जयपुर कमिश्नरेट के दोनों गेटों पर महा-घमासान ! सैकड़ों कांग्रेसी सड़कों पर उतरे
NUSI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के समर्थन में और जीरो FIR दर्ज करवाने की मांग को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन अब और भी आक्रामक हो गया है. जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के अंदर और बाहर दोनों तरफ हालात गरमा गए हैं, जहां सैकड़ों की तादाद में कांग्रेसी कार्यकर्ता कमिश्नरेट के मेन गेट पर जमा हो चुके हैं. तो वहीं कमिश्नरेट के दोनों गेटों पर जोरदार प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसे देखते हुए मौके पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के तहत बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.
इससे पहले जयपुर कमिश्नरेट में देर रात से कांग्रेस का धरना प्रदर्शन जारी रहा. NSUI की रितु बराला के मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने के मामले को लेकर धरना चल रहा है. पुलिस कमिश्नरेट में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह, धर्मेंद्र राठौर NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ समेत तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा कांग्रेस के आला नेता मौजूद है, वहीं जीरो FIR को लेकर कांग्रेस ने आर पार का ऐलान कर दिया है.
यह पूरा मामला दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)ऑफिस के बाहर हुए एनएसयूआई (NSUI) के प्रदर्शन के दौरान हुआ था. आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की एक महिला कांस्टेबल ने NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ मारपीट की थी. इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इसके बाद रितु बराला जयपुर पहुंचीं और स्थानीय विधायकों (रफीक खान और अमीन कागजी) के साथ मोती डूंगरी थाने में मामला दर्ज करवाने गईं, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय शिकायत को परिवाद में रख लिया.
कब से चल रहा है धरना ?
सोमवार (19 अक्टूबर 2026) शाम से शुरू हुआ ये धरना, पूरी रात चला है .रातभर कांग्रेस नेताओं ने कमिश्नरेट परिसर में ही रहे और वहीं बिस्तर बिछाकर सो गये. जिनमें पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और कई विधायक शामिल हैं. कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि देश के कानून के मुताबिक किसी भी राज्य या क्षेत्र में हुई घटना के लिए अन्य स्थान पर जीरो एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है, लेकिन पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते एफआईआर दर्ज करने से बच रही है.आपको याद दिला दें कि इस मामले पर राहुल गांधी ने पीसीसी चीफ डोटासरा को फोन कर जयपुर में इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाने की पहल करने को कहा था.
अशोक गहलोत ने क्या कहा ?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कल देर रात (लगभग 12 बजे) पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे थे और धरने में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि "कानून में 'जीरो नंबरी एफआईआर' दर्ज करने का प्रावधान है, इसके बावजूद पुलिस केस दर्ज नहीं कर रही है. अगर यदि दूसरे राज्यों में एफआईआर दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान में क्यों नहीं ?
डोटासरा ने क्या कहा ?
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि "एफआईआर दर्ज कराना रितु बराला का अधिकार है, पुलिस की कोई मेहरबानी नहीं. देश में दो तरह के कानून नहीं हो सकते. जब तक पुलिस एफआईआर दर्ज करके उसकी कॉपी हमें नहीं सौंपती, तब तक कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है. विजयदशमी का पर्व है, अंततः न्याय और सत्य की जीत होगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कमिश्नरेट स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मंगलवार को पूरे प्रदेश से कार्यकर्ता जयपुर आकर कमिश्नरेट का घेराव करेंगे.
न्याय मिलने तक न झुकेंगे, न रुकेंगे और न अन्याय सहेंगे-टीकाराम जूली
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने देश में दो तरह के कानून न चल सकने की दो टूक बात कहते हुए भाजपा सरकार पर कड़ा निशाना साधा. उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में पुलिस कमिश्नरेट पहुँचकर इस लड़ाई में शामिल हों.
क्या है ज़ीरो FIR ?
ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) भारतीय कानून व्यवस्था का एक ऐसा प्रावधान है, जो किसी पीड़ित या शिकायतकर्ता को ये सुविधा देता है कि वो देश के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है. आम तौर पर पुलिस केवल अपने क्षेत्र में हुई घटनाओं की ही एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन गंभीर अपराधों के मामलों में समय बचाने और तुरंत कार्रवाई करने के उद्देश्य से ज़ीरो एफआईआर का नियम बनाया गया है. इसे 'ज़ीरो' (0) एफआईआर कहने के पीछे की वजह है कि सामान्य एफआईआर दर्ज होने पर उसे एक खास नंबर (जैसे- FIR No. 125/2026) दिया जाता है. लेकिन जब किसी ऐसे थाने में शिकायत दर्ज कराई जाती है जिसके अधिकार क्षेत्र में वो घटना नहीं हुई है, तो पुलिस उस एफआईआर को बिना कोई सीरियल नंबर दिए '0' (ज़ीरो) नंबर के तहत दर्ज करती है.
ये भी पढ़ें : चौपाल से संसद तक : पंचायती राज की सीढ़ी से दिल्ली-जयपुर पहुंचे राजस्थान के ये दिग्गज नेता!