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कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील में 1 करोड़ की गड़बड़ी! कहीं उधार का राशन, कहीं भूखे पेट की नौबत

कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील के लिए आवंटित गेहूं और चावल की सप्लाई में करीब एक करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है. जांच में 3,213 क्विंटल खाद्यान्न का अंतर मिला, जिसमें 1,844 क्विंटल गेहूं और 1,369 क्विंटल चावल शामिल हैं. इसका असर बच्चों के पोषाहार पर पड़ रहा है.

कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे-मील में 1 करोड़ की गड़बड़ी! कहीं उधार का राशन, कहीं भूखे पेट की नौबत
Image Credit: बच्चों की थाली पर संकट!

कोटा में सरकारी स्कूलों के बच्चों के मिड-डे-मील के लिए आवंटित गेहूं और चावल में करीब एक करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आने के बाद अब इसकी जमीनी हकीकत भी सामने आ रही है. सरकारी गोदाम से उठाया गया 3,213 क्विंटल खाद्यान्न स्कूलों तक नहीं पहुंचा. इसका असर बच्चों के पोषाहार पर पड़ रहा है. कहीं दूसरे स्कूल से गेहूं-चावल मंगाकर भोजन बनाना पड़ रहा है, तो कहीं भामाशाहों, व्यापारियों और शिक्षकों की मदद से बच्चों की थाली सजाई जा रही है.

ज़ी मीडिया की टीम ने कोटा शहर के तीन सरकारी स्कूलों में पहुंचकर मिड-डे-मील की व्यवस्था का जायजा लिया. इन स्कूलों में सामने आया कि जहां बच्चों की संख्या कम है, वहां सीमित संसाधनों के बीच व्यवस्था चल रही है, लेकिन जिन स्कूलों में रोजाना 350 से 450 बच्चों का भोजन बनता है, वहां खाद्यान्न की कमी बड़ी चुनौती बन रही है. कई बार बच्चों को कम पोषाहार देकर काम चलाना पड़ा, तो कहीं दूसरे स्कूलों से राशन मंगवाना पड़ा.

गुजरात के हिम्मतनगर की मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज पर खाद्यान्न की सप्लाई में गड़बड़ी का आरोप है. मामले में रसद विभाग की शिकायत पर नयापुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. कलेक्टर पीयूष समारिया ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है, जो खाद्यान्न के आवंटन, उठाव और स्कूलों तक हुई सप्लाई का मिलान कर रिपोर्ट देगी. प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है.

केस स्टडी-1: सूरजपोल स्कूल में गेहूं-चावल खत्म, दूसरे स्कूल से मंगाना पड़ा राशन
कोटा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सूरजपोल में मिड-डे-मील के लिए गेहूं और चावल की कमी के चलते स्कूल प्रबंधन को दूसरे स्कूल से राशन मंगवाना पड़ा. यहां सितंबर से ही खाद्यान्न की किल्लत बनी हुई थी. स्थिति ऐसी हो गई कि गेहूं और चावल दोनों खत्म हो गए और बच्चों के भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए दूसरे स्कूल की मदद लेनी पड़ी.

स्कूल की प्रिंसिपल उर्मिला के मुताबिक, खाद्यान्न की कमी के कारण बीच में दूसरे स्कूल से राशन लेकर व्यवस्था चलानी पड़ी. अब 24 अक्टूबर को स्कूल को 100 किलो गेहूं और 50 किलो चावल मिले हैं. इससे फिलहाल राहत मिली है, लेकिन नियमित सप्लाई नहीं होने पर फिर परेशानी खड़ी हो सकती है.

केस स्टडी-2: मल्टीपरपज स्कूल में 350 बच्चों का भोजन, राशन से सिर्फ तीन दिन का इंतजाम
कोटा के गुमानपुरा स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम मल्टीपरपज स्कूल में 900 से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते हैं. यहां नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों के लिए पोषाहार बनाया जाता है. रोजाना करीब 350 बच्चों का भोजन तैयार होता है, जिसके लिए लगभग 35 से 40 किलो गेहूं और इतनी ही मात्रा में चावल की जरूरत पड़ती है.

स्कूल में लंबे समय से खाद्यान्न की कमी बनी हुई है. पोषाहार प्रभारी खुशबू के मुताबिक, जनवरी-फरवरी के बाद से अनाज की नियमित सप्लाई नहीं हुई और मार्च से परेशानी बढ़ने लगी. अप्रैल में शिकायतें की गईं, जिसके बाद मई में खाद्यान्न मिला, लेकिन वह जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं था. जुलाई में मिला स्टॉक अगस्त तक खत्म होने लगा और फिर से राशन की किल्लत हो गई.

स्कूल प्रबंधन ने विभाग को पत्र लिखकर बच्चों की संख्या और खाद्यान्न की जरूरत बताई, लेकिन समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई. हालात ऐसे बने कि बच्चों के भोजन का इंतजाम करने के लिए भामाशाहों, व्यापार संघ और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों की मदद लेनी पड़ी. कई बार बच्चों को कम पोषाहार देकर काम चलाना पड़ा. अब दूसरे स्कूल से 100 किलो गेहूं और 50 किलो चावल की व्यवस्था की गई है. स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, इससे करीब तीन दिन तक ही भोजन बन सकेगा. इसके बाद नियमित सप्लाई नहीं हुई तो फिर भामाशाहों और स्थानीय लोगों से मदद लेनी पड़ सकती है.

केस स्टडी-3: नयापुरा स्कूल बना 11 स्कूलों का सप्लाई सेंटर, 13 क्विंटल गेहूं और 6 क्विंटल चावल पहुंचे
ज़ी मीडिया की टीम कोटा के नयापुरा स्थित महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल भी पहुंची. यहां से जुड़े यूको में कुल 11 स्कूल शामिल हैं. इन स्कूलों की खाद्यान्न संबंधी जरूरतों और रिपोर्ट का संकलन यहां किया जाता है. इसके बाद संबंधित विभाग को जानकारी भेजी जाती है और उपलब्ध खाद्यान्न का वितरण किया जाता है.

स्कूलों से लगातार मिड-डे-मील में राशन की कमी की शिकायतें मिलने के बाद 27 अक्टूबर को यहां 13 क्विंटल गेहूं और 6 क्विंटल चावल पहुंचाए गए. इस खाद्यान्न में से नयापुरा स्कूल सहित संबंधित स्कूलों की जरूरत के अनुसार वितरण किया जाना है. योजना के मुताबिक, अन्य स्कूलों को 100 किलो गेहूं और 50 किलो चावल दिए जाएंगे, ताकि वहां भी बच्चों के भोजन की व्यवस्था चल सके.

स्कूल के पोषाहार प्रभारी हजेंद्र सिंह हाड़ा ने बताया कि यूको से जुड़े स्कूलों से मासिक रिपोर्ट मांगी जाती है. संबंधित प्रभारी और प्रधानाचार्य भी खाद्यान्न की कमी होने पर सूचना देते हैं. कई स्कूलों में खाद्यान्न पूरी तरह खत्म होने की स्थिति सामने आई थी. इसकी जानकारी आगे भेजी गई, लेकिन पर्याप्त आवंटन नहीं मिलने के कारण सप्लाई में कमी बनी रही.

उन्होंने बताया कि इस बार स्कूलों में बच्चों के नामांकन के अनुपात में जितना खाद्यान्न मिलना चाहिए था, उसकी तुलना में कम खाद्यान्न प्राप्त हुआ. ऐसे में कुछ स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर पर योगदान दिया, जबकि भामाशाहों की मदद से भी भोजन की व्यवस्था की गई. जरूरत पड़ने पर दूसरे स्कूलों से उधार खाद्यान्न लेकर काम चलाया गया.

नयापुरा स्कूल में भी करीब 450 बच्चों का भोजन तैयार होता है. पोषाहार प्रभारी के मुताबिक, दीपावली की छुट्टियों तक उपलब्ध खाद्यान्न से व्यवस्था चलने की उम्मीद है. इसके बाद नियमित सप्लाई मिलने पर ही व्यवस्था सुचारू रूप से जारी रह सकेगी.

जिला कलेक्टर बोले- फर्म को ब्लैकलिस्ट किया, बुधवार तक जांच रिपोर्ट
मामले को लेकर कोटा जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने बताया कि सरकारी गोदामों से स्कूलों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए एक फर्म को ट्रांसपोर्टेशन का टेंडर दिया गया था. संबंधित फर्म की जिम्मेदारी थी कि प्रमाणित गोदाम से खाद्यान्न उठाकर निर्धारित स्कूलों तक पहुंचाए.

कलेक्टर के मुताबिक, पिछले तीन महीनों के रिकॉर्ड की जांच के दौरान खाद्यान्न की सप्लाई में अंतर सामने आया. इस संबंध में फर्म से जवाब मांगा गया और नोटिस भी दिया गया. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है.

जिला कलेक्टर ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है. इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, एडीएम, जिला रसद अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं. कमेटी स्कूलवार आवंटन, गोदाम से उठाए गए खाद्यान्न और स्कूलों तक पहुंची सप्लाई का मिलान कर रही है. बुधवार तक विस्तृत रिपोर्ट आने की बात कही गई है.

उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्कूल में मिड-डे-मील के लिए खाद्यान्न की कमी नहीं रहे. फील्ड अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि खाद्यान्न समय पर स्कूलों तक पहुंचे. सप्लाई में सामने आए अंतर का विस्तृत आकलन किया जा रहा है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

जांच में सामने आया 3213 क्विंटल खाद्यान्न का अंतर
राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के तहत जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के लिए कोटा जिले के सरकारी स्कूलों को गेहूं और चावल आवंटित किया गया था. सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 से 21 जुलाई के बीच खाद्यान्न का शत-प्रतिशत उठाव दर्ज किया गया. इसके परिवहन की जिम्मेदारी गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को दी गई थी. फर्म को 32 रुपये 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से वर्कऑर्डर जारी किया गया था.

इसके बाद स्कूलों से पोषाहार के लिए खाद्यान्न कम पहुंचने की शिकायतें आने लगीं. शिक्षा विभाग ने ब्लॉकवार आवंटन और स्कूलों तक पहुंची सप्लाई का सत्यापन कराया. जांच में 1844 क्विंटल गेहूं और 1369 क्विंटल चावल की कमी सामने आई. इस तरह कुल 3213 क्विंटल खाद्यान्न का अंतर सामने आया. विभागीय आकलन के अनुसार, इस खाद्यान्न की सरकारी दर पर कीमत करीब 81 लाख रुपये और खुले बाजार में कीमत एक करोड़ से एक करोड़ 10 लाख रुपये तक बताई गई है.

जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय, प्रारंभिक, कोटा रूप सिंह मीणा के अनुसार, पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उठाए जाने के बावजूद स्कूलों से लगातार पोषाहार कम पड़ने की शिकायतें मिल रही थीं. सभी सीबीईओ से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें गोदाम से उठाव और स्कूलों में सप्लाई के बीच अंतर सामने आया. विभाग की ओर से रसद विभाग को लगातार पत्र लिखे गए. उनके मुताबिक, स्कूलों तक पहुंचाए गए खाद्यान्न से संबंधित पर्चियां भी उपलब्ध हैं.

नोटिस के बाद FIR, पुलिस कर रही जांच
खाद्यान्न की सप्लाई में गड़बड़ी सामने आने के बाद रसद विभाग ने फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और अधिकृत सहयोगी शैलेंद्र शर्मा को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. 15 अक्टूबर सुबह साढ़े दस बजे तक जवाब मांगा गया, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब नहीं मिला.

इसके बाद रसद विभाग की शिकायत पर नयापुरा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 316(2), 316(3) और 61(2)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है. वहीं, जिला प्रशासन ने परिवहन फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और स्कूलों तक खाद्यान्न की आपूर्ति दुरुस्त करने की कार्रवाई शुरू की है.

सबसे बड़ा सवाल: गोदाम से पूरा उठाव, फिर स्कूलों में राशन की किल्लत क्यों?
कोटा जिले के 1100 से ज्यादा सरकारी स्कूलों के लिए खाद्यान्न सप्लाई की व्यवस्था के बीच 3213 क्विंटल गेहूं-चावल का अंतर सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है. सरकारी रिकॉर्ड में गोदाम से खाद्यान्न का पूरा उठाव दर्ज है, लेकिन स्कूलों में बच्चों के भोजन के लिए गेहूं-चावल की कमी बनी रही.

ग्राउंड रिपोर्ट में तीन स्कूलों की स्थिति सामने आई. सूरजपोल स्कूल में दूसरे स्कूल से राशन मंगाना पड़ा. मल्टीपरपज स्कूल में 350 बच्चों के भोजन के लिए महज तीन दिन का खाद्यान्न बचा था. वहीं, नयापुरा स्कूल से जुड़े 11 स्कूलों में भी खाद्यान्न की कमी की शिकायतें सामने आईं. कई जगह शिक्षकों, भामाशाहों और व्यापारियों की मदद से पोषाहार की व्यवस्था की गई.

यह मामला केवल सरकारी खाद्यान्न के कथित गबन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के पोषण और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है, जिस अनाज का इस्तेमाल बच्चों की थाली में होना था, उसकी सप्लाई में इतना बड़ा अंतर कैसे आया? गोदाम से उठाया गया गेहूं-चावल कहां गया? निर्धारित मात्रा स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंची? और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

जिला कलेक्टर ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है. बुधवार को रिपोर्ट आने की उम्मीद है. अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे खाद्यान्न की कमी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो.

बच्चों को नियमित और पर्याप्त पोषाहार उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है. ऐसे में जांच के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी स्कूल में राशन की कमी के कारण बच्चों के भोजन पर असर न पड़े.  

Report- Chetan Gujar

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