबाने से लेकर बैलेट पेपर पर मुहर लगाने तक, गांव के मतदाताओं ने बता दिया कि लोकतंत्र की असली ताकत वोट है. महज दो दिन के अंतराल में मतदान का आंकड़ा 68.29 प्रतिशत से बढ़कर 86.56 प्रतिशत पहुंच गया.
मतदाताओं ने गांव का मुखिया चुनने के लिए पूरे उत्साह के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई. अब सवाल यह है कि जीत का सेहरा पहनने वाले सरपंच गांव की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं. सड़क, पानी, शिक्षा और इलाज जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर ग्रामीणों की अपेक्षाएं अब चुने गए प्रतिनिधियों से जुड़ी हैं. गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान का उत्साह तो बंपर रहा, अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई पंचायतें लोगों की उम्मीदों को कितना पूरा कर पाती हैं.