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दिवाली से पहले जिन घरों में खुशियों के दीप जलने थे, वहां आज मातम पसरा है. कहीं मां की आंखें पथरा गई हैं, तो कहीं पिता जवान बेटे का शव देखकर सुध-बुध खो बैठे हैं. किसी मासूम ने पिता खो दिया, तो कहीं छह बहनों का इकलौता भाई हमेशा के लिए बिछड़ गया. झुंझुनूं जिले के मंडावरा, छापोली और उदयपुरवाटी के आठ परिवारों की दुनिया एक झटके में उजड़ गई. करंट ने आठ जिंदगियां छीन लीं और पीछे छोड़ गया दर्द, बेबसी और कभी न भरने वाले जख्म.
डेढ़ साल की बेटी के सिर से उठा पिता का साया
छापोली के मुकेश सैनी की उम्र महज 27 साल थी. घर की जिम्मेदारियां उठाने के लिए मजदूरी करता था लेकिन किसे पता था कि रोजी-रोटी की तलाश में निकला मुकेश कभी लौटकर नहीं आएगा. मुकेश की डेढ़ साल की मासूम बेटी है. पत्नी से तलाक होने के बाद बच्ची के लालन-पालन की पूरी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी. परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी. एक छोटा भाई और बहन भी हैं. अब मासूम बेटी के सिर से पिता का साया उठ चुका है और परिवार के सामने परवरिश का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. शोक में बैठे परिजन बार-बार मुकेश को याद कर रहे हैं. चाचा किशोरीलाल की आंखों में आंसू हैं. उन्हें चिंता है तो उस मासूम की, जिसे शायद अभी यह भी नहीं पता कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे.
परिवार का इकलौता सहारा था सुरेश, मूक-बधिर भाई करता रहा तलाश
इसी तरह छापोली के सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी की उम्र महज 30 साल थी. तीन भाइयों में एक भाई मूक-बधिर है. परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है. पिता भी बीमारी और ऑपरेशन के चलते ज्यादा काम नहीं कर पाते. ऐसे में सुरेश ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा था. हादसे ने परिवार का यह सहारा भी छीन लिया. भाई की मौत से अनजान मूक-बधिर भाई उसे तलाशता रहा. उधर, पिता महावीर की आंखों के सामने जवान बेटे का चेहरा घूम रहा है, जिस बेटे के भरोसे परिवार की गाड़ी चल रही थी, आज उसी बेटे को खोने के बाद परिवार बेसहारा हो गया है. एक तरफ जवान बेटे को खोने का गम और दूसरी तरफ परिवार के भविष्य की चिंता. पिता की जुबां पर अब बस एक ही मांग है. सरकार की घोषित सहायता जल्द मिले, ताकि परिवार किसी तरह अपना जीवन गुजार सकें.
छह बहनों का इकलौता भाई था नितेश, दो बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
इस हादसे ने छापोली और उदयपुरवाटी के दो परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसे शायद जिंदगीभर भुलाया नहीं जा सकेगा. उदयपुरवाटी निवासी 30 वर्षीय नितेश सैनी छह बहनों का इकलौता भाई था. पांच साल पहले शादी हुई थी. दो छोटे-छोटे बच्चों का पिता भी था. पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी. छह बहनों के बीच इकलौते भाई की मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया, जिस घर में भाई और बच्चों की खुशियों से रौनक रहती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं. परिवार के लोगों को समझ नहीं आ रहा कि अब घर का खर्च कैसे चलेगा और मासूम बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा.
जीजा-साले की एक साथ मौत से दो परिवारों में पसरा मातम
वहीं, इस हादसे में नितेश के जीजा और काम का ठेका लेने वाले 38 वर्षीय विष्णु सैनी की भी जान चली गई. विष्णु भी दो मासूम बच्चों का पिता था. एक ही हादसे में जीजा और साले दोनों की मौत से दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छिन गईं. नितेश के भतीजे शुभम और चाचा भंवरलाल की आंखें नम हैं. उनकी मांग है कि सरकार ने जो आर्थिक सहायता और नौकरी देने की घोषणा की है, उसका लाभ जल्द से जल्द परिवारों तक पहुंचाया जाए.
मंडावरा में चार घरों के बुझ गए चिराग, बूढ़ी मां ने खोया जवान बेटा
मंडावरा गांव में भी चार परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छिन गई. 30 वर्षीय हरिराम तीन भाइयों में सबसे छोटा था. उसकी मौत से इकलौती बहन ने अपना भाई खो दिया. वहीं, बूढ़ी मां जवान बेटे का शव देखकर सुध-बुध खो बैठी. 23 वर्षीय पवन और 29 वर्षीय कालूराम की मौत ने भी परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया. जवान बेटों की लाशें देखकर परिजनों की चीखें हर किसी का कलेजा चीर रही थीं.
सरकार ने 15 लाख की सहायता और नौकरी का किया ऐलान, परिवारों को इंतजार
दिवाली से ठीक पहले आठ परिवारों के घरों में अंधेरा छा गया. पांच घायल परिवारों की चिंता भी अभी खत्म नहीं हुई है. किसी ने बेटा खोया, किसी ने भाई और किसी मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया. सरकार ने मृतकों के परिजनों को 15 लाख रुपये की सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है. अब पीड़ित परिवारों की एक ही गुहार है कि यह घोषणा कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जल्द से जल्द धरातल पर उतरे क्योंकि अपनों को खोने का दर्द किसी मुआवजे से कम नहीं हो सकता लेकिन आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन परिवारों को सरकार का सहारा जरूर मिल सकता है.