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घूंघट की ओट से गांव की सत्ता तक: पंचायत चुनाव में महिलाओं की एंट्री, जयपुर में 837 नामांकन

Rajasthan News: घूंघट की ओट से गांव की सत्ता तक पहुंचने की तैयारी, राजस्थान में गांव की सरकार चुनने के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है. जयपुर में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नामांकन के आखिरी दिन लोकतंत्र के कई रंग देखने को मिले. कहीं भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों ने समर्थकों के साथ दमखम दिखाया, तो कहीं घूंघट में महिलाएं नामांकन दाखिल करने पहुंचीं. जयपुर जिला परिषद के 57 वार्डों और जिला परिषद और आठ पंचायत समितियों में कुल 837 नामांकन हुए हैं.

Reported By Deepak Goyal Edited By SAGAR CHAUDHARY
Published: Oct 13, 2026, 08:37 PM IST | Updated: Oct 13, 2026, 08:46 PM IST
Image Credit: Jaipur Panchayat Chunav Women Nomination (AI IMAGE)
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Rajasthan Panchayat Chunav: चेहरे पर घूंघट, हाथों में नामांकन के कागजात और गांव की सरकार में भागीदारी की उम्मीद. पंचायती राज चुनाव के पहले चरण में नामांकन के अंतिम दिन ग्रामीण लोकतंत्र की ऐसी ही दिलचस्प तस्वीरें सामने आईं. घर की चौखट से निकलकर महिलाएं पंचायत की सत्ता में अपनी जगह बनाने के लिए चुनावी मैदान में उतरीं. घूंघट में नामांकन दाखिल करने पहुंचीं महिला प्रत्याशियों ने ग्रामीण राजनीति में परंपरा और बदलाव की झलक दिखाई. वहीं भाजपा-कांग्रेस के दावेदारों ने समर्थकों के साथ पूरे दमखम से पर्चे भरे. सहायक रिटर्निंग अधिकारी कार्यालयों में दिनभर चुनावी गहमागहमी रही. जयपुर जिला परिषद और पहले चरण की आठ पंचायत समितियों के लिए 8 से 13 अक्टूबर तक कुल 837 नामांकन दाखिल हुए. जिला परिषद के 57 वार्डों के लिए 234 नामांकन प्राप्त हुए, जिनमें कांग्रेस के 110, भाजपा के 65 और अन्य के 59 शामिल हैं. वहीं आठ पंचायत समितियों के 146 वार्डों में 603 नामांकन हुए. इनमें कांग्रेस के 250, भाजपा के 180 और अन्य के 173 नामांकन हैं. दोनों स्तरों पर कांग्रेस के कुल 360 और भाजपा के 245 नामांकन हुए. हालांकि स्क्रूटनी और नामांकन के बाद पूरी तस्वीर साफ होगी . नामांकन के दौरान घूंघट में पहुंचीं महिला प्रत्याशियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं. पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण समाज में बदलाव का संकेत है, लेकिन इसके साथ वास्तविक नेतृत्व का सवाल भी जुड़ा है. चुनाव जीतने के बाद महिला प्रतिनिधि कितनी स्वतंत्रता से फैसले लेंगी और गांव के विकास में उनकी कितनी प्रभावी भूमिका होगी, यह देखना अहम रहेगा. ग्रामीण राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रही पुरुष परिजनों के हस्तक्षेप की चुनौती के बीच महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पंचायत व्यवस्था की दिशा तय करेगी.

पंचायत समितियां: वार्ड और नामांकन परिस्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों में किसकी पकड़
पंचायत चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक पकड़ परखने का अवसर हैं. हालांकि यहां विधानसभा और लोकसभा चुनावों से अलग स्थानीय रिश्ते, जातीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि और गांव में उसकी सक्रियता भी भूमिका निभाती है. आठ पंचायत समितियों में चाकसू 104 नामांकन के साथ सबसे आगे रहा. गोविंदगढ़ में 94, जोबनेर में 86 और किशनगढ़ रेनवाल में 75 नामांकन हुए. नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ अब प्रत्याशियों का रुख मतदाताओं की चौखट की ओर होगा. गांवों में सड़क, पानी, सफाई, बिजली और विकास कार्यों जैसे स्थानीय मुद्दों पर चुनावी चर्चा तेज होने की संभावना है. प्रत्याशियों को राजनीतिक समर्थन के साथ ग्रामीणों का व्यक्तिगत विश्वास भी जीतना होगा. चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. पहले चरण में 22 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा.

बिछ चुकी है सियासी बिसात 
बहरहाल, फिलहाल गांव की सरकार चुनने के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है. एक ओर भाजपा-कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरी ओर घूंघट से निकलकर चुनावी मैदान में उतरी महिलाओं की भागीदारी ने इस चुनाव को सामाजिक बदलाव के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना दिया है. अब मतदाता तय करेंगे कि पंचायत की सत्ता की बागडोर किसके हाथ में होगी. 

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