राजस्थान का रहस्यमयी शक्तिपीठ: इस मंदिर की जगह पर गिरी थीं मां सती के पैर की 4 अंगुलियां!
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के विराटनगर के पास पापड़ी गांव की पहाड़ी पर अंबिका पीठ आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यहां मां सती के दाएं पैर की चार अंगुलियां गिरी थीं, इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है.
Kotputli-Behror News: राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 90 किलोमीटर दूर और कोटपूतली जिले से 50 किलोमीटर दूर बैराठ में जिस अब विराटनगर के नाम से जाना और पहचाना जाता है. प्राचीन काल में मत्स्य देश की राजधानी रही. इस जगह का वर्णन शिव पुराण, महाभारत सहित कई धर्मग्रंथों में मिलता है. यह प्राचीन महत्व का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल रहा है.
विराटनगर कस्बा महाभारत काल में पाण्डवों के अज्ञातवास का साक्षी रहा है. इसी के पास ग्राम पंचायत सोठाना के गांव पापड़ी की छोटी पहाड़ी के शिखर पर स्थित हैं अंबिका पीठ, जो लोगों की आगाध श्रद्धा का केन्द्र है. यह 51 शक्ति पीठों में से 41वां शक्ति पीठ है.
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दायें पैर की गिरी चार अंगुलियां
कहा जाता है कि यहां मां सती के दायें पैर की चार अंगुलियां गिरी थी, जिससे इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई थी. यहां माता सती अंबिका के रूप में और भगवान शिव अमृत भैरव के रूप में पूजे जाते हैं. जानकार बताते हैं कि प्राचीन मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गया था और वर्तमान में प्राचीन पत्थरों से बनी दीवारे ही इसका प्राचीन होना प्रदर्शित करती हैं.
ऊंचे चबूतरे पर है मंदिर
वर्तमान में एक ऊंचे चबूतरे पर मुख्य मंदिर हैं, जिसमें एक छोटा चौकोर तीन ओर से खुला मंडप है. मंडप के बीच में एक छोटा यज्ञ कुंड है और ठीक सामने एक छोटा चौकोर गर्भगृह है, जिसके अंदर एक वेदी पर देवी मां की धवल संगमरमर से निर्मित नवीन विग्रह विराजित हैं. आज मंदिर मनसा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है. जानकारों ने बताया कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने माता से मनसा जाहिर की, जिसकी प्रार्थना कर मन्नत मांगी थी. पांडवों की मनसा पूरी होने पर पांडवों ने माता के मंदिर का नाम मनसा माता मंदिर रखा गया.
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तभी बताया जाता हैं कि कुछ दिनों बाद माता रानी की प्रतिमा चोरी होने के बाद यहां दूसरी प्रतिमा की विधि-विधान के साथ प्राण-प्रतिष्ठा की गई. कुछ किदवंतिया जिसमें बताते हैं कि जब भी कोई संकट आता था तो माता रानी मुहं से बोलकर कस्बे के लोगों को सचेत करती थी. मातारानी का गर्भगृह सज्जा रहित साधारण हैं और इसमें कुछ देवी-देवताओं का चित्रण हैं. गर्भगृह का आकार गोलाकार ध्वजयुक्त हैं. गर्भगृह के बाहर एक दीवार पर शक्तिपीठों के निर्माण बाबत कथा अंकित हैं.
गांव का नाम ऐसे पड़ा पापड़ी
शक्तिपीठ के दीवारों पर अंकित लेख में एक अत्यधिक रोचक तथ्य भी सामने आया, जिसमें इस गांव का नाम प्राचीन समय में 'पांव-पड़ी' (देवी के पांव पड़े थे) जो वर्तमान में 'पापड़ी' हो गया है. गर्भगृह के चारों ओर खुला परिक्रमा स्थल हैं और इसके बांयी ओर एक खुले स्थल पर भैरव अमृत का एक छोटा मंदिर हैं, जहां अब नवरात्र में सुबह शाम कस्बे सहित दूर दराज से भक्त दर्शन करने आते है और मां के चरणों मे अपनी धोक लगाकर मन्नत मांगते हैं.
Report- Amit Yadav