कोटपूतली सरूंड माता मंदिर का रहस्य: 282 सीढ़ियों की चढ़ाई, 7 द्वार और पांडवों से जुड़ी मान्यता, पढ़ें पूरी कहानी
कोटपूतली के सरूंड गांव में अरावली की पहाड़ियों पर स्थित श्री सरूंड माता मंदिर, चिलाय माता धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है. मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 282 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और रास्ते में बने सात द्वार इसकी खास पहचान हैं. लोकमान्यता के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां माता की प्रतिमा स्थापित की थी.
कोटपूतली अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित श्री सरूंड माता मंदिर आस्था, लोकपरंपरा और धार्मिक विश्वास का ऐसा केंद्र है, जहां पहुंचने का रास्ता ही श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण का प्रतीक बन जाता है. सरूंड गांव में स्थित यह मंदिर चिलाय माता धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है. पहाड़ी पर विराजमान माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 282 सीढ़ियों का रास्ता तय करना पड़ता है. रास्ते में बने सात द्वार मंदिर की विशेष पहचान हैं. नवरात्र के दौरान यहां विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है और भक्त माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
पांडवों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
सरूंड माता मंदिर का इतिहास स्थानीय लोककथाओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है. प्रचलित लोकमान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहां माता की प्रतिमा स्थापित की थी. इसी मान्यता के चलते मंदिर का संबंध महाभारत काल से भी बताया जाता है. हालांकि, मंदिर की स्थापना के समय की पुष्टि करने वाले प्रमाणिक ऐतिहासिक साक्ष्य स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में पांडवों से जुड़ी इस कथा को स्थानीय धार्मिक परंपरा और लोकविश्वास के रूप में देखा जाता है.
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कुलदेवी के रूप में होती है पूजा
सरूंड माता को अनेक श्रद्धालु अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं. क्षेत्र में माता के प्रति गहरी आस्था पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं में दिखाई देती है. भक्त माता के दरबार में दर्शन करने के साथ अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. परिवारों के धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर भी माता के दर्शन का महत्व माना जाता है. मंदिर से जुड़ी मान्यताएं स्थानीय समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं.
282 सीढ़ियों का रास्ता, सात द्वार हैं खास पहचान
पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 282 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. यह यात्रा भक्तों के लिए केवल मंदिर तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण से जुड़ा अनुभव भी है. मार्ग में बने सात द्वार इस धाम की विशिष्ट पहचान को और खास बनाते हैं. पहाड़ी का प्राकृतिक परिवेश और मंदिर का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. माता के दर्शन की अभिलाषा में भक्त सीढ़ियां चढ़कर दरबार तक पहुंचते हैं.
नवरात्र में रहता है विशेष धार्मिक उत्साह
नवरात्र के दौरान सरूंड माता मंदिर में विशेष आस्था और भक्ति का माहौल रहता है. माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु धाम पहुंचते हैं. देवी आराधना के इस पर्व पर मंदिर की धार्मिक महत्ता और अधिक प्रमुखता से सामने आती है. हालांकि, नवरात्र में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या के प्रमाणित आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यह अवसर मंदिर से जुड़ी आस्था और लोकपरंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है.
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आस्था के साथ विरासत का भी प्रतीक
सरूंड माता मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है. पांडवों से जुड़ी लोकमान्यता, कुलदेवी के रूप में माता की पूजा, 282 सीढ़ियों का मार्ग और सात द्वार इस धाम को विशिष्ट पहचान देते हैं. अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और लोकपरंपराओं की उस विरासत को दर्शाता है, जो आज भी श्रद्धालुओं को माता के दरबार से जोड़े हुए है.
Report- Amit Yadav